हैवी वर्कआउट अचानक बंद करने से भी शरीर पर बनने लगती है गांठ

हैवी वर्कआउट अचानक बंद करने से भी शरीर पर बनने लगती है गांठ

गांठ (सिस्ट) शरीर के किसी हिस्से में हो सकती है जिसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ गांठे जन्मजात होती हैं जो जन्म के कुछ समय बाद दिखती हैं फिर अपने आप ठीक हो जाती हैं।

गांठ (सिस्ट) शरीर के किसी हिस्से में हो सकती है जिसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ गांठे जन्मजात होती हैं जो जन्म के कुछ समय बाद दिखती हैं फिर अपने आप ठीक हो जाती हैं। कुछ गांठे चोट लगने, किसी तरह का संक्रमण होने, रक्त प्रवाह बाधित होने और फैट अधिक होने से भी होती हैं। इन्हीं में से कुछ गांठे कैंसर का रूप हो सकती हैं। फ्लूड भरने पर भी त्वचा में उभार दिखता है। कुछ गांठे हल्की टाइट होती हैं तो कुछ में गैस भरी होती है जिसे दबाने से पिचकती हैं। जैसे ही छोड़ देंगे दोबारा उभर जाएगी। इसलिए शरीर के किसी हिस्से में गांठ है और किसी तरह की परेशानी हो रही है तो इसे नजरअंदाज न करें। बिना देर किए डॉक्टरी सलाह लें। देरी कई तरह की मुश्किल खड़ी कर सकती है।

अचानक वर्कआउट बंद करने से भी गांठ

आज के समय में जिमिंग फैशन बन गया है और हर कोई वर्कआउट कर रहा है। जो लोग अचानक से वर्कआउट बंद कर देते हैं। वर्कआउट अचानक बंद करने से शरीर में फैट के वितरण का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके बाद शरीर के अलग-अलग हिस्से में गांठ जैसा उभार दिखने लगता है जिसे लाइपोमा कहते हैं। ऐसे में वर्कआउट कर रहे हैं तो अचानक वर्कआउट बंद न करें। रोजाना एक्सरसाइज के साथ रनिंग और वॉक करना जरूरी है जिससे इस समस्या से बचा जा सकता है। सामान्य लोग रोजाना तीन से पांच किमी. की वॉक कर सकते हैं। हृदय या बीपी संबंधी समस्या है तो क्षमता अनुसार टहलें। इस समस्या से बचे रहेंगे।

बच्चेदानी में गांठ पर अनियमित माहवारी

महिलाओं में बच्चेदानी में गांठ की समस्या होने पर अनियमित माहवारी की समस्या होती है। महिलाओ में ओवेरियन सिस्ट की समस्या अधिक होती है। सिस्ट का आकार पांच सेमी. से छोटा है तो इसमें कुछ करने की जरूरत नहीं है। कुछ दवाओं से घुलकर निकल जाती है। सिस्ट का आकार इससे बड़ा होता तो ऑपरेशन से उसे निकाला जाता है। ओवेरियन सिस्ट को समय रहते नहीं निकाला जाए तो भीतर ही इसके रप्चर होने का खतरा रहता है। इससे शरीर में संक्रमण होने के साथ रक्तस्राव का खतरा रहता है जिससे महिला की हालत अचानक बहुत अधिक बिगड़ सकती है।

इन कारणों से भी बनती गांठ

आनुवांशिक कारणों से भी गांठ संबंधी समस्या होती है। इसमें गदर्न में गांठ, सिर के पीछे, कान के पीछे, रीढ़ के निचले हिस्से में गांठ होती है। ये समस्या परिवार में माता-पिता किसी को होती है तो बच्चों को होने की संभावना 50 फीसदी बढ़ जाती है। ऐसे में परिवार में किसी को इस तरह की समस्या पहले से है तो बच्चों का खास खयाल रखना चाहिए। उनके शरीर पर गांठ हो रही है तो शिशु रोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेना चाहिए। इसी तरह संक्रमण होने या ट्रॉमा के मामले में कई बार ब्लड जम जाता है जिससे गांठ बनती है।

