दिल से दिया दान किसी के जीवन की मुस्कान...

sidharth shah

Publish: Jun, 14 2018 03:55:03 PM (IST)

Dungarpur, Rajasthan, India
दिल से दिया दान किसी के जीवन की मुस्कान...

विश्व रक्तदाता दिवस

डूंगरपुर. रक्तदाता के लिए कहा गया है कि ‘एवरी ब्लड डोनर इज ए हीरो’। खून के रिश्ते को अटूट बंधन कहा जाता है, लेकिन अपनी रगोंं में बहते खून को दान कर हम अनजानों से रिश्ता जोड़ सकते हैं। जरूरत है विश्व रक्तदाता दिवस पर रक्तदाता के रूप में आगे आने की, जरूरतमंद परिवार को खुशियों से भरने की। विश्व रक्तदाता दिवस पर सिद्धार्थ शाह की विशेष रिपोर्ट...

मित्र को था ब्लड कैंसर, उसे देख बन गए रक्तदाता

जिले के मोहन कोटेड़ अब तक 48 बार रक्तदाता कर चुके हैं। यह डूंगरपुर में समाज कल्याण में छात्रावास अधीक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 2001 से रक्तदान कर रहे हैं। यह कहते है कि १७ वर्ष पूर्व मित्र को ब्लड कैंसर होना सामने आया। उसे रक्त की जरूरत थी। तब से रक्तदाता के रूप में जुड़ा हूं। रक्तदाता दिवस पर हर वर्ष दो नए लोगों को संकल्प दिलाता हूं। जन्मदिवस, पुण्यतिथि, विशेष आयोजन पर रक्तदान के लिए प्रेरित करता हूं। वह कहते है कि मैंने करके देखा, मुझे अच्छा लगा। नए साथियों को जोडऩे की कोशिश जारी है।

चचेरे भाई की दुर्घटना से बन गए रक्तदाता
शहर के हर्षवर्धन जैन को अपने चचेरे भाई की दुर्घटना से रक्तदान की प्रेरणा मिली है। वर्ष 1995 में रक्त की जरूरत थी। रक्त नहीं मिल रहा था। पिता महावीरप्रसाद के साथ पहली बार रक्तदान किया। वर्ष १९९५ से अब तक ४१ बार रक्तदान कर चुके हैं। रक्तदाता दिवस पर ४२वीं बार रक्तदान करेंगे। वे रक्तदान के लिए हर समय तैयार रहते हैं। रात के समय जरूरत पडऩे पर भी रक्तदान के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं। दुर्घटना वाले मरीजों को आपात स्थिति में रक्त उपलब्ध कराया है।

रक्तदान को अभियान बनाने वाला नाम है पदमेश गांधी

आदिवासी अंचल में रक्तदान को लेकर जागरूकता की काफी कमी थी। रक्तदान का नाम सुनते ही लोग मरीज को अस्पताल में अकेला छोड़ कर भाग जाते थे। अब वह परिस्थितियां नहीं है। जिला हर साल दो हजार यूनिट रक्तदान कर रहा है, लेकिन यह स्थितियां एक दिन या एक साल में नहीं बनी हैं। जिले में रक्तदान को एक अभियान का रूप देने का श्रेय चिकित्सा महकमे में कार्यरत और समाजसेवा में अग्रणी पदमेश गांधी को जाता है। गांधी ने वर्ष १९७६ से २०१२ तक स्वयं 51 बार रक्तदान किया। इसके बाद वे रक्तदाताओं के प्रेरक बनकर उभरे। रक्तदान के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कई बार सम्मानित भी हो चुके हैं। जिला प्रशासन, अस्पताल तथा महावीर इंटरनेशनल की पहल पर रक्तदान अभियान शुरू करते हुए गांधी को जिला संयोजक की जिम्मेदारी दी। गांधी अब तक सामाजिक संगठन व अस्पताल के सहयोग से रक्तदाताओं की संख्या में बढोतरी करने का प्रयास कर रहे हैं। खासकर युवाओं को जोड़ा जा रहा है। इसके लिए गुजरात में भी जरूरमंद को रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में स्थितियां यह हैं कि किसी भी मरीज को रक्त की जरूरत हो और आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा हो, तो वह पद्मेश गांधी को याद किया जाता है। गांधी अपने नेटवर्क का इस्तेमाल कर मिनटों में रक्त की व्यवस्था कराते हैं।

