डूंगरपुर : आंगन में पानी, पर राह में बाधाएं हजार, खेतों की प्यास बुझाने को किसान है लाचार

खुद के दम पर खेतों में पानी पहुंचाने को मजबूर है किसान

By: Ashish vajpayee

Published: 18 Jan 2018, 11:29 PM IST

दीपेश त्रिवेदी. रामसौर. डूंगरपुर. समय के साथ साथ जिले भर में कृषि का रकबा तो कागजों में साल दर साल बढता चला गया, परंतु सिंचाई की सुविधाओं सिमटती जा रही है। यहां जिक्र रामसौर क्षेत्र का है। खेतों के आस-पास समुद्र सा नजारा हैं। पर, इस पानी को इस्तेमाल नहीं कर पा रहे है। हां, आर्थिक रूप से थोड़े मजबूत काश्तकार इस पानी को अपने खेतों तक लाने के लिए हजारों-लाखों खर्च करने को मजबूर हैं। माही बेकवाटर से सटे रामसौर एवं कालिका पारड़ा गांव की माटी पर किसान सोना उगा सकते हैं। यहां के किसानों को माही लिफ्ट सिंचाई योजना से जोडऩे मात्र से इस पूरे क्षेत्र की तकदीर बदल सकती है। इसके लिए हर सरकार तक पैरवी की जा रही है, पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

निजी साधनों से सिंचाई

यहां के किसानों को हर फसली सीजन में खेतों की प्यास बुझाने के लिए निजी साधनों पर निर्भर होकर रहना पड़ता है। सरकारी सिंचाई योजना की व्यवस्था नहीं होने से किसानों को मजबूरन नदी पर डीजल पंप सेट लगाकर हजारों मीटर लम्बी लम्बी पाइप लाइन बिछाकर दूर दूर खेतों तक नदी का पानी अपने स्तर से खेतों तक पर पहुंचाना पड़ रहा है। ऐसे में यहां के किसानों को इस बात का मलाल होता है कि इतनी बड़ी मात्रा में नदी के बावजूद भी यहां का किसान उन्नत पैदावार नही ले पा रहा है।

दोहरी मार ...

माही नदी में अथाह जल राशि होने के बावजूद भी रामसौर एवं कालिका पारड़ा गांव इस पानी के लाभ से वंचित है। न तो इस नदी का पानी भरपेट पीने को मिल रहा है। न ही सिचाई में। किसानों को सिंचाई सुविधा के अभाव में खेतों की प्यास बुझाने के लिए दिन रात भाग दौड़ करनी पड़ रही है। वहीं, आर्थिक भार भी झेलना पड़ रहा है। ऐसे में हर सीजन में किसानों को फसलों को सींचने के लिए हर बार हजारों रूपए खर्च करने पड़ रहे है।

यह है रकबा

राजस्व रिकार्ड के अनुसार रामसौर का क्षेत्रफल 2515 बीघा 19 बिस्वा है। इनमें से 811 बीघा खातेदारी कृषि योग्य भूमि चिन्हित है। वही कालिका पारड़ा का क्षेत्रफल 1619 बीघा तीन बिस्वा है। इनमें 460 बीघा छह बिस्वा भूमि खातेदारी कृषि योग्य रकबा है। वहीं छह बीघा नौ बिस्वा डूब क्षेत्र व 673.10 बीघा सिंचाई विभाग कड़ाणा के तहत आती है।

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