सामान्य प्रसव से गूंज रही जुड़वा किलकारियां

मई माह में अंटेड किए ३८ जटिल प्रसव केस
गर्भवती का नहीं करना पड़ा सिजेरियन

By: sidharth shah

Published: 07 Jun 2018, 03:45 PM IST

डूंगरपुर. अधिकतर महिलाएं एक बच्चे को जन्म देती हैं। जुड़वां बच्चों का जन्म लेना संयोग कहा जाता है, लेकिन मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में एक या दो नहीं पिछले एक माह में ०८ माताओं ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया है। पिछले दो माह में १३ जुड़वा बच्चे पैदा हुए।
इससे पहले अप्रेल माह में भी पांच केस में जुड़वा बच्चों ने जन्म लिया था। सबसे खास बात यह रही कि यह सभी प्रसव सामान्य हुए। यह माता व शिशु के साथ अस्पताल प्रशासन के लिए अच्छी खबर बताई जा रही है। इससे आने वाले दिनों में अस्पताल में प्रसव आंकड़ें बढऩे का दावा किया जा रहा है। प्रदेश के पांच जिलों को मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति मिल गई है। एक अगस्त से सत्र शुरू होने वाला है। ऐसे में कई प्रकार की सुविधाओं से अस्पताल को लैस किया जा रहा है।

कई बार करना पड़ता है सिजेरियन
अस्पताल स्टाफ का कहना है कि जुड़वां बच्चों का प्रसव सामान्य तरीके से होने की संभावना सिर्फ ५० प्रतिशत रहती है। गर्भवती को दर्द अधिक होने के कारण अंत समय में भी सिजेरियन करना पड़ता है। इस बार सभी जुड़वा प्रसव सामान्य हुए हैं।

तीन दिन में चार माताओं ने दिए जुड़वा
अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में हर माह जुड़वा बच्चे होते हैं। २० मई को दो लड़कियां, २१ को लड़का-लड़की, २२ को दो लड़कों का जन्म हुआ। २० मई को एक ही दिन दो माताओं ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। मई २०१८ में एक, पांच, नौ, १२, ३० तारीख को जुड़वां बच्चों ने जन्म लिया। हालांकि इनसे हटकर एक गर्भवती के जुड़वा मृत शिशु का सामान्य प्रसव कराया गया।

हाई रिस्क होती है ...
जुड़वा बच्चों का सामान्य प्रसव से जन्म होना बहुत अच्छी बात है। जुड़वा बच्चों का केस हाई रिस्क वाला होता है। इसमें मां और बच्चों की सुरक्षा गंभीर चुनौती होती है। मातृ एवं शिशु अस्पताल में सुविधाएं दिनों दिन बढ़ रही हैं। इसी से यह संभव हो पा रहा है। आगामी दिनों में और भी सुविधाएं बढ़ेंगी।

-डॉ मोनिका, एसोसिएट प्रोफेसर, मातृ एवं शिशु चिकित्सालय, डूंगरपुर

sidharth shah Reporting
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