जज्बा : डूंगरपुर का होनहार बेटा बोला : पापा बहुत हुआ, अब हमारी बारी है...आप करो आराम

जज्बा : डूंगरपुर का होनहार बेटा बोला : पापा बहुत हुआ, अब हमारी बारी है...आप करो आराम
Jazba : Dangarpur

पहले बेटियां, अब बेटे ने किया पापा का नाम बुलंद

नाम यूं ही नहीं बनते। त्याग, मेहनत, संघर्ष, ईमानदार प्रयास और अपनों के बेहतर भविष्य की जिद। साथ में संस्कारों का ताना-बाना और इनके साथ सालों की तपस्या। सामान्य जीवन बसर करने वाले एेसे ही एक परिवार के होनहारों ने आने वाले कल की सुनहरी इबारत लिख दी है। सोच बड़ी होगी तो काम भी बड़े होंगे।


इसे मूलमंत्र मानने वाले परिवार के मुखिया नरेन्द्र जैन की बादल महल मार्ग पर वेल्डिंग की छोटी सी दुकान है। रोजाना 12 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद भी दाल-रोटी के जुगाड़ तक सिमटे रहने वाले नरेंद्र ने 10 बरस पहले ही तय कर लिया था कि वेल्डिंग के अभावों की तपिश बच्चों को नहीं सहने देंगे। बच्चों ने भी पिता के त्याग, समर्पण को समझा। परिणाम यह है कि दो बेटियां सीए बनने के अंतिम पड़ाव में है और बेटा रविवार को पहले ही प्रयास में आईआईटी कैम्पस में पहुंच गया।


युवाओं को दी नसीहत


तीनों बच्चों से इस मुकाम तक पहुंचने के बारे में पूछा तो वे बोले, सबसे पहले यह तय करना है कि हमें करना क्या है। आज हर अभिभावक संतान के बेहतर की कामना करता है। हमने भी लक्ष्य बनाया। इसके बाद इन्हीं विचारों के साथ जीना शुरू किया। कई बार विचलित हुए, पर हर बार संकल्प और लक्ष्य को याद किया। सतत मेहनत की। पापा-मम्मी प्रेरणा बनते रहे। यहीं मूलमंत्र को याद करते हुए आगे बढ़़े और बढ़ते रहेंगे।


यूं छलकी पिता की खुशियां


नरेन्द्र से सोमवार को वेल्डिंग की दुकान पर मुलाकात की। बच्चों का जिक्र किया तो पसीने से तरबतर चेहरा खिल उठा और बोले, हर रोज बच्चों के लिए 12 घंटे मेहनत करता था। आज सफल हो गई। खुद एमकॉम तक पढ़ा। नौकरी नहीं मिली तो यह काम शुरू किया। खूब मेहनत वाला काम है, यही सोचता था कि बच्चों को कामयाब बनाएंगे। बेटे की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया।


ब्याज भरा, लेकिन बच्चों ने भी तय कर लिया था कि पापा के संकल्प को पूरा करना है। पत्नी सोनल भी एमकॉम है। जुड़वां बेटियां हुई। दोनों अपने दम पर सीए फाइनल तक पहुंच गई। बच्चियों ने पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम जॉब किया। तकलीफें हर रोज आती थी, पर, तब सब मिलकर रास्ता तलाशते और ईश्वर दे देता था। अब बेटा भी पहले ही प्रयास में आईआईटी में चयनित हो गया है।


'पापा कभी भी टूटे नहीं'


नरेन्द्र की बेटियां रिद्धि और विधि सीए फाइनल में है। वे बोली, पढऩे बाहर गई। आर्थिक परेशानी होनी ही थी, पर पापा कभी टूटे नहीं। हर बार एक ही बात बोले, तुम अपने जिम्मे का काम करो, मेरा जिम्मा मैं पूरा कर दंूगा। हमने पार्ट टाइम जॉब शुरू किया तो भी पापा बोले, पढ़ाई करो। बेटा सिद्धार्थ बोला-पापा ने अपना जीवन हमारे भविष्य को बनाने में लगा दिया। अब बहुत हुआ... अब हमारी बारी है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned