आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए सरकार की जेब खाली

डूंगरपुर.
प्रदेश सरकार के कुपोषण से मुक्ति के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। स्थितियां यह है कि जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत संचालित नौ परियोजनाओं में कुपोषित एवं धात्री महिलाओं को दिए जाने वाले गर्म पोषाहार, बेबी-मिक्स एवं नाश्ते आदि के बिलों पर बजट और उदासीनता की धूल चढ़ रही है। पर, बिलों की फाइले स्वीकृत ही नहीं हो रही हैं। ऐसे में छह माह से एक वर्ष की लाखों रुपए की बाकियात चढऩे से आंगनवाड़ी केन्द्रों में पोषाहार देने वाले स्वयं सहायता समूहों ने भी हाथ खिंचने शुरू कर दिए हैं।

By: Harmesh Tailor

Published: 14 Jun 2020, 06:27 PM IST

आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए सरकार की जेब खाली
- स्वयं सहायता समूहों को पोषाहार के एवज में एक वर्ष से भुगतान नहीं
- बजट के टोटे में फाइलों पर चढ़ी धूल
- महिला एवं बाल विकास विभाग का मामला
डूंगरपुर.
प्रदेश सरकार के कुपोषण से मुक्ति के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। स्थितियां यह है कि जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत संचालित नौ परियोजनाओं में कुपोषित एवं धात्री महिलाओं को दिए जाने वाले गर्म पोषाहार, बेबी-मिक्स एवं नाश्ते आदि के बिलों पर बजट और उदासीनता की धूल चढ़ रही है। पर, बिलों की फाइले स्वीकृत ही नहीं हो रही हैं। ऐसे में छह माह से एक वर्ष की लाखों रुपए की बाकियात चढऩे से आंगनवाड़ी केन्द्रों में पोषाहार देने वाले स्वयं सहायता समूहों ने भी हाथ खिंचने शुरू कर दिए हैं।

डूंगरपुर परियोजना की सर्वाधिक बाकियात
जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत नौ परियोजना संचालित हैं। इसमें डूंगरपुर परियोजना को छोड़ सभी परियोजनाओं में दिसम्बर 2019 के बाद से गर्म पोषाहार, बेबी मिक्स और नाश्ते आदि में भुगतान ही नहीं हुआ है। यदि डूंगरपुर परियोजना की बात करें, तो यहां जून 2019 के बाद से स्वयं सहायता समूहों को एक रुपए का नया भुगतान नहीं हुआ है। हालात यह है कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी जरूरतमंद महिलाएं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और कार्यकर्ता पर्यवेक्षकों से संपर्क कर रही हैं। पर, भुगतान अटका हुआ है।

प्रति समूह एक लाख रुपए की बाकियात चढ़ी
परियोजना अंतर्गत पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की छह माह से एक वर्ष तक की बाकियात चढऩे से स्थितियां यह है कि हर आंगनवाड़ी केन्द्र के समूह की मोटा-मोटा एक-एक लाख रुपए की बाकियात चढ़ गई है। ऐसे में निर्धन एवं जरूरतमंद परिवारों से जुड़ी महिलाएं उधारी पर पोषाहार लाकर खिला रही थी। पर, बाकियात चढऩे से अब उन्होंने भी हाथ खिंचने शुरू कर दिए हैं।

इतना है स्वीकृत है बजट
गर्म पोषाहार : 04.50 रुपए प्रति बालक प्रति दिन
बेबी-मिक्स : 55 रुपए धात्री एवं गर्भवती महिला प्रति गुरुवार तथा छह माह से तीन वर्ष के बच्चे के लिए 45 रुपए प्रति पैकेट हर
नाश्ता : 03.50 रुपाए प्रतिदिन प्रति बालक

यह बजट भी फाइलों में अटका
आंगनवाड़ी केन्द्र की पंजीकृत गर्भवती महिलाओं एवं धात्री महिलाओं के अन्नप्रशासन, गोद भराई के लिए ढाई सौ-ढाई रुपए का प्रावधान है। वहीं, प्रवेशोत्सव के मद में भी ढाई सौ रुपए दिए जाते हैं। पर, इसका भुगतान भी एक वर्ष से फाइलों में दबा पड़ा है। वहीं, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी का एक हजार रुपए प्रति वर्ष गत तीन वर्ष से बजट अटका हुआ है।

