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नियमित ब्रशिंग-फ्लॉसिंग से दांत-मसूढ़े स्वस्थ

खानपान की गलत आदतों से मुंह में पनपे बैक्टीरिया की नियमित सफाई न हो तो दांतों में सड़न, सांस की बदबू और ओरल कैंसर की आशंका रहती है

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नियमित ब्रशिंग-फ्लॉसिंग से दांत-मसूढ़े स्वस्थ

खानपान की गलत आदतों से मुंह में पनपे बैक्टीरिया की नियमित सफाई न हो तो दांतों में सड़न, सांस की बदबू और ओरल कैंसर की आशंका रहती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश की 95 फीसदी आबादी मसूढ़ों के रोगों से पीड़ित है। स्कूल में पढ़ने वालों में मुख्यत: दांत व मसूढ़े से जुड़े रोग सामने आने लगे हैं। हाल ही फिनलैंड की यूनि. ऑफ हेलिन्सकी में हुए शोध के अनुसार एक या अधिक दांतों की जड़ों में संक्रमण से हृदय रोगों का जोखिम 2.7 गुणा बढ़ जाता है। इसकी वजह संक्रमण के कारण पूरे शरीर में सूजन व जलन का होना है।

स्केलिंग है इलाज
संक्रमण को नियंत्रित कर मसूढ़ों के रोगों से छुटकारा पा सकते हैं। गहराई से सफाई करने की प्रक्रिया को स्केलिंग व रूट प्लानिंग कहते हैं, जिसमें प्लाक को हटाते हैं।स्केलिंग में मसूढ़ों की लाइन से टार्टर हटाते हैं जबकि रूट प्लानिंग में दांतों की जड़ों पर एकत्रित बैक्टीरिया को साफ करते हैं। यही बैक्टीरिया कई रोगों का कारक होते हैं।कई बार लेजर तकनीक से भी प्लाक और टार्टर का हटाया जाता है। इसमें दर्द और सूजन कम होने के साथ ही रक्तस्त्राव भी कम होता है।

बीमारी के 4 मुख्य कारण
स्मोकिंग : मसूढ़ों की बीमारी का एक प्रमुख कारण धूम्रपान भी है। साथ ही दांतों के सफल इलाज में भी यह बाधक बनता है।
हार्मोन्स में गड़बड़ी : हार्मोन्स में बदलाव से मसूढ़े सेंसिटिव हो जाते हैं। ऐसे में थोड़ी लापरवाही भी जिंजिवाइटिस का कारण है।
डायबिटीज : मधुमेह रोगियों में शुगर लेवल बिगडऩे से मसूढ़ों के रोग ज्यादा होते हैं।
दवाइयां : कई दवाइयां मुंह की सुरक्षा के लिए बनने वाले लार का निर्माण कम कर देती हैं। लार की कमी से मुंह में संक्रमण या मसूढ़ों की बीमारी होने की आशंका रहती है। कई बार कुछ दवाओं से मसूढ़ों के ऊत्तक बढ़ जाते हैं।

ऐसे बच सकते हैं
- रोजाना सुबह-शाम फ्लोराइड युक्त पेस्ट से ब्रश करें। दांतों के बीच का प्लाक हटाने के लिए फ्लॉसिंग (एक तरह के धागे से दांतों के बीच में सफाई) करें।
- धूम्रपान, शराब, तंबाकू व गुटखे की लत दांतों की चमक खराब कर देती है। दांतों की देखभाल के लिए इनसे दूरी बनाएं।
- दूसरों के टूथब्रश का इस्तेमाल न करें। इससे दांतों में संक्रमण हो सकता है।
- दांतों की बेहतर देखभाल के लिए कम से कम एक वर्ष में दो बार दांतों का चेकअप कराएं। ताकि किसी रोग या संक्रमण का समय पर पता लग सके।
- अगर आप दंत-मंजन इस्तेमाल में लेते हैं तो सुनिश्चित कर लें की मंजन अच्छी क्वालिटी का और सॉफ्ट हो। खुरदुरे दंत मंजन दातों को नुकसान पंहुचाते हैं।
- दांतों की सफाई के साथ-साथ जीभ की सफाई भी नियमित रूप से करें नहीं तो यह अधूरी सफाई मानी जाती है।

सफाई के अभाव में कई रोगों का खतरा
दांतों में सड़न
मुंह में बड़ी संख्या में बैक्टीरिया होते हैं। जो बलगम, लार व दूसरे तत्त्वों के साथ मिल दांतों पर एक चिपचिपी और रंगहीन पदार्थ (प्लाक) के रूप में जमा होते रहते हैं।ब्रश करने से प्लाक हट जाता है। लेकिन नियमित तौर पर ब्रश नहीं किया जाए तो धीरे-धीरे यह जमा होकर कठोर होने लगता है, जिसे टार्टर कहते हैं। यह इतना कठोर होता है कि सामान्य ब्रश से यह साफ नहीं होता। डेंटिस्ट्स की मदद से इसे हटवाना पड़ता है।

जिंजिवाइटिस
लंबे समय तक दांतों पर प्लाक व टार्टर के जमने से मुंह में बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है जिससे मसूढ़ों में संक्रमण होता है। इससे मसूढ़े फूल कर लाल हो जाते हैं व जलन के साथ खून आता है। यह जिंजिवाइटिस समस्या है। सफाई के अभाव में यह रोग गंभीर हो जाता है जिसके इलाज के लिए डेंटिस्ट की मदद लेनी होती है। इस रोग में दांतों को पकड़कर रखने वाली हड्डी व ऊत्तकों पर फर्क नहीं पड़ता।

पीरियोडॉन्टाइटिस
जिंजिवाइटिस का इलाज न होने पर स्थिति पीरियोडॉन्टाइटिस की बनती है। इसमें मसूढ़ों व दांतों के बीच में एक जगह बनने लगती है, जिसे पॉकेट्स कहते हैं। इनमें बैक्टीरिया के कारण संक्रमण होने लगता है। इलाज के अभाव में इंफेक्शन दांतों से जुड़ी हड्डियों व ऊत्तक को नष्ट कर देता है। ऐसे में दांत निकलवाना पड़ता है।

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