ये सावधानी बरतकर आप भी कर सकते है स्वाइन फ्लू से अपना बचाव

ये सावधानी बरतकर आप भी कर सकते है स्वाइन फ्लू से अपना बचाव

Kamal Rajpoot | Publish: Sep, 05 2017 03:48:00 PM (IST) डिजीज एंड कंडीशन्‍स

सरकार व स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इससे निपटने के लिए रोग क्या है, कैसे फैलता है, क्या सावधानी बरतें और उपचार के विकल्पों के बारे में जानना होगा।

देशभर में महामारी का रूप लेती जा रही है स्वाइन फ्लू बीमारी। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा हाल ही जारी आंकड़ों के अनुसार इस साल अब तक स्वाइन फ्लू से लगभग एक हजार लोगों की मृत्यु व 22 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। पिछले साल अगस्त में भारत में इससे 265 लोगों की मौत व 1786 मामले संक्रमण के सामने आए थे। इस रोग के कारण फिलहाल महाराष्ट्र में 437, गुजरात में 269, केरल में73 और राजस्थान में 69 मरीजों की मौत हो चुकी हैं। सरकार व स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इससे निपटने के लिए रोग क्या है, कैसे फैलता है, क्या सावधानी बरतें और उपचार के विकल्पों के बारे में जानना होगा।

क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू एच१एन१ टाइप के वायरस से फैलने वाला रोग है। यह तेजी से फैलकर नाक, फेफड़ों व गले पर असर करता है। २००९ में यह वायरस पूरी दुनिया में फैला था, तब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे महामारी घोषित किया था। हालांकि इससे घबराने की जरूरत नहीं, समय पर लक्षणों की पहचान कर इलाज लेने से रोग पर काबू पाया जा सकता है। लेकिन देरी होने पर यह वायरस बुखार, खांसी और सांस में तकलीफ को बढ़ा सकता है और निमोनिया का कारण भी बनता है। श्वांस तंत्रिका के कार्य बंद कर देने से मौत भी हो सकती है।

संक्रमण व सावधानी
यह वायरस संक्रमित व्यक्तिके खांसने, छींकने, हाथ मिलाने व गले मिलने से फैलता है। इस दौरान मुंह और नाक से निकली छोटी बूंदों से यह वायरस फैलता है। वहीं यह वायरस स्टील या प्लास्टिक में २४-४८ घंटे, कपड़ों में ८-१२ घंटे, टिश्यु पेपर में १५ मिनट तक और हाथों में ३० मिनट तक सक्रिय रहता है।

बचाव : साफ-सफाई रखें। शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं व दूसरों से एक मीटर की दूरी बनाकर रखें। बीमार होने पर स्कूल, ऑफिस, मंदिर या सार्वजनिक जगह पर जाने के बजाय घर पर रहें। हाथों को साबुन-पानी से दिन में कई बार धोएं। छींकते समय रुमाल या टिश्यु पेपर प्रयोग में लें। टिश्यु पेपर को खुले स्थान में न फेकें। आंख, नाक व मुंह बार-बार न छुएं, न ही हाथ मिलाएं। लिक्विड डाइट लें। रोगी के परिजन मुंह पर मास्क लगाकर रखें।

ये सावधानी बरतें : कमजोर इम्युनिटी, ६० वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति, लिवर, किडनी, डायबिटीज, दमा व एड्स के रोगी, नवजात शिशु व छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं बचाव के तरीकों को अपनाएं।

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