सबको 3.10 करोड़, डूंगरपुर को एक करोड़
विभागीय सूत्रों अनुसार जिले की डूंगरपुर परियोजना को छोड़ शेष समस्त परियोजना को विभिन्न मद में 3.10 करोड़ रुपए बजट आवंटित किया जाता है। पर, तकनीकी गड़बड़ी के चलते गत लम्बे समय से डूंगरपुर परियोजना को केवल एक करोड़ रुपए ही बजट दिया जा रहा है। इसमें भी उन्हें 30 प्रतिशत ही व्यय करने के अधिकार दे रखे हैं। ऐसे मेें कोष कार्यालय बिल अटका रहा है। विभागीय अधिकारियों ने यह मसला जिला प्रशासन तक भी पहुंचाया है। पर, वहां कोई कार्रवाई नहीं हुई।

लेखा शाखा की भी उदासीनता
एक-एक वर्ष से बिलों की बाकियात में लेखा अधिकारियों की उदासीनता भी साफ नजर आ रही है। स्थितियां यह है कि समूहों से बिल प्राप्त कर पर्यवेक्षकों को देने में एक दिन भी ऊपर होने पर विभागीय अधिकारी अल्प मानदेयकर्मी इन कार्मिकों को नोटिस थमा कर सेवा से बेदखल करने की धमकियां दे देते हैं। जबकि, महीनों तक बिलों की फाइले लेखाधिकारियों के पास पड़ी रहती है। पर, विभागीय अधिकारियों अपने इन कार्मिकों पर कभी कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है।

इतने हैं आंगनवाड़ी केन्द्र
परियोजना ........केन्द्र .........मिनी केन्द्र
आसपुर............. 266.............. 70
बिछीवाड़ा.......... 247 ..............40
दोवड़ा.............. 129................ 36
डूंगरपुर ............171.................. 41
झौथरी............. 142 .................44
सागवाड़ा प्रथम ...170................. 51
सागवाड़ा द्वितीय.... 249........... 89
सीमलवाड़ा ..............143............ 55
चीखली ...................129 ............45
कुल...................... 1646 .............471

मानदेय नहीं, खुद की जेब से खरीदा गेहूं
आंगनवाड़ी कार्मिकों के मानदेय की भी यहीं हालात है। उनको भी लम्बे समय से भुगतान ही नहीं हुआ है। ऐसे में महिला एवं बाल विकास विभाग ने कोविड-19 के तहत धात्री-गर्भवती एवं बच्चों को बाजार से गेहूं खरीद कर बांटने के निर्देश दे दिए हैं। योजना का प्रचार-प्रसार होने से लाभान्वित रोज केन्द्र पर पहुंच कर उगाई करने लगे। ऐसे में आंगनवाड़ी कार्मिकों ने मानदेय नहीं मिलने के बावजूद स्वयं की जेब से बाजार से गेहूं खरीद कर बांटा। उसका भी भुगतान अटका हुआ है।

धरना देंगे...
जिले में स्वयं सहायता समूहों ने पोषाहार देना बंद कर दिया है। एक-एक लाख रुपए की बाकियात चढ़ गई है। अभिभावक आंगनवाड़ी कार्मिकों को परेशान करने लगे हैं। विभागीय अधिकारियों ने जल्द ही भुगतान नहीं करवाया, तो जिले भर के स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के साथ कलक्टरी के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
- लक्ष्मी जैन, जिलाध्यक्ष, जिला आंगनवाड़ी संघ

बजट का अभाव
. बजट की काफी समस्या है। हम फाइले लेकर नियमित कोष कार्यालय जा रहे हैं। लेकिन, उनके भी अमूक राशि तक ही बिल पास करने के नियम है। ऐसे में अन्य विभागों के बाद आईसीडीएस का नम्बर लग रहा है। इससे बिल अटक रहे हैं। बहुत समस्या आ रही है। पर, सरकार बजट दें, तो ही कुछ हो सकता है।
लक्ष्मी चरपोटा, उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग

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