दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना
ूंगरपुर. पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन जिनालयों में मार्दव धर्म की आराधना हुई। महावीर चैत्यालय, मुनिसुव्रतनाथ जिनालय, हाउसिंग बोर्ड के आदिनाथ मंदिर, प्रगतिनगर के पाश्र्वनाथ मंदिर, घाटी स्थित मामा भानजा मंदिर,फोज का बडला स्थित ऊंडा मंदिर, घुमटा बाजार स्थित कोटडिया मंदिर, सुरपुर व नवाडेरा स्थित जैन मंदिरों में समाज जनों के सान्निध्य में श्रीजी की प्रतिमा का अभिषेक कर महाशांतिधारा की गई। मुनिसुव्रतनाथ जिनालय में कल्पना दीदी व वंदना दीदी के सानिध्य में पूजा अर्चना की गई। उधर, प्रगतिनगर चैत्यालय में मुनि समता सागर ने कहा कि कोमलता का नाम ही मार्दव धर्म है। मार्दव धर्म धारण करने वाला ही अपनी आत्मा के स्वभाव को प्राप्त कर सकता है। महावीर नगर चैत्यालय में आर्यिका सौभाग्यमती माता ने धर्मसभा में कहा कि हम बरसों से उत्तम मार्दव धर्म की पूजा - उपासना करते आए हैं, लेकिन आज तक यदि हमने अपने मान को नहीं गलाया हो तो आज गलाने का प्रयास करें। शाम को प्रतिक्रमण हुआ। आरती के बाद फेन्सी ड्रेस प्रतियोगिता हुई। बच्चों ने धर्म के प्रति संदेश दिया।
कोकापुर. पाडवा व मांडव के आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा की।
बिछीवाड़ा. शांतिनाथ जैन मंदिर में भगवान का अभिषेक व शांतिधारा की। इससे पूर्व शोभायात्रा निकली।
रामगढ. आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में ब्रह्मचारी पवन भैया के निर्देशन में पूजा की।
बनकोड़ा. बनकोड़ा-भासौर सहित क्षेत्र के दिगम्बर जैन धर्मावलम्बियों ने जिनालय में शांतिधारा, श्रीजी का अभिषेक, नित्य नियम पूजा, आरती तथा शाम को आरती, स्वाध्याय तथा प्रश्नमंच का आयोजन किया।
पीठ. शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में समाज ने सामूहिक पंचामृत अभिषेक किया। पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान को पूजन-पाठ कर विविध अघ्र्य चढ़ाए। जैन मंदिर में समाजजनों ने भगवान आदिनाथ, पंचमेरू, 24 तीर्थकर महावीर स्वामी, पाश्र्वनाथ स्वामी का गुणगान किया।
सागवाड़ा. पर्यूषण पर्व के तहत चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर की वाटिका में शनिवार से पद्मावती महिला मण्डल की ओर से आठ दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुए। सेठ दिलीप नोगामिया तथा पवन गोवाडिय़ा की मौजूदगी में ‘जय जयकारा स्वामी देना साथ हमारा’ रोचक नृत्य प्रस्तुत किया। अरिहन्त एक मिनट प्रतियोगिता हुई। संचालन शरद बोबड़ा ने किया।

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