ध्वनि प्रदूषण: जिम्मेदारों को सुनाई नहीं दे रहा शहर में बढ़ता शोर

ध्वनि प्रदूषण: जिम्मेदारों को सुनाई नहीं दे रहा शहर में बढ़ता शोर
Noise pollution: responsible not hear the noise in the city grows

Satyanarayan Shukla | Updated: 12 Dec 2016, 11:19:00 AM (IST) Bhilai, Chhattisgarh, India

ध्वनि प्रदूषण को रोकने हाईकोर्ट गंभीर है,लेकिन पर्यावरण संरक्षण बोर्ड  को इसकी चिंता ही नहीं। पर्यावरण संरक्षण बोर्ड ने जिले में एक भी जगह ध्वनि मापक यंत्र नहीं लगाया है।

भिलाई.ध्वनि प्रदूषण को रोकने हाईकोर्ट गंभीर है,लेकिन पर्यावरण संरक्षण बोर्ड  को इसकी चिंता ही नहीं। हमारे जिले में हाल यह है कि पर्यावरण संरक्षण बोर्ड ने जिले में एक भी जगह ध्वनि मापक यंत्र नहीं लगाया है। साल में  एक बार केवल दीपावली के दिन पटाखे से होने वाले साउंड पाल्यूशन को मापा जाता है। कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में प्रावधान है कि तेज आवाज में यदि कोई व्यक्ति या संस्था संगीत या लाउड स्पीकर बजाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराया जा सकता है।

सुनने की क्षमता पर प्रभाव

यहां न तो इस अधिनियम को प्रशासन ने गंभीरता से लिया और न ही पुलिस ने इस ओर ध्यान दिया। पर्यावरण बोर्ड के अफसरों का कहना है कि यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करे। तेज आवाज से लोगों की सेहत पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रेशर हार्न से लेकर देर रात तक बजने वाले डीजे और गाडिय़ों की तेज हॉर्न से लोगों की सुनने की क्षमता पर असर पड़ रहा है। बावजूद हमारे शहर में अब तक उन एरिया को भी नहीं पहचाना गया है जो ध्वनि प्रदूषण के मामले में संवेदनशील माने जाते हैं।

यह है नियम

ध्वनि प्रदूषण अधिनियम के अनुसार दिन में 55 डेसीबल और रात  में 45 डेसीबल से ज्यादा का शोर न हो। बिना अनुमति के लाउड स्पीकर या ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग नहीं करना। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि विस्तार यंत्र के उपयोग पर प्रतिबंध। अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, अन्य शैक्षणिक संस्थान, न्यायालय, छात्रावास, सरकारी कार्यालय और बैंकों के नजदीक तेज आवाज वाले यंत्र का उपयोग करने से पहले अनुमति अनिवार्य।

जानिए तेज आवाज से क्या होती है परेशानी

तेज आवाज के माहौल से सामान्य माहौल में आने के बाद कान में तेज सिटी बजने जैसी आवाज। कुछ असामान्य आवाजें सुनाई देना। जैसे हल्की मोटर चलने की आवाज या लगातार माइक का साउंड। कान में दर्द या तेज आवाज सुनने के बाद बिल्कुल भी सुनाई न देना। पर्यावरण संरंक्षण बोर्ड दुर्ग मंडल के पास केवल एक ही डाइसमीटर है। इसका उपयोग केवल एक बार दीपावली की रात में होता है।

नियम का हो रहा उल्लंघन

वह भी ट्विनसिटी में चुनिंदा तीन जगहों पर। जबकि पूरे जिले में दीपावली की रात ध्वनि प्रदूषण की क्या स्थिति होती है वह किसी को नहीं पता। बोर्ड के साइंटिस्ट इस बात को स्वीकार करते हैं कि ्िटवनसिटी में गाडिय़ों की वजह से सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। सेक्टर-10 निवासी अंकित पाढ़ी ने 2014 में गणेशोत्सव के दौरान अपने घर के पास की समिति द्वारा लगातार कोलाहल नियंत्रण अधिनियम का उल्लघंन करते देख कलक्टर आर शंगीता से शिकायत थी। बीएसपी के नगर सेवा विभाग के महाप्रबंधक को भी पत्र लिखा था।

परेशानी का किया उल्लेख
इसके बाद थाने में बयान भी हुआ,लेकिन कार्रवाई कुछ भी नहीं हुई। पाढ़ी ने शिकायत में  लाउडस्पीकर, डीजे एवं जनरेटर और झूले से होने वाली तेज आवाज से लोगों को होने वाली परेशानी का उल्लेख किया किया था। ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. रतन तिवारी ने बताया कि लगातार तेज आवाज की वजह से कान के कॉकलिया के अंदर मौजूद हेयर सेल्स डेमेज हो जाते हैं। सामान्य फिक्वेंसी से ज्यादा आवाज में संगीत हो गाड़ी का हार्न या अन्य कोई चीज कान के लिए नुकसानदायक ही होती है।

हार्ट अटैक का खतरा
तेज आवाज की वजह से परमानेंट सेंसरी न्यूरल लॉस होता है और यह तब होता है जब कान के भीतर कॉकलिया के अंदर हेयर सेल्स डेमेज होने लगती है। तेज आवाज न सिर्फ कान के लिए बल्कि दिल के मरीजों के लिए खतरनाक है। तेज आवाज को सुनने से दिल की धड़कन भी बढ़ जाती है। खासकर ब्लड प्रेशर के मरीजों को ज्यादा परेशानी होती है। जिसके चलते उन्हें हार्ट अटैक का भी खतरा बना रहता है।

सीधी बात एसी मालू, क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावणर प्रदूषण नियंत्रण
सवाल -  जिल में ध्वनि प्रदूषण को मापने क्या इंतजाम है?
जवाब -  ध्वनि प्रदूषण को मापने अलग से कहीं भी मशीन नहीं लगी है।
सवाल - तो क्या जिले में ध्वनि प्रदूषण की जांच नहीं की जाती?
जवाब -  सिर्फ दीपावली के दिन जांच होती है उसके लिए डाइसोमीटर है विभाग के पास।
सवाल -  शहर में कोलाहल को लेकर कैसे मॉनिटरिंग होती है?
जवाब -  यह जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नगरीय प्रशासन की भी है। उन्हें इसकी मॉनिटरिंग करनी चाहिए। क्योंकि ज्यादातर मांगलिक भवनों में रात को बजने वाले संगीत और गाडिय़ों के प्रेशर हार्न से परेशानी होती है और उसके लिए जिला प्रशासन को प्रयास करना चाहिए।

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