पहले ड्यूटी, फिर इबादत

डूंगरपुर. कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर लागू लॉकडाउन में सैकड़ों कर्मचारी १२ घण्टे से अधिक ड्यूटी कर रहे हैं। मुस्लिम समुदाय का पवित्र रमजान माह चल रहा है। कई मुस्लिम धर्मावलंबी कर्मचारी भीषण गर्मी में रोजे रखकर बवा (महामारी) के इस दौर में मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे हैं। माहे रजमान को इबादत का महीना माना जाता है। मानव सेवा से बड़ी इबादत क्या हो सकती है यह मान कर कर्मवीर फर्ज की राह में डटे हुए हैं। ड्यूटी के दौरान समय मिलता है तो ठीक नहीं तो ड्यूटी के बाद का समय खुदा की इबादत में लगा देते हैं।

By: Harmesh Tailor

Updated: 10 May 2020, 06:51 PM IST

पहले ड्यूटी, फिर इबादत
- रमजान में रोज रख कर रहे १२ घण्टे ड्यूटी
कोई धूप में तो कोई बाहरी जिले में जाकर दे रहा सेवा
डूंगरपुर. कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर लागू लॉकडाउन में सैकड़ों कर्मचारी १२ घण्टे से अधिक ड्यूटी कर रहे हैं। मुस्लिम समुदाय का पवित्र रमजान माह चल रहा है। कई मुस्लिम धर्मावलंबी कर्मचारी भीषण गर्मी में रोजे रखकर बवा (महामारी) के इस दौर में मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे हैं। माहे रजमान को इबादत का महीना माना जाता है। मानव सेवा से बड़ी इबादत क्या हो सकती है यह मान कर कर्मवीर फर्ज की राह में डटे हुए हैं। ड्यूटी के दौरान समय मिलता है तो ठीक नहीं तो ड्यूटी के बाद का समय खुदा की इबादत में लगा देते हैं।
परिवार से होती है नोंकझोंक
ड्यूटी कर रहे रोजेदार बताते हैं कि रोजा रखकर इतनी लंबी ड्यूटी करने पर कई बार परिवारजनों से नोंकझोंक हो जाती है। उन्हें आपात स्थितियों के बारे में बताकर और इंसानियत के फर्ज से रूबरू कराकर समझाते हैं। परिवार भी सहमत होकर पूरा सहयोग करता है। पूरे दिन ड्यूटी करने पर शाम को रोजा परिवार के साथ खोलने का वक्त मिलता है। उस वक्त घर में किसी को छुए बिना पहले नहा-धो लेते हैं इसके बाद परिवार के साथ रोजा खोलते हैं।
कड़ी धूप कर रहे हैं ड्यूटी
सड़कों पर प्रहरी के रूप में तैनात पुलिसकर्मियों को विशेष योगदान है। कोतवाली थाने में पदस्थ एएसआई मोहम्मद रफीक भी हर साल की तरह इस बार भी रोजा रख रहे हैं। इसके बावजूद लॉकडाउन में तपती धूप में ड्यूटी पर तैनात हैं।
रोजे में कर रहे जयपुर के ट्यूर
चिकित्सा विभाग में चालक के पद पर कार्यरत घाटी निवासी गुलाम रसूल कुरैशी को मास्क, सेनेटाइजर, पीपीई किट आदि जयपुर से लाने के लिए रमजान माह के दौरान दो बार जयपुर का ट्यूर करना पड़ा। कुरैशी ट्यूर के दौरान अपने साथ पानी और फल लेकर चलते हैं। आते-जाते समय रास्ते में ही सुविधा अनुसार रोजा खोलते हैं।

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