2.38 करोड़ एफडीआर राजसात कर 1835 मकानों में बनाना था वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, एक ईंट तक नहीं रख पाए अफसर

नगर निगम में वाटर हार्वेस्टिंग का काम इस बार भी कागजों में रह गया। निगम प्रशासन ने भवन अनुज्ञा लेकर वाटर हार्वेस्टिंग नहीं बनाने वाले 1835 मकान मालिकों की एफडीआर की 2.38 करोड़ राजसात कर खुद सिस्टम बनाने का ऐलान किया था।

By: Hemant Kapoor

Published: 01 Jul 2019, 08:44 PM IST

दुर्ग. नगर निगम में वाटर हार्वेस्टिंग का काम इस बार भी कागजों में रह गया। निगम प्रशासन ने भवन अनुज्ञा लेकर वाटर हार्वेस्टिंग नहीं बनाने वाले 1835 मकान मालिकों की एफडीआर की 2.38 करोड़ राजसात कर खुद सिस्टम बनाने का ऐलान किया था, लेकिन अफसर निर्माण के नाम पर एक ईंट तक नहीं रख पाए।

 

यह है नियम
नए मकानों के निर्माण के साथ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बनाया जाना अनिवार्य है। इसके लिए मकान निर्माण के लिए भवन अनुज्ञा जारी करने के समय एफडीआर भी जमा कराई जाती है। मकान पूर्ण होने पर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जांच के बाद एफडीआर की राशि लौटा दी जाती है। निगम क्षेत्र के 1835 ने मकान तो बना लिया लेकिन हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनाया।

 

केवल 1600 ने बनवाए सिस्टम
हार्वेस्टिंग सिस्टम का नियम लागू होने के बाद 3471 लोगों को भवन अनुज्ञा जारी किया गया है। इनमें से 1600 लोगों ने मकानों में सिस्टम तैयार कर एफडीआर की राशि वापस ले ली है। शेष 1834 आवासों में निगम ने खुद सिस्टम बनाने का निर्णय किया था।

 

सर्वे तक नहीं कर पाए अफसर
निगम कमिश्नर सुनील अग्रहरि ने मई ऐसे आवासों को चिन्हित कर 15 जून तक वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार कराने के निर्देश दिए थे। इस बीच डेढ़ महीना बीत गया है, लेकिन निगम के अफसर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए टेंडर जारी करना तो दूर मकानों में जाकर सर्वे तक नहीं कर पाए।

 

होटलों-ढाबों की जांच भी नहीं
कमिश्नर सुनील अग्रहरि ने शहर के बड़े होटलों-ढाबों और बड़ी इमारत वाले प्रतिष्ठानों में भी हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य करते हुए अफसरों को जांच के निर्देश दिए थे। इसके लिए बकायदा अफसरों की टीम तक तैयार की गई थी, लेकिन अफसरों की जांच की कार्रवाई भी शुरू नहीं हुई।

 

पिछले साल भी नहीं हुआ काम
पिछले साल हर वार्ड में जलभराव वाले जगहों को चिन्हित कर कम से कम 50 हजार रुपए खर्च कर सिस्टम बनाने का ऐलान किया गया था। बाद में जगह नहीं मिलने की बात कहकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।

 

वाटर हार्वेस्टिंग की अनदेखी का खामियाजा
0 वाटर लेबल 250 से 300 फीट पहुंचा - जितना ग्राउंड वाटर रिचार्ज होता है, उसका औसत 81 से 82 प्रतिशत का हर साल दोहन कर लिया जाता है। जबकि भू-जल स्तर को बनाए रखने के लिए अधिकतम 70 फीसदी तक दोहन होना चाहिए। ग्राउंड वाटर रिचार्ज नहीं होने व ज्यादा दोहन के चलते वाटर लेबल तेजी से गिर रहा है।
हर साल गंभीर जल संकट
0 हर गर्मी में शहर को जल संकट का सामना करना पड़ता है। गाउंड वाटर लेबल गिरने से हर साल सैकड़ों हैंडपम्प व नलकूप दम तोड़ देते हैं और शहर जलाशयों के पानी पर निर्भर हो जाता है। अब दबाव बढऩे के कारण जलाशयों से भी पानी की भरपाई मुश्किल हो रहा है।

 

केवल निगम नहीं सबकी जिम्मेदारी
महापौर चंद्रिका चंद्राकर का कहना है कि वॉटर हॉर्वेस्टिंग जल संकट से निपटने में बेहद कारगर हो सकता है, लेकिन यह केवल निगम की नहीं सबकी जिम्मेदारी है। निगम प्रशासन द्वारा ग्राउंड वॉटर रिचार्ज करने के उपाय किए जा रहे हैं। लोगों को भी चाहिए कि वे हर निर्माण के साथ अनिवार्यरूप से वॉटर हॉर्वेस्टिंग सिस्टम बनाएं।

Hemant Kapoor Bureau Incharge
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