जयकारों के साथ मृण प्रतिमाएं विसर्जित

बडलिया में अतिरूद्र महायज्ञ के दौरान की थी स्थापित

By: Vinay Sompura

Published: 16 May 2018, 03:17 PM IST

जयकारों के साथ मृण प्रतिमाएं विसर्जित

शोभायात्रा में उमड़े श्रद्धालु

बनकोड़ा. अवधुत भैरवनाथ मढी बडलिया धाम में श्री श्री 1008 अतिरूद्र महायज्ञ एवं शतचण्डी यज्ञ के दौरान स्थापित मृण प्रतिमाओं का मंगलवार को गाजेबाजे और विधिविधान के साथ सोम कमला आंबा बांध जलाशय में विसर्जन किया गया। इससे पूर्व भव्य शोभायात्रा निकाली गई, इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
बडलिया धाम के महंत ईतवारनाथ महाराज की प्रेरणा तथा रूद्रवाहिनी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगी प्रकाशनाथ महाराज के मार्गदर्शन में रूद्रवाहिनी संघ के बैनर तले 20 अप्रेल से 2 मई तक अतिरूद्र महायज्ञ तथा शतचंडी यज्ञ हुआ था। आयोजन की सफलता तथा वागड़ के दोनों जिलों में निकाली गई अश्वमेघ यात्रा के बाद मंगलवार को धाम से धूमधाम से मृण प्रतिमाओं की विसर्जन यात्रा रवाना हुई।
धाम स्थल पर निर्मित कैलाश पर्वत एवं गुफा में स्थापित महिसासुर मर्दिनी मां काली, शिव . पार्वती, अद्र्धनारीश्वर, हनुमानजी, नंदी सहित सभी प्रतिमाओं को ट्रैक्टर तथा पिकअप में सजाकर रखा। सुबह से ही भक्तों का धाम पर पहुंचने का क्रम शुरू हो गया है। गाजे बाजे और जयकारों के साथ यात्रा रवाना हुई। लोगों ने पुष्प व अक्षत वृष्टि कर विदाई दी। विसर्जन यात्रा गडासिहालिया, मोवाई मोड, मोवाई, पूंजपुर, बडौदा, आसपुर, करकोली, फतेहपुरा, अमृतिया होते हुए सोमकमला आंबा बांध पहुंची।
रूद्रवाहिनी संघ के राष्ट्रीय तथा विभिन्न प्रकल्पों के पदाधिकारी तथा श्रद्धालुओं ने महायज्ञ के मुख्य आचार्य धीरज जोशी बोदिया के सान्निध्य में विभिन्न अनुष्ठान सम्पन्न कराए। आरती के बाद प्रतिमाएं जल में विसर्जित की गई।

श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाई शनि जयंती

डूंगरपुर. आदर्शनगर मार्ग स्थित शनिदेव मंदिर पर मंगलवार को शनिदेव जयंती श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाई गई। यजमानों ने यज्ञ में आहुतियां समर्पित की।
आचार्य रामचन्द्र महाराज के सान्निध्य में हुए विविध धार्मिक आयोजन के तहत मुख्य यजमान सवितादेवी खराड़ी, चेतनलाल खराड़ी आदि ने यज्ञ किया। इससे पूर्व सुबह भगवान शनिदेव की प्रतिमा की आंगी, दर्शन, तेल अभिषेक और आरती के कार्यक्रम भी हुए। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आई। साथ ही सुन्दर काण्ड पाठ और भजन-कीर्तन का दौर भी चलता रहा। शाम को पूर्णाहुति के बाद महाआरती हुई।

Vinay Sompura Bureau Incharge
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