रिसर्च स्टोरी: मानसिक बीमारी दे रहा है सेल्फी का क्रेज

रिसर्च स्टोरी: मानसिक बीमारी दे रहा है सेल्फी का क्रेज

स्मार्ट फोन और टेबलेट के ज्यादा इस्तेमाल से तनाव, कार्पल टनल सिंड्रोम, टेंडी नैटिस (अंगूठे के मांसपेशी में दबाव व तनाव) व इन्क्रीज थम्ब (अंगूठे के आकार में बदलाव) की समस्या आम है।

कुछ लोगों में मानसिक विकार होते हैं
कुछ लोगों में मानसिक विकार होते हैं और लोग इसे हल्के में लेने की गलती कर देते हैं। यही गलती आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी गलती बन जाती है। जिस मानसिक विकार को लोग सामान्य समझकर ध्यान नहीं देते हैं वही मानसिक विकार भविष्य में गंभीर समस्या बन जाती है। यही कारण है कि भारत में मानसिक रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जानते हैं कुछ ऐसी मानसिक बामारियों के बारे में जिनसे लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है।

लोग अच्छा दिखने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करवा रहे हैं
अमरीकन साइकेट्रिक एसोसिएशन के अनुसार सेल्फी से मेंटल इलनेस बढ़ रही है। लोग अच्छा दिखने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करवा रहे हैं। स्मार्ट फोन और टेबलेट के ज्यादा इस्तेमाल से तनाव, कार्पल टनल सिंड्रोम, टेंडी नैटिस (अंगूठे के मांसपेशी में दबाव व तनाव) व इन्क्रीज थम्ब (अंगूठे के आकार में बदलाव) की समस्या आम है।

एक्सपर्ट की राय : मनोरोग विशेषज्ञ अखिलेश जैन के मुताबिक कुछेक मौकों पर सेल्फी लेना सामान्य है। लेकिन यदि व्यक्तिअपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के प्रमुख कामों से ज्यादा समय केवल सेल्फी लेने में बिता दे तो यह एक मनोरोग बनकर सामने आता है। इसमें उसे सेल्फी की लत लग जाती है।

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