
बुढ़ापे में सहारा बनाने नि:संतान बीएसपी कर्मी ने जिसे दत्तक पुत्र बनाया, उसे कोर्ट ने नहीं दी मान्यता
दुर्ग. सामाजिक रीति रिवाज से बीएसपी कर्मी नि:संतान दंपती ने जिसे बुढ़ापे की लाठी बनाने के लिए जिसे (दत्तक पुत्र के रूप में) गोद लिया उसे कोर्ट ने मान्यता नहीं दी। सबसे पहले संयंत्र प्रबंधन ने दत्तक पुत्र को कर्मचारी का उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया। इसके दंपती ने कोर्ट की शरण ली। वहां भी गोद लिए व्यक्ति को उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता देने से इनकार दिया।
नि:संतान दंपती ने सामाजिक रीति रिवाज से गोद लिया
बता दें कि नि:संतान दंपती ने न सिर्फ एक युवक को सामाजिक रीति रिवाज से गोद लिया बल्कि जिला रजिस्टार ऑफिस के यहां बकायदा पंजीयन भी कराया। बीएसपी प्रबंधन द्वारा सुनवाई नहीं करने पर खुर्सीपार भिलाई निवासी के गुरुमूर्ति ने न्यायालाय में परिवाद प्रस्तुत किया था। न्यायाधीश दीपक के गुप्ता ने परिवाद को यह कहते खारिज कर दिया कि दत्तक प्रक्रिया नियम विरुद्ध किया गया है।
कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक
न्यायाधीश ने फैसले में कहा है कि दत्तक ग्रहण के लिए सामाजिक रिवाज या कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। जिस व्यक्ति को गोद लेना है, उसकी आयु 15 वर्ष से कम होना आवश्यक है, लेकिन बीएसपी कर्मचारी ने 25 वर्ष के युवक को गोद लिया है। इसलिए परिवाद ग्राह्य योग्य नहीं है। न्यायाधीश ने परिवाद को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि परिवादी व अनावेदक अपना वाद व्यय भी स्वयं वहन करेंगे।
इसलिए किया परिवाद प्रस्तुत
के गुरुमूर्ति बीएसपी कर्मचारी है। उसने अपने नौकरी के दौरान मिलने वाले सभी लाभ व सुविधाओं के लिए पुत्र के रुप में जेजेश्वर राव (२६) वर्ष का नाम दस्तावेज में जुड़वाना चाहता है। गुरुमूर्ति ने इसके लिए बीएसपी प्रबंधन के समक्ष आवश्यक दस्तावेज के साथ आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन बीएसपी प्रबंधन ने आवेदन को अस्वीकार कर दिया। आवेदन प्रस्तुत करने के कुछ माह बाद गुरुमूर्ति ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी कि आखिर दस्तावेज पर उसके दत्तक पुत्र का नाम क्यो नहीं जोड़ा गया, लेकिन बीएसपी ने सूचना का अधिकार के तहत व्यक्तिगत जानकारी देने से इंकार कर दिया।
रिश्तेदार के पुत्र को लिया गोद
बीएसपी कर्मचारी मूलत: आंध्रप्रदेश के काकुलम जिले के रहने वाले है। विवाह के ३५ वर्ष तक संतान प्राप्त नहीं हुई। इसके बाद सामाजिक रीति रिवाज से अपने रिश्तेदार के बेटे को गोद ले लिया। इस दौरान सारी औपचारिकता सामाजिक पदाधिकारियों और परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में पूरी हुई। उन्होंने वंश परंपरा को कायम रखने के लिए रिश्तेदार के पुत्र को गोद लिया है।
पंजीयन का लाभ नहीं मिला
के. जेजेश्वर राव को गोद लेने के बाद के गुरुमूर्ति २७ अगस्त २०१४ को उप पंजीयक कार्यालय गया। जहां उसने गोदनामा का पंजीयन कराया। इसके बाद उसने चल अचल संपत्ति का उत्तराधिकारी उसे बनाया। बीएसपी कर्मचारी ने परिवाद प्रस्तुत करते समय पंजीयन संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किया था।
बीएसपी प्रबंधन का जवाब
न्यायालय में सुनवाई के दौरान बीएसपी प्रबंधन ने लिखित में तर्क प्रस्तुत किया। प्रबंधन का कहना है कि परिवादी भिलाई इस्पात सयंत्र के नगर सेवाएं विभाग में पदस्थ है। गोदनामा वयस्क होने के बाद लिया गया है। विधि विपरीत होने के कारण आवेदन पर किसी तरह का विचार नहीं किया गया।
Published on:
23 Aug 2018 12:39 am
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