डूंगरपुर : हर रोज घरों में गूंजती छह किलकारियां, शिशु की जान को हो सकता है खतरा

संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के प्रयासों को धक्का

By: Ashish vajpayee

Published: 19 Jan 2018, 10:04 PM IST

डूंगरपुर. संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सरकार और चिकित्सा महकमा चाकचौबंद व्यवस्थाओं और सघन मोनिटरिंग का ढोल पीटे, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी डूंगरपुर जिले में हर रोज औसतन छह किलकारियां घरों में गूंज रही हैं। सरकार ने मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए एचबीएनसी वाउचर स्कीम राजसमंद के साथ डूंगरपुर जिले में लागू की है।

इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना , जननी एक्सप्रेस सेवा, 108 एम्बुलेंस सेवा, शुभलक्ष्मी योजना, नि:शुल्क दवा एवं जांच योजना आदि चल रही हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर माह की नौ तारीख को अस्पतालों में विशेष जांच एवं परामर्श सुविधाएं भी मुहैया कराने के दावे हो रहे हैं, इसके बावजूद अकेले दिसम्बर माह में डूंगरपुर में 186 प्रसव घरों में हुए।

तो क्या सर्वे से छूट गई गर्भवती माताएं

जिले में होम डिलीवरी की संख्या को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए एएनएन और आशा सहयोगिनी को गर्भवती महिला की पहचान करने एवं निगरानी करने का जिम्मा सौंपा गया। जिन 186 महिलाओं की होम डिलीवरी हुई है। यह प्रतिमाह किए जाने वाले सर्वे से कैसे छूट गई। यह सवाल विभाग के सामने खड़ा हो गया है।

किलकारी संग कुपोषण का मंडरा रहा खतरा

घर आंगन में हो रही प्रसूति से बच्चों में कुपोषण का खतरा मंडरा रहा है। वहीं मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के प्रयासों को भी झटका है।

यह है होम डिलीवरी के नुकसान

जच्चा-बच्चा को संक्रमण का खतरा
शिशु के मृत्यु होने की संभावना अधिक।
आपात स्थिति में माता को इलाज मिल पाना मुश्किल।
साफ सफाई नहीं होने से बच्चे के लिए परेशानी।
प्रारंभिक देखभाल नहीं हो पाना

संस्थागत प्रसव से मिलेगा यह लाभ

आपात स्थिति में निजी वाहन से अस्पताल लाने पर निश्चित किलोमीटर के लिए राशि का भुगतान।
बेटी के जन्म पर शुभलक्ष्मी योजना का लाभ
जननी सुरक्षा योजना का लाभ

जानकारी नहीं है

होम डिलीवरी से नुकसान अधिक है। इसे कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इस पर निगरानी करने का काम एएनएम और आशा सहयोगिनी का है। सर्वे से छूट गई है या कोई और कारण, इसकी जानकारी नहीं है।
आरएस वर्मा, अतिरिक्त सीएमएचओ, डूंगरपुर

पाबंद करेंगे ...

गैर संस्थागत प्रसव को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। एचबीएनसी वाउचस स्कीम जिले में लागू हो चुकी है। इसके आंकड़े सामने आना शुरू हो जाएंगे। एएनएम एवं आशा सहयोगिनी को पाबंद किया जा रहा है।
राजेश शर्मा, सीएमएचओ, डूंगरपुर

फेक्ट फाइल

2057 राजकीय संस्थागत प्रसव हुए दिसम्बर माह में
640 प्रसव निजी संस्थाओं में हुए
186 डिलेवरी घरों में हुई
43 हजार गर्भवती माताओं का पंजीयन होता है हर साल जिले में
30 हजार प्रसव आते हैं ऑन रिकार्ड

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