Video : डूंगरपुर : चिट्ठियों के लगे ढेर, पेंशन की राशि भी नहीं बटी

मुख्य डाकघर के बाहर लगाया धरना, ग्रामीण डाक सेवकों की बेमियादी हड़ताल का दिख रहा असर

 

By: Ashish vajpayee

Published: 22 Aug 2017, 09:40 PM IST

कई वृद्धों के बुढ़ापे की एक मात्र सहारा पेंशन नहीं मिल पाई है, तो कई लोगों की जरूरी डाकें बीच राह में ही थम गई हैं। इतना ही नहीं कई उपभोक्ताओं की बीमा की प्रीमियम जमा नहीं होने से उनकी बेचैनी बढ़ गई है, तो कई लोगों को उनके जमा मूलधन का ब्याज नहीं मिल पाया है। समस्याओं ही यह बानगी इन दिनों ग्रामीण डाक सेवकों की हड़ताल से सामने आ रही हैं। चार सूत्रीय मांगों को लेकर ग्रामीण डाक सेवक हड़ताल पर उतर गए हैं। ऐसे में रोज नई - नई समस्याएं सामने आ रही हैं। लोग रोज डाक विभाग जा रहे हैं, पर उनसे जुड़ा कोई भी कार्य नहीं हो पा रहा है। जिला मुख्यालय पर स्थित मुख्य डाकघर के बाहर सोमवार को अखिल भारतीय ग्रामीण डाक सेवक संघ के बैनर तले जिले भर के डाक सेवक शामिल हुए। यहां धरना स्थल पर मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि जब तक मांगे पूर्ण नहीं होगी, तब आंदोलन जारी रहेगा। इस मौके पर अध्यक्ष करणङ्क्षसह, सचिव दिलीप सिंह, अजीतसिंह, रमणलाल पाटीदार, हरिहर पाटीदार, महावीर जैन, महेश कोटेड, कमलशंकर चौबीसा, भगवती शंकर पाटीदार, रामलाल, नारायण साद आदि शामिल हुए।


यह है प्रमुख मांगे
1.जीडीएस कमेटी कमलेशचन्द्रा की रिपोर्ट को शत-प्रतिशत लागू किया जाए।
2.ग्रामीण डाक सेवकों को पेंशन मिले।
3. ग्रामीण डाक सेवकों की ड्यूटी आठ घंटे की जाए।
4. हडताल के दौरान नो वर्क नो पे अगसर लागू किया जाता है, तो उन दिनों की डाक का वितरण भी नहीं होगा।

काम पूरा, मानदेय अधूरा
डाकसेवक मानदेयकर्मी है। जिले में इनकी संख्या करीब 572 है। डाक सेवकों का कहना है कि उन्हें बमुश्किल पूरे माह में तीन घंटे के हिसाब से पांच से नौ हजार रुपए दिए जाते हैं। जबकि, काम उन्हें आठ घंटे से अधिक करवाया जाता है। समय-समय पर विभाग की ओर ेसे बचत, बीमा, जमा राशि आदि के लक्ष्य भी दिए जाते हैं। कईडाक सेवकों का क्षेत्र 100 किलोमीटर का है।ऐसे में विभाग उनका शोषण कर रही हैं।

Ashish vajpayee
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