scriptBiggest embezzlement of education department exposed in Dungarpur | चार माह पहले ही स्कूल में आया बाबू, प्रधानाचार्य को विश्वास में लेकर किया ढाई करोड़ का गबन | Patrika News

चार माह पहले ही स्कूल में आया बाबू, प्रधानाचार्य को विश्वास में लेकर किया ढाई करोड़ का गबन

एक अप्रैल से बदले वित्त प्रावधानों की आड़ मेे राजकोष में गड़बड़झाला, प्रधानाचार्य के डिजिटल साइन का दुरुपयोग
बाबू निलम्बित, विभागीय जांच
कोष कार्यालय ने भी शुरू की विभागीय संलिप्तता के संदेह पर जांच

डूंगरपुर

Updated: June 25, 2022 10:44:51 am

डूंगरपुर. जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चीतरी के वरिष्ठ लिपिक की ओर से प्रधानाचार्य को विश्वास में लेकर चंद दिनों में ही ढाई करोड़ रुपए से अधिक की राशि डकार लेने का मामला सामने आया है। इस मामले ने शिक्षा विभाग एवं कोष कार्यालय के अधिकारियों की नींदें उड़ा दी है। शुक्रवार को दिन भर जिला कोष कार्यालय की टीम ने सागवाड़ा उपकोष कार्यालय में डेरा जमा कर बाबू के स्कूल में ज्वाइन करने से लेकर अब तक हुए सभी लेन-देन की पड़ताल शुरू कर दी है। फिलहाल स्कूल की पे-मैनेजर लॉगिन आईडी लॉक कर दी है। वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग ने जहां विभागीय जांच कमेटी गठित करते हुए वरिष्ठ लिपिक हेमंत पाटीदार को प्रथम दृष्ट्या दोषी मानते हुए निलम्बित कर दिया है। वहीं, कोष कार्यालय ने भी विभागीय कार्मिक की संतलिप्तता के संदेह पर अलग से जांच शुरू की है। उधर, राउमावि चीतरी के प्रधानाचार्य प्रवीणकुमार भट्ट ने लिपिक हेमन्त के खिलाफ चीतरी थाने में धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कराया है।
इस तरह की गड़बड़ी
राउमावि चीतरी के प्रधानाचार्य दिवड़ा छोटा निवासी प्रवीण कुमार पुत्र प्रेमशंकर भट्ट ने शुक्रवार सुबह चीतरी थाने में रिपोर्ट दी। इसमें बताया कि प्रार्थी ने 31 मई 2022 को ही पूर्व प्रधानाचार्य लक्ष्मीकान्त चौबीसा के पदोन्नत होने पर राउमावि चितरी के प्रधानाचार्य का चार्ज लिया है। विद्यालय स्टाफ का अप्रेल २०२२ का वेतन बकाया होने से प्रार्थी ने तीन जून को आहरण वितरण अधिकार के लिए प्रस्ताव बनाकर सीबीईओ कार्यालय गलियाकोट में प्रस्तुत किया। स्वीकृति मिलने के बाद 13 जून 2022 को विद्यालय के वरिष्ठ सहायक घाटा का गांव निवासी हेमन्त पुत्र कान्तिलाल पाटीदार ने जिद करते हुए अपने किसी परिचित से प्रार्थी के डिजिटल हस्ताक्षर बनवाकर पे मेनेजर का पासवर्ड दिया। अगले दिन 14 जून को प्रधानाचार्य ने डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र (डी.एस.सी.) की मांग की तो पाटीदार ने व्यस्त होना बताकर बाद में देना कह दिया तथा डी.एस.सी. का डोंगल अपने पास ही रख लिया। १५ जून को प्रार्थी ने लॉन-इन करने का प्रयास किया तो नहीं हुआ। पूछने पर हेमन्त ने बताया कि उसने पासवर्ड बदल दिया है। बार-बार मांगने पर भी डोंगल नहीं देने पर 16 जून को प्रधानाचार्य ने हेमन्त को लिखित नोटिस भी दिया। इस पर उसने फिर बहाना बना दिया।
कोष कार्यालय से फोन आने पर लगी भनक
रिपोर्ट प्रधानाचार्य भट्ट ने बताया कि 23 जून २०२२ की शाम को कोषाधिकारी डूंगरपुर से फोन आया। उन्होंने अवगत कराया कि विद्यालय के बजट से बड़ी रकम किसी एक खाते में हस्तांतरित हुई है तो ऐसे कौन से बिल बने हैं जिनका भुगतान किया गया है? इसी बीच सागवाडा उपकोष कार्यालय सागवाडा से भी फोन आया। इसमें बताया कि विद्यालय के बजट से २३ जून को 1,62,00,000 (एक करोड बासठ लाख रुपए) हेमन्त पाटीदार के खाते में हस्तांतरित हुआ है। हालांकि विभागीय पड़ताल में यह रकम ढाई करोड़ से भी अधिक पाई गई।
फर्जी हस्ताक्षर से भेजे दस्तावेज
रिपोर्ट में बताया कि हेमन्त ने उपकोष कार्यालय में बड़ी राशि के बिल को भुगतान प्रस्तुत किया। इस पर ऑब्जेक्शन लगा। ऑब्जेक्शन हटाने के लिए प्रधानाचार्य के हस्ताक्षरयुक्त जीए-55 व अन्तरतालिका (एरियर बिल) उपकोषागार कार्यालय में भेजने पड़ते हैं। उपकोषागार कार्यालय में देखा तो जीए -55 व अन्तरतालिका पर प्रधानाचार्य के फर्जी हस्ताक्षर किए हुए थे। प्रधानाचार्य के पास कभी कोई ओटीपी तक नहीं आया, क्योंकि लिपिक ने प्रधानाचार्य का मोबाइल नंबर इस्तेमाल