गांठ होने पर होती ऐसी तकलीफें

सिर में गांठ होने पर सिर में तेज दर्द होता है। फेफड़े में गांठ संबंधी समस्या होने पर सांस लेने में दर्द के साथ खिंचाव महसूस होता है। ओवेरियन सिस्ट होने पर लोवर एब्डॉमेन में दर्द होगा। त्वचा की गांठ में सूजन के साथ दर्द हो सकता है। कुछ मामलों में पीडि़त को ऐसा आभास होता है कि सके भीतर कुछ चल रहा है। कई बार ये गांठें धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाती हैं जिससे व्यक्ति का जीवन प्रभावित होने लगता है।

गांठ संबंधी समस्या में ऐसे करते जांच

गांठ की समस्या में पहले तो एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं जिससे वे ठीक हो जाती हैं। जो गांठे अपने आप ठीक नहीं होती हैं उसकी पहले जांच होती है। इसमें सबसे पहले एफएनएसी (फाइन निडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी) जांच करते हैं। इसके बाद चिकित्सक अपने अनुसार सीटी स्कैन या एमआरआई जांच करवाते हैं। रिपोर्ट के आधार पर गांठ को ऑपरेशन से निकाल दिया जाता है। ऑपरेशन के बाद गांठ की जांच कराई जाती है जिससे पता चल सके कि गांठ कैंसरस तो नहीं है।

बच्चों को मिट्टी में न खेलने दें

बच्चों को मिट्टी में न खेलेन दें। मिट्टी में खेलने से बच्चों को पैरासाइट इंफेक्शन का खतरा अधिक रहता है। कई बार बच्चों को खेलते वक्त चोट लग जाती है जिसपर वे ध्यान नहीं देते और खून जम जाता है। इस तरह से भी बच्चों के शरीर पर गांठ संबंधी समस्या बन सकती है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसे में बच्चों के खानपान और इम्युनिटी का भी ध्यान रखना चाहिए जिससे उन्हें गांठ संबंधी समस्या से बचाया जा सके।

डायबिटीज रोगी खास खयाल रखें

डायबिटीज रोगियों को पीठ पर गांठ की बनने की आशंका अधिक रहती है। जबकि महिलाओं में स्तन में गांठ की परेशानी अधिक रहती है। ऐसे में नियमित शुगर लेवल की जांच कराते रहना चाहिए। इसी तरह महिलाओं को स्तन की स्व जांच करनी चाहिए जिससे किसी तरह की गांठ संबंधी समस्या का समय रहते पता चल सके। 40 की उम्र के बाद ये जांच नियमित करते रहना चाहिए। स्तन से पस या खून निकल रहा है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

दूषित सब्जी खाने से भी बनती गांठ

बरसात के मौसम में पत्तेदार सब्जियां खाने से पैरासाइट इंफेक्शन होने का खतरा अधिक रहता है। पत्तेदार सब्जियों में टेपवॉर्म होते हैं। लार्वा की तरह पेट में जाता है जो गांठ बनाने का काम करते हैं। सिस्ट अगर पेट में फट जाए तो पेट के अलग-अलग हिस्सों में गांठ बन सकती है। गांठ फेफड़े में बन जाए तो जब खांसी आएगी तो बलगम में गांठ का कुछ हिस्सा बाहर निकलकर आ सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टरी सलाह जरूरी है। जो लोग मांस खाते हैं वे उसे अच्छे से पकाएं। अधपका मांस खाने से ब्रेन में गांठ बनने का खतरा भी रहता है। फास्ट फूड और तली भुनी चीजें खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि इसमें मिले तत्त्वों से गांठ बनती है।

डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, जनरल सर्जन
डॉ. कमलेन्द्र त्यागी, होम्योपैथी विशेषज्ञ

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