scriptBeneshwarThe tradition of Rasleela going on for 300 years | Beneshwar mela: 300 सालों से चल रही रासलीला की परम्परा | Patrika News

Beneshwar mela: 300 सालों से चल रही रासलीला की परम्परा

वर्ष की छह पूर्णिमा पर होता है आयोजन
बेणेश्वरधाम पर साद समाज ने की रासलीला...

डूंगरपुर

Published: February 18, 2022 11:19:26 am

वर्ष की छह पूर्णिमा पर होता है आयोजन
बेणेश्वरधाम पर साद समाज ने की रासलीला...
साबला. संत मावजी महाराज ने धर्म के प्रसार प्रचार को लेकर ३०० वर्षों पूर्व बेणेश्वरधाम के साथ सुनैया पहाड़ पर रासलीला की। क्षेत्र में भक्ति का अलख जगाई। इसी परंपरा का निर्वहन आज भी जारी है। साद समाज के नारायणलाल साद ने बताया कि संत मावजी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की अधूरी रासलीला को बेणेश्वधाम पर पूरा किया। साथ ही विश्वस्तर पर धर्म के प्रसार प्रचार के लिए रासलीला को लेकर आशीर्वाद दिया। आज भी उस परम्परा का साद समाज पीढ़ी दर पीढ़ी निवर्हन रहा है। वर्ष की छह पूर्णिमा पर साद भक्तों द्वारा साबला, बेणेश्वरधाम व शेषपुर झल्लारा उदयपुर में रासलीला आयोजित की जाती है। रासलीला का उद्देश्य स्थानीय क्षेत्र, प्रदेश, देश के साथ विश्व स्तर तक धर्म का प्रसार प्रचार करने से है। महंत अच्युतानंद महाराज के सानिध्य में साबला हरिमंदिर में गुरु पुर्णिमा, ***** पूर्णिमा, बेणेश्वरधाम हरिमंदिर में कार्तिक, वैशाख व माघ पूर्णिमा के साथ शेषपुर झल्लारा उदयपुर में शरद पूर्णिमा को साद समाज के भक्तों द्वारा रासलीला की जाती है।
यह भी है मान्यता
नारायण साद ने बताया कि रासलीला के साथ आस्था और श्रद्धा जुड़ी हुई है। मान्यता है कि जिस भक्त की संतान नहीं है वह साबला हरिमंदिर पहुंचकर संत मावजी महाराज की गादी पर पुष्प चढ़ाकर संतान प्राप्ति की मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद भक्त हरिमंदिर पहुंचकर गादी पर दीपक प्रज्जलित कर निमत्रंण देते हैं। उसके आधार पर साद समाज के भक्तजन भक्त के घर पर रासलीला का पाठ पूरा करते हैं। ऐसे ही साल में छह से अधिक रासलीलाएं भक्तों के घर आयोजित होती हैं। गत रात्रि को माघ पूर्णिमा पर बेणेश्वरधाम पर महंत अच्युतानंद महाराज के सानिध्य में रासलीला के साथ संत मावजी महाराज के भजन कीर्तन व सत्संग हुए।
आस्था का संगम
इधर, बेणेश्वरधाम पर मुख्य मेले के दूसरे दिन साबला सोमपुल पर श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। साथ ही सरकार द्वारा छूट मिलने के बाद दुकानदारों व व्यापारियों ने दुकानें तो लगा दी, लेकिन मेलार्थियों की रेलमपेल अपेक्षाकृत कम होती नजर आ रही। ऐसे में माल की खपत भी कम हो रही है। मंदिरों में दर्शनार्थियों की कतारें लग रही हैं। घाटों पर अस्थि विसर्जन सहित धार्मिक अनुष्ठान जारी हैं।
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