जानें एंजियोप्लास्टी के बारे में, क्या हैं इसके फायदे

हार्ट अटैक आने पर व्यक्ति को शुरुआती एक-डेढ़ घंटे के भीतर (गोल्डन आवर में) एंजियोप्लास्टी के रूप में उपचार मिलना चाहिए।

प्राइमरी एंजियोप्लास्टी क्या है ?

हार्ट अटैक आने पर व्यक्ति को शुरुआती एक-डेढ़ घंटे के भीतर (गोल्डन आवर में) एंजियोप्लास्टी के रूप में उपचार मिलना चाहिए। इस प्रकार की एंजियोप्लास्टी को प्राइमरी एंजियोप्लास्टी कहते हैं।

किस तरह की एंजियोप्लास्टी उपयुक्त होती है ?
प्राइमरी एंजियोप्लास्टी से अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं। इससे 50 फीसदी मृत्यु, दोबारा होने वाले हार्ट अटैक और हृदय का काम करना बंद कर देने जैसे मामलों से बचा जा सकता है।

स्टेंट किस तरह काम करता है ?
रक्तधमनी के जमा हिस्से में स्टेंट को एक बैलून पर लगाया जाता है। उचित दाब पर इसे लगाने के बाद बैलून कैथेटर और तारों को हटा लिया जाता है। लेकिन स्टेंट रक्तधमनी के भीतर ही आकार ले लेता है और उस जगह को चौड़ा कर देता है। इसलिए इसकी मदद से रुका हुआ रक्तप्रवाह फिर से शुरू हो जाता है।

स्टेंट लगवाने पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?
एंजियोप्लास्टी के बाद नियमित रूप से दवा, जीवनशैली में बदलाव और उचित देखभाल हर रोगी के लिए जरूरी है। रक्त पतला करने वाली दवाओं का उपयोग करते हुए अगर मरीज को कोई और बड़ी सर्जरी करवानी पड़ती है तो ऐसे में अत्यधिक खून बहने का खतरा रहता है।

बाईपास सर्जरी के मुकाबले एंजियोप्लास्टी के क्या फायदे हैं ?
एंजियोप्लास्टी में संक्रमण का खतरा कम रहता है और रोग में जल्दी सुधार होता है। इसे कराने पर मरीज को अस्पताल में कम समय के लिए भर्ती रहना पड़ता है और रक्त की क्षति भी कम होती है।

एंजियोप्लास्टी में मुश्किलें क्या हैं ?
इसका जोखिम रक्तप्रवाह बढऩे या खून इक्कठा होने का होता है। नए क्लॉट के साथ अचानक धमनी का बंद होना और हृदयाघात होने पर आपातकालीन बाईपास ग्राफ्ट प्रक्रिया की जरूरत हो सकती है।

विकास गुप्ता
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