बस मौत का इंतजार और हो गया बीमा

sidharth shah

Publish: Jun, 14 2018 05:48:01 PM (IST)

Dungarpur, Rajasthan, India
बस मौत का इंतजार और हो गया बीमा

गंभीर बीमार पर भी खूब लगाया दाव
बीमा के नाम पर धोखाधड़ी का खेल

डूंगरपुर. पिछले दिनों मौत के बाद जिंदा बताकर बीमा करने और दोबारा मृत घोषित कर बीमा राशि उठाने के खेल का पर्दाफाश होने के बाद की गई पड़ताल में कई चौंकाने वाले और मामले सामने आए है। वागड़ के दोनों जिलों में इसका सक्रिय गिरोह है और वे पिछले कई सालों से कई लोगों को जोडक़र लाखों-करोड़ों की धोखाधड़ी कर रहे हैं। मामले की तह में गए तो पता चला कि इस गिरोह के सदस्य गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों पर भी अपना दाव खेल रहे हैं। शहर में निजी बीमा कंपनी के क्लेम के दावों की पड़ताल कि तो पता चला कि आधे से ज्यादा क्लेम ऐसे हैं, जिनकी सिर्फ एक या दो किश्त ही जमा हुई है।


हॉस्पीटल में निगरानी
इस गिरोह ने कई दलाल बना रखे हैं। वे छोटे-बड़े सभी सरकारी चिकित्सालयों की भी निगरानी रखते है। यहां से यह लोग कम उम्र में गंभीर बीमारी वाले लोगों को चिन्हित करते हैं। गरीब परिवार का बीमार होने पर उसे बीमा कराने और मौत के बाद एक-दो लाख दिलाने का झांसा देकर फांसते हैं। कम उम्र का होने पर मेडिकल जांच की औपचारिकताएं ही होती हैं और यहां भी सांठ-गांठ से जांच रिपोर्ट बनवा ली जाती है।
चेकबुक और एटीएम कब्जे में
बीमा कराने से पहले बैंक खाता खुलवाया जाता है। यह तथाकथित दलाल ही बैंक खाता खुलवाते हैं। एटीएम और चेकबुक पर नोमिनी के हस्ताक्षर कराकर अपने कब्जे में ले लेते हैं। बीमा की किश्त से लेकर सभी खर्च दलाल ही करते हैं।

पुलिस जांच में खुल सकता हैं मामला
बीमे के नाम पर धोखाधड़ी का एक मामला सदर थाना में दर्ज हो चुका है। एक मामले की रिपोर्ट सागवाड़ा थाने में एक माह पूर्व दी गई है। पर, अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। नोमिनी से पूछताछ और जांच को कड़ी दर कड़ी आगे बढ़ाया जाए तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।

डूंगरपुर. राजस्थान पत्रिका में बीमा के नाम धोखाधड़ी और मृत को जीवित बताकर बीमा करने के साथ ही क्लेम उठाने के मामले में प्रमाणिकता की मोहर लग गई। गुरुवार शाम को सागवाड़ा थाने में एक साथ दो मामले दर्ज हुए है। इससे पूर्व एक मामला सदर थाने में दर्ज हो चुका है। बजाज अलाइंस कंपनी के वरिष्ठ प्रबन्धक रूपसिंह चौहान ने अहमद न्यालगर और बीमा कंपनी के एजेन्ट मुकेश पण्ड्या व अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। इसमें बताया कि हबीब न्यारगर की पोलिसी बीमा सलाहकार मुकेश की ओर से जारी हुई। इसमें पुत्र अहमद को नोमिनी बनाया। अहमद ने ६ फरवरी २०१७ को कम्पनी में सूचना दी कि उसके पिता की १० सितम्बर २०१६ को मृत्यु हो गई है इस कारण मृत्यु दावा दर्ज कर बीमा धन दिया जाए। पॉलिसी हॉल्डर की मृत्यु १३५ दिन में हो जाने से प्रक्रिया के तहत जांच की। इसमें पता चला कि हमीद न् की वास्तव में २७ दिसम्बर, २०१५ को ही मृत्यु हो गई थी। एक अन्य मामला वमासा निवासी शोभा गामोट, नवल प्रजापति एवं अन्य के खिलाफ दर्ज कराया। इसमें बताया कि शोभा के पति निलेश की पॉलिसी जारी करवाई। पॉलिसी के सत्यापन के दौरान पता चला कि निलेश की २८ सितम्बर, २०१६ को मृत्यु हो गई थी। प्रपोजल भरते समय निलेश जीवित नहीं था व उसकी पूर्व में मृत्यु हो गई थी। इसकी जांच एसआई परसराम को सौंपी है।

कार्रवाई तो शुरू हो
यह धोखाधड़ी का बड़ा मामला है। बीमे के नाम पर कई तरह के घोटाले हो रहे है। कई कंपनियों को लाखों-करोड़ों का नुकसान हो रहा है। हमने एक मामला कोर्ट के जरिए पुलिस में दर्ज कराया है। सागवाड़ा थाने में गुरुवार को दो मामले दर्ज हुए है। जांच के बाद कई और खुलासे होंगे।
प्रवीण शुक्ला, बीमा कंपनी के अधिवक्ता

यूं चलता है खेल
एक निजी बीमा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इनकी कंपनी में ही बहुत सारे प्रकरण एक-दो किश्त जमा करा पर क्लेम प्रस्तुत करने के सामने आए हैं। वागड़ के दोनों जिलों में इसके आंकड़ों को देखा जाए तो यहां पिछले पांच बरस में दो सौ से ज्यादा मामले इस तरह के हैं। इसके जरिए करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की गई है।

कोर्ट की शरण में
बीमा कराने के तीन साल भीतर मौत होने पर जांच के प्रावधान हैं। जांच में बीमारी छिपाने का मामला सामने आता है तो कंपनी बीमा निरस्त कर देती है। ऐसे में उपभोक्ता कोर्ट की शरण ली जाती है। उपभोक्ता कोर्ट में अधिकांश मामले एक दो किश्त जमा होने के बाद ही मौत होने के आ रहे हैं।

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