ऊर्जा चिकित्सा से चुस्त-दुरुस्त रहें

ऊर्जा चिकित्सा से चुस्त-दुरुस्त रहें
Energy Medicine

भारतीय संस्कृति में ध्यान, योग एवं अध्यात्म को महत्व इसीलिए दिया गया है क्योंकि ऊर्जा-तंत्र (एनर्जी सिस्टम) को संतुलित रखने के लिए इनकी बड़ी भूमिका है

भारतीय संस्कृति में ध्यान , योग एवं अध्यात्म को महत्व इसीलिए दिया गया है क्योंकि ऊर्जा-तंत्र (एनर्जी सिस्टम) को संतुलित रखने के लिए इनकी बड़ी भूमिका है। आधुनिक बनने की होड़ में हमने इनसे दूरी बना ली जिसके चलते ऊर्जा-तंत्र गड़बड़ाने लगा और शारीरिक व मानसिक परेशानियां बढ़ गईं। ऐसे में विशेषज्ञ ऊर्जा चिकित्सा पद्धति के जरिए सेहत को दुरुस्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

रहते हैं स्वस्थ

एनर्जी-हीलर नैंसी के मुताबिक ऊर्जा चिकित्सा खुद को स्वस्थ एवं सुखी बनाए रखने का माध्यम है। इससे ऊर्जा-तंत्र को व्यवस्थित बनाकर बीमारियों से बचा जा सकता है। स्थूल के अलावा हमारा एक ऊर्जा शरीर भी होता है जो हमारे आसपास रहता है। यह ऊर्जा शरीर हमारी बॉडी को पूरी तरह से नियंत्रित करता है।

जब भी हमें किसी प्रकार का कोई रोग होता है तो वह ऊर्जा शरीर में गड़बड़ी के कारण ही होता है। एनर्जी हीलर विशेषज्ञ योगाभ्यास और ध्यान के माध्यम से इस ऊर्जा शरीर की गड़बड़ी को दूर करते हैं जिसे ऊर्जा चिकित्सा उपचार कहते हैं। ऊर्जा चिकित्सा में हीलर और हीली (मरीज) दोनों की क्षमता व योग्यता की बड़ी भूमिका होती है।

आभा मंडल और चक्र

दरअसल, हर व्यक्ति का अपना एक ऑरा होता है जिसे आभा-मंडल, प्रभा-मंडल या ऊर्जा-मंडल कहते हैं। यह आभा-मंडल शरीर के 7 चक्रों से नियंत्रित एवं संचालित होता है। ये चक्र ही हमारे मानसिक, शारीरिक या भावनात्मक स्वास्थ्य को नियंत्रित करते हैं।

ये चक्र शरीर में मेरूदंड यानी स्पाइनल कोर्ड में नीचे से ऊपर की ओर होते हैं। इनके जरिए ही हम ऊर्जा का आदान-प्रदान करते हैं। इन चक्रों की हमारे स्वास्थ्य में बहुत बड़ी भागीदारी है। प्रत्येक चक्र किसी विशेष ग्रंथि, अंग, व्यक्तित्व और अध्यात्मिक विकास से जुड़ा हुआ है।

कौन-कौन से चक्र?

मूलाधार चक्र : इस चक्र का रंग लाल माना गया है और इसका संबंध रीढ़ की हड्डी की रक्त कोशिकाओं से है।
स्वधिष्ठान चक्र : नारंगी रंग के इस चक्र का संबंध प्रजनन अंगों और व्यक्ति के व्यवहार से माना गया है।
मणिपुर चक्र : इस पीले रंग के चक्र का संबंध बुद्धि और शक्ति से माना जाता है। इसमें असंतुलन अवसाद और दिमागी रोगों का संकेत है।


अनाहत चक्र : इस चक्र का रंग हरा है। इसमें असंतुलन से दमा व फेफड़ों की बीमारी हो सकती है।
विशुद्ध चक्र: इस चक्र का रंग हल्का नीला है और इसका संबंध गले व आवाज से माना गया है। इसमें गड़बड़ी से गले की बीमारियां हो सकती हैं।


आज्ञा चक्र : गहरे नीले रंग का यह चक्र दोनो भौहों के मध्य में स्थित होता है। इसका संबंध सात्विक ऊर्जा से है। कहा जाता है कि सीधे आज्ञा चक्र पर अधिक ऊर्जा देने से सभी चक्रों को संतुलित किया जा सकता है।


सहस्रार चक्र : इस चक्र का रंग सफेद है। इसका आकार शतदल-कमल जैसा माना जाता है। कहा जाता है कि इस चक्र को संतुलित कर स्वास्थ्य को दुरुस्त रखा जा सकता है।

जब चक्र हो जाएं असंतुलित

दरअसल, स्वस्थ एनर्जी सिस्टम में एक से दूसरे चक्र के बीच ऊर्जा का संचरण संतुलित एवं निर्बाध होना चाहिए लेकिन कई बार जब चक्रों में अवरोध, असंतुलन और असमन्वय हो जाता है तो हम बीमार पड़ जाते हैं। यह अवरोध या असंतुलन नकारात्मक विचारों और भावनाओं के कारण, व्यक्ति के आसपास के माहौल एवं वातावरण से और कई बार जन्म से ही किसी के चक्रों में असंतुलन की वजह से भी हो सकता है।

चक्र साधने के लिए योग-ध्यान

ऊर्जा शरीर को ठीक करने के लिए सबसे पहला उपाय है कि आप सकारात्मक सोच अपनाएं और अपने आसपास खुशनुमा माहौल बनाएं। इसके अलावा एनर्जी हीलर की मदद से इन सातों चक्रों को संतुलित रखने के लिए नियमित योगाभ्यास एवं ध्यान करें।

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