कैंसर का पता लगाती हैं ये तकनीकें

कैंसर का पता लगाती हैं ये तकनीकें

Jitendra Kumar Rangey | Publish: May, 01 2019 10:14:42 AM (IST) | Updated: May, 01 2019 10:14:43 AM (IST) डिजीज एंड कंडीशन्‍स

कई बार परेशानी होने के बावजूद भी बीमारी के लक्षण स्पष्ट नहीं होते। ऐसे में विशेषज्ञ इन तकनीकों के माध्यम से रोग का पता लगाते हैं।

मेमोग्राम : मेमोग्राम एक प्रकार से ब्रेस्ट का एक्स-रे है। इसके जरिए उन महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की जांच की जाती है, जिनमें बीमारी के कोई लक्षण या संकेत स्पष्ट नहीं होते। स्क्रीनिंग मेमोग्राम कैल्शियम के छोटे-छोटे जमाव की खोज कर सकते हैं जो कई बार ब्रेस्ट कैंसर के संकेतक होते हैं।
पेप स्मियर : यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सर्विक्स से कोशिकाएं एकत्र की जाती हैं। यह गर्भाशय का कैंसर का पता लगाने में मददगार है। साथ ही यह सर्वाइकल कोशिकाओं में हो रहे उन बदलावों को भी पहचान सकता है जो भविष्य में कैंसर का जोखिम पैदा कर सकते हैं।
प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजेन (पीएसए) : प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए यह टैस्ट किया जाता है। यह पीएसए के ब्लड लेवल को मापता है। पीएसए एक प्रकार का प्रोटीन है जिसका उत्पादन प्रोस्टेट ग्रंथि द्वारा किया जाता है। किसी व्यक्तिमें पीएसए लेवल की मात्रा ज्यादा होने की स्थिति में उसमें प्रोस्टेट कैंसर की आशंका बढ़ जाती है।
कोलोनोस्कोपी : इसमें कोलोनोस्कोप की मदद से शरीर की आंतरिक स्थिति को समझते हैं। कोलोनोस्कोप पतले व लचीले ट्यूब जैसा होता है जिसके आखिर में वीडियो कैमरा लगा होता है। गुदा द्वारा इसे पेट में डालकर अंदरूनी अंगों की जांच की जाती है।

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