मासूम को बनाया हवस का शिकार, अब जिन्दगी कटेगी जेल में

दुष्कर्म के अभियुक्त को आजीवन कारावास
- नजदीकी रिश्तेदार के यौन उत्पीडऩ का मामला
- दो साल से भी कम समय में आया फैसला

By: Vinay Sompura

Published: 25 Apr 2018, 07:09 PM IST


डूंगरपुर.
नजदीकी नाबालिग रिश्तेदार का यौन उत्पीडऩ करने के मामले में विशिष्ठ न्यायालय लैगिंक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम २०१२ के पीठासीन अधिकारी एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपक दूबे ने आरोपित को आजीवन कारावास की सजा से दंडि़त किया है।
इस मामले में दोवड़ा थाने में चार जुलाई २०१६ को इसी थाना क्षेत्र की एक महिला ने प्रकरण दर्ज कराया था। रिपोर्ट में बताया कि प्रार्थिया की १४ वर्षीया नाबालिग पुत्री के साथ लगातार दुष्कर्म किया गया है। इससे वह गर्भवती हो गई और एक बेटे को जन्म दिया है। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान कर आरोपित कानजी पुत्र हवजी ननोमा को गिरफ्तार किया। कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद हुई सुनवाई में सामने आया कि आरोपित पीडि़ता का नजदीकी रिश्तेदार है। पीडि़ता के पिता लकवाग्रस्त व बीमार हैं और मां मजदूरी करके जैसे-तैसे परिवार का भरण-पोषण कर रही है। ऐसे में नजदीकी रिश्तेदार पर संरक्षण की जिम्मेदारी थी, पर इसने संरक्षण के बजाए हवस का शिकार बनाया। न्यायालय ने अपराध की प्रवृति को देखते हुए अभियुक्त कानजी को धारा लैगिंक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा ५(६) के तहत आजीवन कारावास और दो हजार रुपए जुर्माना और भादंसं की धारा ३४२ के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास व १००० रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। यह दोनों सजाएं साथ चलेंगी। सरकार की ओर से पैरवी विशिष्ट लोक अभियोजक नरेश कलाल ने की।
अनुसंधान में आरोपी का खुलासा
पीडि़ता की मां की ओर से थाने में दी गई प्राथमिकी में आरोपी अन्य को बनाया गया था। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी पीडि़ता का रिश्तेदार है। इसके बाद इसे गिरफ्तार किया गया था।

अनुसंधान में आरोपी का खुलासा
पीडि़ता की मां की ओर से थाने में दी गई प्राथमिकी में आरोपी अन्य को बनाया गया था। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी पीडि़ता का रिश्तेदार है। इसके बाद इसे गिरफ्तार किया गया था।

Vinay Sompura Bureau Incharge
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