ही नहीं किया।
दिनभर चली छानबीन
शुक्रवार सुबह ही कोषाधिकारी जितेंद्र मीणा उप कोष कार्यालय सागवाड़ा पहुंचे। विद्यालय के अकाउंट की पूरी डिटेल निकलवाई। इसमें सामने आया कि ३० मई से अब तक उक्त कार्मिक ढाई करोड़ रुपए से अधिक राशि का हस्तांतरण कर चुका है। अन्य रिकार्ड खंगाले पर यह राशि बढऩे की भी संभावना जताई
जा रही है।
कोष कार्मिकों की भूमिका पर भी संदेह
इस पूरे प्रकरण में उपकोष कार्यालय सागवाड़ा के कार्मिकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। इतनी बड़ी राशि बिना किसी क्रॉस टेली के किसी व्यक्तिगत खाते में हस्तांतरित कैसे हो गई? वह भी संबंधित प्रधानाचार्य की जानकारी के बिना यह समझ से परे है।
प्रावधान बदले, तो नीयत डोली
चार माह पहले ही स्कूल में आया बाबू, प्रधानाचार्य को विश्वास में लेकर किया ढाई करोड़ का गबन
राउमावि चीतरी में 08 फरवरी को ज्वाइन करता बाबू। फाइल फोटो
vinay sompura,
सरकारी महकमे अक्सर बजट के टोटे से दो-दो हाथ करते हैं। लेकिन, प्रदेश सरकार ने एक अप्रेल 2022 से ही वित्त प्रावधान बदल दिए। पूर्व में संबंधित कार्य एवं मदवार बजट आवंटित होता था। ऐसे में उतनी ही राशि की डिमाण्ड पे-मैनेजर कर पाते थे। लेकिन, एक अप्रेल 2022 से सरकार ने प्रावधान बदल दिए। इससे पे-मैनेजर अपनी लॉगिन आईडी से बिल, वेतन आदि मद में क्लेम कर सीधे भुगतान उठा सकते हैं। हालांकि, इसमें संबंधित कोष कार्यालय से संबंधित भुगतान का क्लेम आने पर स्वीकृत होने पर ही संबंधित बैंक खाते में भुगतान होता है। प्रावधान बदलते ही यह बड़ा मामला सामने आया है।
फरवरी में ही किया था ज्वाइन
वरिष्ठ लिपिक हेमंत मृत राज्य अनुकमात्मक नियुक्ति से शिक्षा विभाग में आया था। पिता स्व. सुखलाल पाटीदार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। उनकी मृत्यु उपरांत लिपिक के पद पर नियुक्ति मिली थी। गत आठ फरवरी 2022 को ही उसकी वरिष्ठ लिपिक में पदोन्नति होने पर राउमावि चीतरी में कार्यभार ग्रहण किया था। चार माह बाद ही यह प्रकरण उजागर हुआ।
अधिकांश स्कूलों में यहीं हाल...
बाबू पर विश्वास कोई नई बात नहीं है। अधिकांश विद्यालयों एवं सरकारी दफ्तरों में कोष संबंधित कार्य की सम्पूर्ण जिम्मेदारी विभाग प्रमुखों ने बाबूओं के जिम्मे ही थोप रखी है। विद्यालयों में केशियर की पोस्ट नहीं होने व तकनीकी जानकारी के अभाव में ऐसे प्रकरण भविष्य में ही हो सकते हैं।
सबसे बड़ा मामला
शिक्षा विभाग में गबन से जुड़ा यह अब तक का सबसे बड़ा मामला सामने आ रहा है। इससे पूर्व सर्व शिक्षा अभियान के अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक कार्यालय में भी एक करोड़ से अधिक का गबन सामने आया था। उस मामले में संविदाकर्मी के विषाक्त सेवन करने के बाद परत-दर-परत खुली और बड़ी लापरवाही सामने आई थी। उस मामले की जांच अब भी फाइलों से बाहर नहीं आ पाई है।
कोषाधिकारी का कहना
&चीतरी विद्यालय के खाते से पिछले २२ दिनों में दो करोड़ ६५ लाख रुपए का हस्तांतरण सामने आ चुका है और भी छानबीन की जा रही है। इसके पश्चात पूरी रिपोर्ट निदेशक कोष एवं वित्त को प्रेषित की जाएगी। इस मामले में उप कोष कार्यालय के किसी कार्मिक की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। इस संबंध में भी जांच कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजेंगे।- जितेंद्र मीणा, कोषाधिकारी, डूंगरपुर
डीईओ ने कहा...
&राउमावि चीतरी के बिलों की जांच में प्रथम दृष्ट्या विद्यालय द्वारा अवैध रुप से राजकोष से लगभग ढाई करोड़ रुपए की राशि को विद्यालय के वरिष्ठ सहायक हेमंत पाटीदार के खाते में हस्तांतरण कर राशि का दुरुपयोग किया जाने सामने आने पर निलम्बित कर दिया है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय जांच भी गठित की है। अमृतलाल कलाल, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक

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