डूंगरपुर : गांव-गांव में गायत्री परिवार का दीपयज्ञ, युवा ले रहे नशामुक्ति का संकल्प

‘व्यसन मुक्त सुंस्कारित राष्ट्र का निर्माण गायत्री परिवार का लक्ष्य’

By: Ashish vajpayee

Published: 10 Feb 2018, 10:46 PM IST

डूंगरपुर. गुजराती पाटीदार समाज एवंं अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वाधान में जिले भर में व्यसनमुक्ति और आध्यात्मिकता को लेकर चल रहे दीप यज्ञ की श्रंखला में ग्रामीणों की भागीदारी खूब बढ़ रही हैं। जिले में शुक्रवार को विकास नगर, मांडव, खेड़ा आसपुर, गामड़ा बामणिया, एवं झौसावा में अलग-अलग टोलियों ने दीपयज्ञ का कार्यक्रम संपन्न कराया।

विकासनगर में तुलसीराम व्यास, भगवती प्रसाद चौबीसा, नानजी मेरोप, नगीन पाटीदार, कांतिलाल गायत्री परिवार से पाटीदार समाज से मुख्य प्रबंधक सिटी गोपाल पाटीदार, फ्लावर किड्स संस्थान के अध्यक्ष डायालाल पाटीदार, चंद्रकांत पाटीदार, हरिप्रसाद पाटीदार, किशोरी लाल पाटीदार, राजेश पाटीदार और गांव मांडव में दीपक जोशी पंकज शाह महेन्द्र गायत्री परिवार से पाटीदार समाज से डायलाल पाटीदार एवंं उनकी टीम, खेड़ा आसपुर में वासुदेव त्रिवेदी नारायणलाल पंड्या, प्रवीण भट्ट, शिवराम कलाम, अमृतलाल कलाल नारायण मामा, गामड़ा बामणिया में लाल शंकर जोशी, हरिमुख, वेलचंद पाटीदार, कुबेर लाल, विनोद कुमार पाटोदिया, झोंसावा में साहिब सिंह, डायालाल पाटीदार एवं उनकी टीम और गायत्री परिवार से सुभाषचंद्र सोमपुरा ने दीप यज्ञ संपन्न कराया।

सभी समाजों की भागीदारी

कार्यक्रम में अब सर्व समाज के सभी वर्ग के लोग श्रद्धा से जुड़ रहे है। साथ ही समाज निष्ठ, सुसंस्कृत, सामाजिक समरसता, व्यसनमुक्त, एवं संस्कारवान बनने का संकल्प ले रहे हैं। यह अनवरत 17 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद 25 फरवरी को शांतिकुंज हरिद्वार से विशेष टोली बुलाकर कार्यक्रम किया जा रहा है। गुजराती पाटीदार समाज के अध्यक्ष डायालाल पाटीदार, मुख्य प्रबंधक गोपाल भाई पाटीदार व प्रेम भाई पाटीदार ने बताया कि इस कार्यक्रम ने समाज के युवाओं की सोच बदल दी है।

जारी रहेगा अभियान

दीपयज्ञ का अभियान जिले भर में लगातार जारी रहेगा। इसका मूल मकसद नशा मुक्ति आंदोलन, नारी जागरण, कुरीति, मृत्यु भोज, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, उपासना, साधना, आराधना, हरीतिमा संवर्धन में वृक्षारोपण, नैतिक शिक्षा है। भौतिकता की चकाचौंध में वातावरण के दुष्प्रभावी होता है। खर्चीली शादियां व्यसनी जीवन, फैशन युक्त रहन सहन, अपसंस्कृति को देव संस्कृति मानव संस्कृति में बदलने का यही एक माध्यम है।

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