मौत की पुलियाएं: रेलिंग तो दूर सुरक्षा संकेतक तक नहीं

मौत की पुलियाएं: रेलिंग तो दूर सुरक्षा संकेतक तक नहीं
रात में ही नहीं दिन में भी लगता है डर
- रोड़ इंजीनियरिंग के नाम पर महज खानापूर्ति
- अब तक कई लोग हो चुके हैं हादसों का शिकार
डूंगरपुर.
सड़क हादसे रोज किसी ने किसी घर का चिराग बुझा रहे हैं। हादसों के पीछे रतार जहां मुय वजह है, वहीं सड़कों पर रोड इंजीनियरिंग का अभाव भी इसका प्रमुख कारण है। जिले में ऐसे कई पुल या पुलियाएं हैं, जिन पर न तो रेलिंग है और न ही सुरक्षा दीवार। विकट मोड होने के बावजूद संकेतक तक नहीं है। ऐसे में आए दिन हादसे हो रहे हैं।

By: Harmesh Tailor

Published: 03 Jan 2019, 04:52 PM IST

मौत की पुलियाएं: रेलिंग तो दूर सुरक्षा संकेतक तक नहीं
रात में ही नहीं दिन में भी लगता है डर
- रोड़ इंजीनियरिंग के नाम पर महज खानापूर्ति
- अब तक कई लोग हो चुके हैं हादसों का शिकार
डूंगरपुर.
सड़क हादसे रोज किसी ने किसी घर का चिराग बुझा रहे हैं। हादसों के पीछे रतार जहां मुय वजह है, वहीं सड़कों पर रोड इंजीनियरिंग का अभाव भी इसका प्रमुख कारण है। जिले में ऐसे कई पुल या पुलियाएं हैं, जिन पर न तो रेलिंग है और न ही सुरक्षा दीवार। विकट मोड होने के बावजूद संकेतक तक नहीं है। ऐसे में आए दिन हादसे हो रहे हैं।
यह हैं डेंजर जोन
ओड़ा पुलिया: डूंगरपुर-बिछीवाड़ा मार्ग पर ओड़ाबड़ा के समीप गांगड़ी नदी पर पुलिया बनी हुई है। इस पुलिया से ठीक पहले विकट मोड और ढलान है। पुलिया से नदी की गहराई तकरीब १२ से १५ फीट है। सामने से वाहन आ जाने पर अक्सर वाहनधारी अनियंत्रित हो जाते हैं। इस पुलिया से कई बार हादसे हो चुके हैं। हाल ही १५ दिन पहले अहमदाबाद से लौट रहे पिता-पुत्र की कार नदी में जा गिरी थी। इसमें पिता की मृत्यु हो गई थी।
भेड़माता पुलिया: सागवाड़ा मार्गपर डोजा पाल से पहले भेड़माता मंदिर के समीप मोरन नदी पर पुलिया है। इसकी रेलिंग नहीं है। वहीं सपोर्टिंग पिल्लर भी टूट चुके हैं। यहां भी विकट मोड और ढलान है। ऐसे में अक्सर यहां हादसे होते रहते हैं।
घुघरा पुलिया: घुघरा गांव में बांध के समीप बनी पुलिया पर भी रेलिंग नहीं है। सड़क भी घुमावदार है। ऐसे में यहां भी हादसों का डर बना रहता है। नदी की गहराई भी १५ फीट से अधिक है।
वात्रक पुलिया: सीमलवाड़ा मार्ग पर करावाड़ा के समीप वात्रक नदी पर बनी पुलिया हादसों का पर्याय रही है। सुरक्षा दीवार या संकेतक के अभाव में आए दिन वाहन दुर्घटनाग्रस्त होते हैं।
दो नदी पुल: उदयपुर मार्ग पर रेलवे स्टेशन के समीप दो नदी पर बना पुल भी डेंजर जोन है। यहां पुल पर रेलिंग तो बनी हुई है, लेकिन एप्रोच सड़क के समीप दोनों ओर बड़ा भाग खुला हुआ है। कुछ समय पूर्व यहां से वाहन नदी में गिर चुका है। खतरनाक मोड होने के साथही नदी की गहराई भी बहुत अधिक है।
माही पुल वगेरी:माही नदी पर वगेरी के निकट डूंगरपुर व बांसवाड़ा जिले को जोडऩे वाला सेतू जर्जर हो रहा है। पुल की लबे अरसे से मरमत नहीं हुई है। सतह सहित रेलिंग कई जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
हर गांव में हैं ऐसे डेथ ट्रेक
जिले की सभी मुय सड़कों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की हर सड़क पर इस तरह के डेथ टे्रक हैं। बरसाती नालों पर बनी रपट और पुलिया पर सुरक्षा बंदोबस्त नहीं के बराबर हैं। कई जगह तो सपोर्टिंग वॉल बनी हुई हैं, लेकिन कई स्थान ऐसे भी हैं, जहां सड़क कहां खत्म हो रही है और नाला या खाई कहां शुरू इसका आभास अंतिम समय तक वाहनचालकों को नहीं हो पाता है। सागवाड़ा मार्ग पर कई जगह ऐसी हैं जहां डामर सड़क के बाद पटरी तक नहीं और सीधे नाला है। ऐसे में वाहनधारी गफलत में पड़ कर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। रात्रि में तो और ज्यादा समस्या आती है।
रोड इंजीनियरिंग नहीं
आए दिन होने वाले हादसों के बावजूद प्रशासन और पुलिस महकमा रोड इंजीनियरिंग पर ध्यान नहीं दे रहा। बिना रेलिंग की पुलियों पर रेलिंग लगवाने, संकेतक लगाने, विकट मोड को दुरुस्त करने, टूटी फुटी रेलिंग की मरमत कराने जैसे काम नहीं होते हैं। इसका खामियाजा वाहनचालकों को जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

Harmesh Tailor Photographer
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