script284 urea in committees, 500 in the market | मुनाफाखोरी - समितियों में 284 की यूरिया, बाजार में बिक रही 500 में, इधर कार्रवाई के नाम पर स्टॉक की जांच | Patrika News

मुनाफाखोरी - समितियों में 284 की यूरिया, बाजार में बिक रही 500 में, इधर कार्रवाई के नाम पर स्टॉक की जांच

सहकारी समितियों में 284 रुपए में मिलने वाली यूरिया इन दिनों किसानों को 500 रुपए में खरीदना पड़ रहा है। दरअसल पर्याप्त भंडारण नहीं होने के कारण समितियों में यूरिया की किल्लत है। इसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है। किल्लत के कारण समितियों में किसानों को जरूरत के अनुरूप यूरिया नहीं मिल रहा इसका बेजा फायदा उठाकर निजी दुकान संचालक अधिक कीमत वसूल रहे हैं।

दुर्ग

Published: February 17, 2022 10:03:24 pm

पिछले इस बार रबी सीजन में जिले के करीब 28 हजार किसानों ने 43 हजार 535 हेक्टेयर में इस बार रबी की फसल लगाई है। इन किसानों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 8 हजार मिटरिक टन खाद प्रदाय करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें अकेले यूरिया की मात्रा 3200 मिटरिक टन की डिमांड है। कुल डिमांड के अगेंस्ट 5154 मिटरिक टन खाद समितियों में सप्लाई हो चुकी है, इसमें 2600 मिटरिक टन यूरिया शामिल है। सामान्यत: धान और गेहूं की फसल में बोआई के एक से डेढ माह बाद से यूरिया की जरूरत पौधों के ग्रोथ और हरियाली को बनाए रखने की होती है। इस लिहाज से यह यूरिया की ज्यादा जरूरत वाला समय है, लेकिन समितियों से किसानों को यूरिया नहीं मिल रहा है।
मुनाफाखोरी - समितियों में 284 की यूरिया, बाजार में बिक रही 500 में, इधर कार्रवाई के नाम पर स्टॉक की जांच
जिले में अब तक दो दर्जन से ज्यादा दुकानों की जांच हो चुकी है, यहां केवल स्टॉक व रिकार्ड में अंतर पर कार्रवाई की गई है।

यूरिया के साथ थमा रहे लदान
समितियों में यूरिया नहीं होने का फायदा दुकानदारों द्वारा अतिरिक्त दाम के रूप में ही नहीं अपितु जरूरत नहीं होने के बाद भी दूसरा सामान या खाद थमाकर भी उठाया जा रहा है। दुकानों में किसानों को दो बैग यूरिया के साथ कम से कम इतनी ही कीमत की दूसरे खाद या पोषक तत्वों का बैग की शर्त पर खाद दिया जा रहा है।

500 लेकर बिल दे रहे 284 का
शासन के नियमानुसार निजी दुकानों में भी सहकारी समितियों से अधिक दर पर खाद का विक्रय नहीं किया जा सकता। इस लिहाज से दुकानों में भी यूरिया की कीमत 284 रुपए होनी चाहिए, लेकिन कमी का फायदा उठाकर दुकान 500 रुपए यूरिया बेंच रहे हैं। वहीं शासन के आंखों में धूल झोंकने 284 रुपए का बिल थमा रहे हैं।

रेक में देरी के चलते परेशानी
जिले में खाद की कमी का प्रमुख कारण लंबे समय से रेक नहीं पहुंचना बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक खाद की पिछली रेक करीब महीनेंभर पहले आई थी। यह खाद समितियों में भंडारित करा लिया गया है। इस बीच जल्द रेक पहुुंचने का दावा कर रहे है। इस रेक से खाद उतारकर समितियों में पहुंचाने में अभी समय लगेगा।
इधर मुनाफाखोरी के बजाए स्टॉक की जांच
यूरिया पर मुनाफाखोरी की शिकायत पर कृषि विभाग लगातार जिले की दुकानों में जांच कर रही है, लेकिन इसमें भी खानापूर्ति की जा रही है। अधिकारी मुनाफाखोरी को पकडऩे के उपक्रम के बजाए दुकानों में जाकर स्टॉक और दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। जिले में अब तक दो दर्जन से ज्यादा दुकानों की जांच हो चुकी है। यहां केवल स्टॉक व रि$कार्ड में अंतर पर कार्रवाई की गई है। केवल एक दुकान में तालाबंदी की कार्रवाई की गई है।

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