छत्तीसगढ़ की सरहद पर पहुंचा टिड्डी दल, चंद घंटों में कर देता है पूरी फसल चट, किसानों के लिए केंद्र ने जारी किया अलर्ट

राजस्थान और मध्यप्रदेश में महीनेभर फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद टिड्डी दल (लोकस्ट स्वार्म) अब प्रदेश से लगे राज्य महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश तक पहुंच गया है। (Tiddi dal attack in chhattisgarh)

By: Dakshi Sahu

Published: 27 May 2020, 02:12 PM IST

दुर्ग. राजस्थान और मध्यप्रदेश में महीनेभर फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद टिड्डी दल (लोकस्ट स्वार्म) अब प्रदेश से लगे राज्य महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश तक पहुंच गया है। सरहदी जिलों से इनके अब प्रदेश के साथ दुर्ग जिले में भी प्रवेश का खतरा है। इसे देखते हुए केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र ने जिले में अलर्ट जारी किया है। केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र के सहायक निर्देशक के हवाले से जिला प्रशासन द्वारा सीमावर्ती जिले के कृषि अधिकारीयों, कर्मचारियों और किसानों को सचेत रहने कहा है।

जानकारी के मुताबिक टिड्डी दल शाम 6 से रात 9 बजे तक खेतों में झुंड में रहते है। इनकी गति 80 से 150 किलोमीटर प्रतिदिन होती है। जिला प्रशासन के मुताबिक जिले में इनके नियंत्रण के लिए कृषि विभाग द्वारा तैयारी कर ली गई है। किसान डेजर्ट एरिया के लिए कीटनाशक मैलाथियोन, फेनवलरेट, क्विनालफोस और फसलों व अन्य वृक्षों के लिए क्लोरोपायरीफोस, डेल्टामेथ्रिन, डिफ्लूबेनजुरान, फिप्रोनिल, लेमडासाइहेलोथ्रिन कीटनाशक का प्रयोग कर सकते हैं।

झुंड में आक्रमक होती है टिड्डियां
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार टिड्डियों को उनके चमकीले पीले रंग और पिछले लंबे पैरों से पहचाना जा सकता है। टिड्डी जब अकेली होती हैं तो उतनी खतरनाक नही होती लेकिन झुंड में रहने पर इनका रवैया बेहद आक्रमक हो जाता है। टिड्डी दल करोड़ों की संख्या में होती है और फसलों को सफाया कर देती है।

3000 लोगों के बराबर खा जाती हैं भोजन
हैरत की बात यह है कि टिड्डियां खरीफ, रबी फसल एवं फलदार वृक्षों के फूल, फल, पत्ते, बीज, पेड़ की छाल और अंकुर सब कुछ खा जाती है। हर एक टिड्डी अपने वजन के बराबर खाना खाती है। इस तरह से एक टिड्डी दल, 2500 से 3000 लोगों का भोजन चट कर जाता है। टिड्डियों का जीवन काल 40 से 85 दिनों का होता है।

बचााव के लिए यह करें उपाय
फसल के अलावा, टिड्डी जहां इक_ा हो, वहां फ्लेमथ्रोअर (आग के गोले ) से जला दें, टिड्डी दल आकाश में 500 फूट पर उड़ान भरता है। टिड्डी नीचे भी उतरती है तो भगाने के लिए थालियां, ढोल, नगाड़े, लाउड स्पीकर या दूसरी चीजों के माध्यम से शोरगुल मचाएं।

टिड्डों के जिस स्थान पर अपने अंडे हों, वहां 25 किग्रा, 5 प्रतिशत मेलाथियान या 1.5 प्रतिशत क्वीनालफॉक्स को मिला कर प्रति हेक्टेयर छिड़कें।

टिड्डी दल को आगे बढऩे से रोकने के लिए 100 किग्रा की धान की भूसी को 0.5 किलोग्राम फेनीट्रोथीयोन और 5 किग्रा गुड़ के साथ मिलाकर खेत में डाल दें, टिड्डी दल के खेत में बैठने पर 5 प्रतिशत मेलाथियान या 1.5 प्रतिशत क्वीनालफॉक्स का छिड़काव करें।

कीट की रोकथाम के लिए 50 प्रतिशत ईसी फेनीट्रोथीयोन या मेलाथियान अथवा 20 प्रतिशत ईसी क्लोरपाइरिफोस 1 लीटर दवा को 800 से 1000 लीटर पानी में मिला कर प्रति हेक्टेयर के क्षेत्र में छिड़काव करें।

टिड्डी दल सवेरे 10 बजे के बाद ही अपना डेरा बदलता है। इसे आगे बढऩे से रोकने के लिए लिए 5 प्रतिशत मेलाथियोंन या 1.5 प्रतिशत क्वीनालफॉक्स घोलकर छिड़काव करें।

40 मिली लीटर नीम के तेल को कपड़े धोने के पाउडर के साथ या 20-40 मिली लीटर नीम से तैयार कीटनाशक को 10 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से टिड्डे फसलों को नहीं खा पाते। फसल कट जाने के बाद अंडों को खत्म करने खेत की गहरी जुताई करें।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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