scriptDungarpur High level bridge to be built at Beneshwar Dham | बेणेश्वर धाम पर 132 करोड़ की लागत से बनेगा हाइलेवल पुल | Patrika News

बेणेश्वर धाम पर 132 करोड़ की लागत से बनेगा हाइलेवल पुल

कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी व राहुल गांधी करेंगे शिलान्यास
धाम को टापू बनने से बचाने की कवायद
1387 मीटर लंबा और 13 मीटर चौड़ा होगा पुल

डूंगरपुर

Published: May 04, 2022 11:05:41 am

डूंगरपुर/साबला. वागड़ प्रयाग बेणेश्वरधाम के बारिश के दिनों में टापू में तब्दील होने की समस्या के समाधान के लिए धाम पर 132 करोड़ की लागत से हाइलेवल पुल बनना प्रस्तावित है। इसके लिए राज्य सरकार ने वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है। पुल निर्माण को लेकर टेस्टिंग कार्य शुरू भी हो चुका है। आगामी 1६ मई को कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस पुल का शिलान्यास करेंगे।
बेणेश्वर धाम पर 132 करोड़ की लागत से बनेगा हाइलेवल पुल
बेणेश्वर धाम पर 132 करोड़ की लागत से बनेगा हाइलेवल पुल
फेक्ट फाइल
1387 मीटर होगी पुल की लंबाई
13 मीटर होगी चौड़ाई
36 पिल्लर पर बनेगा पुल
40 गुणा 40 मीटर का साबला-गनोड़ा तथा बेणेश्वर-भटवाड़ा मार्ग के बीच बनेगा सर्कल
बेणेश्वर-भटवाड़ा मार्ग पर पुल की लंबाई 87 मीटर तथा चौड़ाई 13 मीटर रहेगी।
हर साल बारिश में टापू बन जाता है धाम, फंस जाते हैं श्रद्धालु
बेणेश्वर धाम सोम और माही के संगम स्थल पर अवस्थित है। दोनों नदियां धाम को घेरे हुए हैं। इन पर तीन पुल बने हुए हैं, लेकिन सोम पुल को छोड़ कर शेष दोनों की ऊंचाई बहुत कम है। नदियों के उफान पर आने के दौरान पुल पर पानी आ जाता है और धाम टापू में तब्दील हो जाता है। बांसवाड़ा स्थित माहीडेम तथा आसपुर स्थित सोमकामला आम्बा बांध के गेट खोलने के दौरान भी धाम टापू बना रहता है। इससे धाम पर स्थित मंदिरों के पुजारी, व्यापारी तथा कई बार श्रद्धालु भी फस जाते हैं। बहुत बार तो कई-कई दिनों तक पुलों से पानी नहीं उतरता। ऐसे में लोग धाम पर अटके रहते हैं। हाइलेवल ब्रिज निर्माण से इस समसया से निजात मिलेगी। वहीं बांसवाड़ा-उदयपुर स्टेट हाइवे के लिए नई कनेक्टिविटी भी बनेगी।
पत्रिका व्यू: धाम का नैसर्गिंक सौंदर्य बना रहे, नदी तटों की कटाई रूके
बेणेश्वर धाम का महत्व प्राकृतिक बसावट से है। धाम स्थल पर किसी भी तरह के निर्माण कार्य में उसकी नैसर्गिंक सुंदरता को अक्षुण्य बनाए रखना पहले प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा नदियों के उफान से लगातार हो रही तटों की कटाई रोकने के लिए भी उपाय जरूरी हैं। इसके लिए पक्के घाट का निर्माण होना चाहिए। तभी, धाम के आध्यात्मिक व नैसर्गिंक महत्व को बनाए रखा जा सकेगा।

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