मिट्टी खोद कर ढूंढ रहे भूख का हल

डूंगरपुर. वैश्विक महामारी कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन में हजारों प्रवासी लोग घरों को लौटे हैं। अब ये लोग आर्थिक तंगी के हालातों से जुझ रहे हैं। कुछ लोग मनरेगा के जरिए आजीविका अर्जित कर रहे हैं तो कुछ लोगों ने भूख का हल अपने स्तर पर ही ढूंढ लिया है। ऐसा ही एक परिवार बिछीवाड़ा पंचातय समिति के तलैया गांव में है। यह परिवार पूरे दिन तालाब पेटे की मिट्टी खोद कर कमल की जड़े एकत्र करता है और उसे सब्जी के तौर पर बाजार में बेचकर खुद की रोटी का जुगाड़ कर रहा है।

By: Harmesh Tailor

Updated: 24 Jun 2020, 06:26 PM IST

मिट्टी खोद कर ढूंढ रहे भूख का हल
- लॉकडाउन में घर लौटा प्रवासी, परिवार के साथ कमल जड़ें एकत्र कर चला रहा रोजी रोटी
डूंगरपुर. वैश्विक महामारी कोविड-19के संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन में हजारों प्रवासी लोग घरों को लौटे हैं। अब ये लोग आर्थिक तंगी के हालातों से जुझ रहे हैं। कुछ लोग मनरेगा के जरिए आजीविका अर्जित कर रहे हैं तो कुछ लोगों ने भूख का हल अपने स्तर पर ही ढूंढ लिया है। ऐसा ही एक परिवार बिछीवाड़ा पंचातय समिति के तलैया गांव में है। यह परिवार पूरे दिन तालाब पेटे की मिट्टी खोद कर कमल की जड़े एकत्र करता है और उसे सब्जी के तौर पर बाजार में बेचकर खुद की रोटी का जुगाड़ कर रहा है।
तलैया निवासी लक्ष्मण पुत्र भेमा भगोरा और उसकी बेटी गुजरात में मजदूरी करते थे। लॉकडाउन के कारण दोनों घर लौट आए हैं। यहां आने के बाद आय का कोई जरिया नहीं रहा। इस पर पत्नी व बच्चों की मदद से गांव के सुखे जलाशय में फैल रहे कमल दल की जड़ें निकालने का काम शुरू किया। सुबह होते ही पूरा परिवार तालाब पर पहुंच जाता है। दिन भर गीली मिट्टी खोद कर कमल की जड़ें निकालता है। शाम को घर जाकर उसे धोते हैं। सात-आठ जड़ों की गठरियां बनाते हैं। दूसरे दिन सुबह परिवार का एक सदस्य उसे बाजार में सब्जी के रूप में बेचने जाता है। यह क्रम काफी दिनों से चल रहा है। मानसून की दस्तक के साथ खेत भी तैयार कर लिया है। बारिश होने पर परिवार खेती बाड़ी में जुट जाएगा। लक्ष्मण का कहना है कि बीमारी के हालात सामान्य होने पर वापस अहमदाबाद जाकर मजदूरी करेगा।

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