लॉकडाउन की मार, दूसरी मूंग और भिण्डी में कीट रोग

काश्तकारों ने नहीं दिया ध्यान, तो होगा काफी नुकसान, कृषि विज्ञान केन्द्र ने जारी की एडवाजयरी

By: milan Kumar sharma

Published: 18 Apr 2020, 05:57 PM IST

डूंगरपुर. लॉकडाउन ने काश्तकारों की कमर तोड़ दी है। वहीं, दूसरी तरफ अपने खेतों में की गई मूंग और भिण्डी में भी तरह-तरह के रोग पनप गए हैं। हालांकि, अभी यह कीट रोग प्रारम्भिक चरण में है। लेकिन, पूरे जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में यह रोग पनपने से काश्तकारों के माथे पर चिंता की लकीरे खींच गई हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र के मुख्य वैज्ञानिक एवं प्रभारी डा. सीएम बलाई ने बताया कि जिले के बिछीवाड़ा एवं सागवाड़ा क्षेत्र भिण्डी उत्पादन तथा मूंग जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में हो रहा है। लेकिन, सभी जगह-जगह अलग कीट रोग की समस्याएं सामने आ रही हैं। कृषकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। वह समय रहते कीट प्रबंधन करेंगे, तो फसल को नुकसान नहीं होगा।

मूंग के लिए कृषक यह करें उपाय
मंूग के पौधों में पीलापन नजर आ रहा है। यह पीला मोजेक बीमारी की वजह से होता है, जो एक विषाणु जनित बीमारी है। इसकी शुरूआत एक पौधे से होती है। धीरे-धीरे पूरे खेत में फैलता है। शुरू में कुछ पौधों में चितकबरे गहरे हरे पीले धब्बे दिखाई देते हैं। एक दो दिन बाद में सम्पूर्ण पौधे बिल्कूल पीले हो जाते हैं। इसके नियंत्रण के लिए के लिए बीजों को इमिडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यूएस चार ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीज उपचार कर बुआई करें। रोगग्रस्त पौधों को जड़ सहित उखाड़ कर नष्ट करें। सफेद मक्खी पर नियंत्रण के लिए बुवाई के एक माह बाद या लक्षण दिखाई देते ही एसीटामिप्रिड 0.5 ग्राम या डाई मिथोएट दो मिली प्रति लीटर की दर से शाम के समय छिडकाव करें। मंूग की 15 लाइन के बाद दो लाइन मक्का या ज्वार लगा देवे। इसी तरह जिले के कुछ क्षेत्रों में चूर्णिल आसिता (छाछ्या) रोग भी देखने को मिल रहा है। इसमें पत्ती की उपरी सतह पर सफेद पावडर के समान दिखाई देती है। बाद में मटमेले रंग में बदल जाती है। बीमारी का प्रकोप बढने पर ये सफेद पावडर जैसी संरचना पत्ती की दोनो तरफ की सतह पर दिखने लगते हैै। पत्तियां असमय झडऩे लगती हैं। इसके नियंत्रण के लिए कवकनाशी दवा जैसे केराथेन दो मिली या केलेेक्सीन एक मिली या सल्फेक्स तीन ग्राम प्रति लीटर की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

भिण्डी में भी लगे रोग
भिण्डी में मुख्यत: पीतशीरा मोजेक विषाणु जनित रोग फैल रहा है। यह सफेद मक्खी के द्वारा फैलता है। इसमें पत्तियां एवं फल पीले पड़ जाते हैं। पत्तियां चितकबरी होकर प्यालेनुमा हो जाती है। इससे पैदावर बहुत कम हो जाती है। धीरे-धीरे फसल पुरी नष्ट हो जाती है। इसके नियंत्रण के लिए खेत में पीला चिपचिपा पाश दो बीघा लगावे। रोग के शुरूआत में ही रोग ग्रस्त पौधों को तुरंत जड़ सहित उखाड़ कर नष्ट करें। नीम तेल पांच मिली प्रति लीटर की दर से छिड़काव करे। एसीटार्मिप्रड कीटनाशी 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी दर से छिडकाव करें।

भिण्डी में यह भी रोग
जड़ग़लन रोग: खडी फसल में बाविस्टिन दवा का दो ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव एवं चार ग्राम/लीटर की दर से ड्रेचिंग करें।
छाछया रोग: पत्तियों पर सफेद चुर्णी धब्बे दिखाई देते है तथा अधिक रोग ग्रसित पत्तियां पीली पड़कर झड़ जा रही है, तो केराथेन (डायनोकेप 48 इसी) दवा एक मिली प्रति लीटर की दर से छिडकाव करे।
फल छेंदक: खेत में टी आकार की लकड़ी या खपच्चियां 10-12 प्रति बीघा की दर से लगावे। फेरामेन ट्रेप (01 ट्रेप/बीघा) लगावे। कीट ग्रस्त फल को तोड़ कर नष्ट कर दें। प्रोफेनोफोस 40 ईसी दवा का दो मिली प्रति लीटर या इमामेक्टिन बेन्जोएट पांच प्रतिशत एससी का एक ग्राम दवा प्रति तीन लीटर पानी की दर से छिडकाव करें।
लाल मकडी : यह आठ पैरो वाला सूक्ष्म कीट है, जो अपने तीखे मुखांगों से पौधों की पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते हैं। इससे पौधों की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती है व फल कठोर होकर कुरूप हो जाते हैं। इसके नियंत्रण के लिए प्रोपरजाइट 57 ईसी दवा दो मिली प्रति लीटर की दर से सात दिन के अन्तराल पर दो छिडकाव करे।

milan Kumar sharma Reporting
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