बच्चो के खाने में काली दाल

बच्चो के खाने में काली दाल

By: Harmesh Tailor

Published: 19 Jan 2019, 03:54 PM IST

Dungarpur, Dungarpur, Rajasthan, India

मिलन शर्मा
डूंगरपुर.
बच्चों की सम्पूर्ण पोषण के लिए सरकारी स्कूलों में प्रतिदिन पोषाहार खिलाया जा रहा है। पर, यहीं पोषाहार जानलेवा भी साबित हो सकता है। गत सरकार ने नवाचार करते हुए पहली बार स्कूलों के लिए उड़द दाल भेजी। लेकिन, इस दाल ने अपना काला सच दिखा दिया है। दाल को केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला जयपुर ने मानव उपभोग के लिए असुरक्षित और अयोग्य करार दे दिया है। ताजुब्ब की बात यह है कि पूरे प्रदेश में अकेला डूंगरपुर ऐसा जिला रहा, जहां दाल के ट्रक को वापस भेज दिया है। जबकि, अन्य जिलों में यह दाल आपूर्त भी कर दी गई और स्कूलों तक भी पहुंच चुकी है।
हाथ लगते ही छूटा रंग
डूंगरपुर सहित पूरे प्रदेश में नवम्बर 2018 में पहली बार स्कूलों के लिए छिलका युक्त उड़द की दाल के ट्रक भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ से पहुंचे। डूंगरपुर डीईओ गिरिजा वैष्णव ने ट्रक में से कुछ दालों के कट्टे उतरवा कर दाल की जांच की। अलग-अलग कट्टों में हाथ डालने पर पाया कि हाथ काले हो रहे हैं। इस पर तत्कालीन जिला कलक्टर राजेन्द्र भट्ट को सूचित किया। भट्ट ने मामला बच्चों से जुड़ा होने से तत्काल रसद, तहसीलदार, खाद्य निरीक्षक एवं डीईओ की टीम गठित कर दाल की जांच करवाई। इससे सभी ने पाया कि दाल काला रंग छोड़ रही है।
जांच के लिए जयपुर भेजी
मामला गंभीर होने पर डीईओ वैष्णव ने दाल के दो सेम्पल सिल चस्पा करवा कर केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला जयपुर भेजे। यहां मुख्य खाद्य विश्लेषक पंकज कुमार ने जांच के बाद रिपोर्ट दी। इसमें स्पष्ट लिखा कि दालों से निकलने वाला काला रंग खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2006 के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मानव उपभोग के लिए असुरक्षित और अयोग्य हैं।
डूंगरपुर ने ही भेजे ट्रक
केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला जयपुर की रिपोर्ट आने के साथ ही डूंगरपुर डीईओ वैष्णव ने ट्रकों में डूंगरपुर के लिए आई २१.०७ मेट्रिक टन दाल वापस भेज नईदाल भेजने के निर्देश दिए।
महिला डीईओ से खुली कलई
सरकार की ओर से आपूर्ति की गई दाल देखने में बिल्कुल साफ थी। प्राय: देख कर कोईभी इसे अस्वीकार नहीं करे। पर, महिला डीईओ ने उस समय कुशल गृहिणी का परिचय दिया। दाल को हाथ लगाते ही वह भांप गई कि किसी भी दाल का प्राकृतिक रंग कभी नहीं छूटता। दाल को पानी में भिगोया और दाल ने अपनी सच्चाई बताई।
डीइओ ने कहा..
.दाल की आपूर्ति होते ही जांच की।इसमें गड़बड़ी नजर आने पर सेम्पल जयपुर भेजे थे। वहां से मिली रिपोर्ट के आधार पर दाल वापस भेज नईमंगवाई। वह दाल खाने योग्य नहीं थी।
- गिरिजा वैष्णव, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक

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