भक्तों को रास आने लगी ई-भुगतान से भेंट

भक्तों को रास आने लगी ई-भुगतान से भेंट
मंदिरों में जाए बिना ही दिल खोलकर करें दान, शुरू हुई ये सुविधा

Devendra Singh | Publish: Oct, 12 2019 05:30:33 PM (IST) | Updated: Oct, 12 2019 05:30:34 PM (IST) Dungarpur, Dungarpur, Rajasthan, India

devsthan vibhag udaipur : मनोकामना के लिए अपने आराध्य समुख जाकर चरणों में भेंट चढ़ाना अब बीते जमाने की बात हो गई है। अब भक्त भगवान के चरणों या दानपेटी में नहीं सीधे भगवान के खाते में भेंट जमा करवा रहे हैं। सदियों से भगवान व भक्तों के बीच भेंट चढ़ाने की इस परंपरा ने अब समय के साथ नया रूप ले लिया है।

देवेन्द्र सिंह / डूंगरपुर. मनोकामना के लिए अपने आराध्य समुख जाकर चरणों में भेंट चढ़ाना अब बीते जमाने की बात हो गई है। अब भक्त भगवान के चरणों या दानपेटी में नहीं सीधे भगवान के खाते में भेंट जमा करवा रहे हैं। सदियों से भगवान व भक्तों के बीच भेंट चढ़ाने की इस परंपरा ने अब समय के साथ नया रूप ले लिया है। पहले जहां भक्त को अपने भगवान के चरणों में भेंट चढ़ाने के लिए कोसों की दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन देवस्थान विभाग ( devsthan vibhag udaipur ) ने गत वर्ष ई भुगतान ( E payment ) से भेंट चढ़ाने की सुविधा शुरू कर भगवान व भक्त की दूरी को खत्म कर दिया है। अब भक्त जब चाहे तब चंद मिनटों में चाहे जितनी राशि भेंट चढ़ा सकता है। एक साल पहले शुरू की गई योजना अब भक्तों को रास आने लगी है। एक साल में 361 भक्तों ने ई भुगतान से भेंट अर्पित की है। सूची में डूंगरपुर के बेणेश्वर धाम (beneshwar dham ) व बांसवाड़ा की त्रिपुरा सुंदरी सहित राजस्थान के 24 प्रमुख मंदिर-तीर्थ स्थलों के अलावा 34 देवी-देवताओं ( Gods and Goddesses ) को शामिल किया है।

12 है दान करने के प्रयोजन
दान करने के लिए 12 प्रयोजन का विकल्प भी दिया गया है। इसमें आरती, भोगराग-शृंगार, विकास-निर्माण, वृक्षारोपण, पक्षियों के लिए दाना, गायों के लिए चारा, गऱीबों के लिए भोजन वस्त्र, चिकित्सा सहायता, प्राणियों के लिए सेवा, आजीविका-पुनर्वास, मानव सेवा, विविध में से किसी एक को चुना जा सकता है।

यह प्रमुख मंदिर हैं शामिल
ई-भुगतान दान ( E-payment donation ) के लिए अभी तक राजस्थान के 24 प्रमुख मंदिर और तीर्थ स्थलों को शामिल किया गया है। इनमें भरतपुर के श्री बिहारीजी, बीकानेर के लक्ष्मीनारायणजी, बूंदी के श्री केशवरायजी, हनुमानगढ़ के श्री गोगाजी, झालावाड़ के श्री पद्मनाथजी, राजसमंद के श्री गढ़बोर चारभुजाजी, टोंक के डिग्गी कल्याण जी, दौसा के श्री मेहंदीपुर बालाजी, जैसलमेर के रामदेवरा, चूरू के सालासर बालाजी, अजमेर के पुष्करजी, चित्तौडगढ़़ के सांवलिया जी, बांसवाड़ा की त्रिपुरा सुंदरी, सीकर के खाटू श्यामजी, उदयपुर के एकलिंग जी, सवाईमाधोपुर के चौथ माता, चौथ का बरवाड़ा, डूंगरपुर के बेणेश्वरधाम, जयपुर के श्री मदनमोहन जी, खोले के हनुमानजी विविध मंदिर में ऑनलाइन दान चढ़ा सकते हैं।

भेंट पाने में मेहंदीपुर बाला जी अव्वल
ई भुगतान से भेंट पाने में अभी तक मेहंदीपुर बालाजी सबसे अव्वल है। इस महीने 34 में से 16भक्तों ने बालाजी को भेंट चढ़ाई है। यहां ई भुगतान से भक्त एक से लेकर 22 हजार रुपए तक की राशि स्वास्थ्य, तन-मन-धन का संवर्धन, मनोकामना पूर्ति, ग्रह शांति, विविध के लिए भेंट चढ़ा रहे है। इसके साथ ही सालासर बालाजी, खोले के हनुमानजी, खाटु श्याम बाबा, त्रिपुरा सुंदरी, बेणेश्वरधाम, करणी माता, सांवलिया सेठ को भी भक्त ई भुगतान से भेंट चढ़ा रहे हैं। वहीं दान पेटी में पुण्यार्थ व मानव सेवा के लिए मेड़ता सिटी, नागौर के एक दानदाता ने एक लाख रुपए व जोधपुर के एक दान दाता ने एकलिंग जी की दानपेटी ( donation box ) में एक लाख रुपए भेंट किए । इससे भी बढ़कर अलवर के एक भक्त ने बिहारीजी के मंदिर में दो लाख रुपए भेंट किए हैं।

34 देवी देवता
मंदिरों के अलावा वेबसाइट पर भेंट के लिए 34 देवी—देवताओं के नाम सुझाए गए हैं। इसमें विष्णुजी, शिवजी, ब्रह्माजी, रामजी, कृष्णजी, हनुमानजी, गणेशजी, दुर्गा माता, शीतला माता, सरस्वती माता, लक्ष्मी माता, लक्ष्मण, भैरव, लोकदेवता, गंगा विविध नाम शामिल हैं।


भेंट सीधे भगवान के खाते में
ई भुगतान प्रणाली में मंदिर ट्रस्ट इस भेंट राशि को अपनी मर्जी से खर्च ना कर भक्त के दान करते समय दर्ज किए गए प्रयोजन में ही खर्च करनी होती है। भेंट राशि भगवान का प्रयोजन भोग, गायों के चारा, पक्षियों के लिए दाना, गरीबों के भोजन, वस्त्र से लेकर पुनर्वास तक के लिए भक्त ऑनलाइन मंदिरों में भेंट कर रहे हैं। विभाग की वेबसाइट पर जाकर भक्त सूची में शामिल किसी भी मंदिर में ऑनलाइन दान कर सकते हैं। वेबसाइट पर दान का विकल्प है। इसमें खास बात यह है कि इसमें दान दाता को दान का उद्देश्य और प्रयोजन भी पूछा जाता है।


दान के उद्देश्य में हैं 17 विकल्प
वेबसाइट पर दान के उद्देश्य के कॉलम में 17 प्रयोजनों का उल्लेख किया गया है। इनमें तन-मन-धन का संवर्धन, स्वास्थ्य, सफलता, समृद्धि, प्रसिद्धि, प्रीति, मुक्ति, संतति , ग्रहशांति, सौहार्द, गुण अर्जन, सुरक्षा, विकास, पूर्वज-परिजन स्मृति, मांगलिक उत्सव, मनोकामना पूर्ति, विविध में से किसी एक को चुन सकते हैं।

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