श्रदालुओ कुछ इस तरह बिछाए अपने आचार्य के लिए पलकपावड़े

Harmesh Kumar Tailor

Publish: Jan, 14 2019 08:07:52 PM (IST)

Dungarpur, Dungarpur, Rajasthan, India


बनकोड़ा.
दान देने में भावना का बहुत अधिक महत्व है। दान में वस्तु के दाम का नहीं भाव का दाम है। तीर्थ जीर्णोद्धार में दिया अर्थ कभी व्यर्थ नहीं जाता। यह प्रवचन विमल गच्छाधिपति आचार्य प्रद्युनविमल सुरीश्वर 'भाई महाराजÓने श्रीचन्द्रप्रभु उपाश्रय भवन में हुई धर्मसभा में व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि यदि दान देने वाले की भावना उत्कृष्ट है, तो उसके अन्त:करण में दान देने से पहले, देते समय और देने के पश्चात जो हर्ष होगा उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है। आचार्य प्रितेशविमल सुरीश्वर की ओर से आचार्य पदवीं पर आरूढ़ होने के बाद बनकोडा में अपने पहला सबोधन देते कहा कि परिवार में प्राप्त संस्कार से ही व्यक्ति बड़ों को मान-समान देता है। मुनि राजपद्मविमल राजा महाराज ने भी प्रवचन दिए। इस दौरान मुनि श्रमणविमल, बालमुनि धन्यविमल, मुनि राजपद्मविमल, मुनि नयपद्मविमल, मुनि आगमविमल भी मौजूद थे। नवकारशी का लाभ बसंतीबेन हमीरचंद भूपतावत ने लिया। इससे पूर्व संघ के कस्बे में मंगल प्रवेश हुआ। इस पर श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछाकर स्वागत किया। सामैया के साथ श्रद्धालुओं ने श्रमण संघ की अगवानी की। इस अवसर पर श्रीचन्द्रप्रभु तथा श्रीअजीतनाथ जैन श्वेताबर मूर्तिपूजक संघों ने बैण्ड-बाजों के साथ जयकारे लगाए। आचार्य श्रीसंघ का अरिहंत भक्ति मंडल तथा पुण्य-गुण महिला मण्डल ने स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने भी अपने निवास के बाहर अक्षत गहुलियां कर गुरुवंदन किया। बाद में आचार्य संघ तथा श्रद्धालुओं ने दोनों जिनालयों में सामूहिक चैत्यवंदन किया।

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