सर्वाधिक आंकड़ा
एक दिन में ही 571 यूनिट रक्तदान रहा सर्वाधिक
पिंडावल पीएचसी प्रभारी नागेंद्रसिंह के नेतृत्व मेंं 25 अक्टूबर 2017 को ५७१ यूनिट रक्तदान करवाने का सर्वाधिक आंकड़ा है। यह रक्तदान एक दिन में किया गया है।

इनकी होती है जांच
हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, सिफलिस, एचआईवी जांच से रक्तको गुजरना पड़ता है। रिपोर्ट नकारात्मक आने पर रक्त को प्रयोग में लिया जाता है। हालांकि रक्तदाता को रक्तदान का लाभ बताकर प्रेरित किया जाता है।

रक्तदान को बढ़ावा देने में जिले में कई संगठन सक्रिय हैं। इसमें महावीर इंटरनेशनल, रोटरी, लायन्स, हुमड़ समाज, एमएमबी ग्रुप, विवेकानंद युवा मंडल, बरबोदनिया, निरंकारी सत्संग मंडल पूंजपुर, गणेश मित्र मंडल, जैन नवयुवक मंडल डूंगरपुर, आदिवासी विकास परिषद, नर्सेज कर्मचारी संघ आदि शामिल हैं। इसके अलावा कई समाज भी अपने वार्षिक आयोजनों के दौरान रक्तदान शिविर करते हैं। राजनैतिक संगठन, प्रशासनिक व धार्मिक संगठनों का भी सहयोग मिल रहा है। इससे नये रक्त दाता जुड़ रहे हैं।

इनको चैरिटी से
थैलेसीमिया, गायनिक, आपातकालीन मामले, कैंसर, वरिष्ठ नागरिकों को चैरिटी के रूप में नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है।

ब्लड बैंक टीम भी मुस्तैद
जिले में रक्तदान के प्रति बढ़ी जागरूकता में ब्लड बैंक टीम का भी बहुत बड़ा योगदान है। रक्तदान शिविर अस्पताल में हो चाहे 100 किमी की दूर पर टीम हर दम मुस्तैद रहती है।

ब्लड बैंक की स्टोरेज क्षमता
- 600 यूनिट
वर्तमान में उपलब्ध ब्लड - 70 यूनिट
हर दिन औसतन पांच यूनिट आता है ब्लड बैंक में
आरएनटी मेडिकल कॉलेज व बांसवाड़ा ब्लड बैंक को जाता है डूंगरपुर से रक्त

14 शिविरों में एकत्रित हुआ 475 यूनिट रक्त
160 गर्भवती को तीन माह में दिया रक्त
70 यूनिट उपलब्ध कराया निजी अस्पताल को
686 यूनिट दिया सामान्य अस्पताल के मरीजों को


यह है आंकड़े
वर्ष यूनिट
2011 — 668
2012 — 994
2013 — 1193
2014 — 1578
2015 — 1306
2016 — 1582
2017 — 2131
12 जून 2018 तक 906
(यहां जनवरी से दिसंबर तक चलता है वर्ष)

यह जीवनदान..
रक्तदान गिफ्ट फॉर हार्ट है। कमजोर होने की सिर्फ भ्रांतियां है। रक्तदान किसी का जीवन बचा सकता है। लोगों को रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। आपका रक्त जरूरतमंद की जान बचा सकता है।
— राजेश सरैया,प्रभारी अधिकारी, ब्लड बैंक, डूंगरपुर

 

डाउनलोड करें पत्रिका मोबाइल Android App: https://goo.gl/jVBuzO | iOS App : https://goo.gl/Fh6jyB

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

Ad Block is Banned