scriptDelay in government procurement, farmers are selling paddy at a loss | सरकारी खरीदी में देरी से कोचियों की चांदी, घाटा उठाकर 1600 से 1800 रुपए क्विंटल में धान बेचने मजबूर किसान | Patrika News

सरकारी खरीदी में देरी से कोचियों की चांदी, घाटा उठाकर 1600 से 1800 रुपए क्विंटल में धान बेचने मजबूर किसान

त्योहारी सीजन और धान खरीदी में देरी से इन दिनों कोचियों की बन आई है। किसान त्योहारी खर्च व अन्य जरूरतों की पूर्ति के लिए खरीफ में कटाई कर धान को बेंच रहे हैं। कोचिए इसका बेजा फायदा उठा रहे हैं। मजबूरीवश किसानों को धान महज 1600 से 1800 रुपए प्रति क्विंटल के भाव बेचना पड़ रहा हैं। जिले में अब तक अरली वेरायटी की 5 से 8 फीसदी धान की कटाई हो चुकी है।

दुर्ग

Published: November 02, 2021 08:40:16 pm

दुर्ग. समर्थन मूल्य पर धान की सरकारी खरीदी पिछले साल की तरह इस बार भी एक दिसंबर से शुरू होगी। इस बीच जिले में धान की कटाई शुरू हो गई है। वहीं अब तक से 8 फीसदी धान की कटाई भी हो चुकी है। दूसरी ओर धान की कटाई में मशीनों का उपयोग बढ़ा है। इससे जिस तेजी से कटाई का काम चल रहा है इससे इस माह के आखिर तक अधिकतर किसानों के धान की कटाई व मिंजाई हो जाने की संभावना है। इस बीच जिनकी फसल कट गई वे समर्थन मूल्य पर 15 क्विंटल की बिक्री के लिए बचाकर शेष धान बेंच रहे हैं।
सरकारी खरीदी में देरी से कोचियों की चांदी, घाटा उठाकर 1600 से 1800 रुपए क्विंटल में धान बेचने मजबूर किसान
सरकारी खरीदी में देरी से कोचियों की चांदी, घाटा उठाकर 1600 से 1800 रुपए क्विंटल में धान बेचने मजबूर किसान

20 से 22 क्विंटल औसत पैदावार
जिले में इस बार तमाम विपरीत स्थितियों के बाद भी धान की बम्पर पैदावार की संभावना जताई जा रही है। अनुमान के मुताबिक करीब 20 से 22 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार हो रही है। जबकि सरकारी खरीद की लिमिट 15 क्विंटल प्रति एकड़ है। ऐसे में किसान 15 क्विंटल कोठियों में रखकर शेष धान बेंच रहे हैं।

सहेजकर रखना हो रहा मुश्किल
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था के बाद से अधिकतर किसान मिंजाई के बाद केवल खुद उपयोग के लिए धान बचाकर रखते हैं, शेष धान तत्काल खलिहान से खरीदी केंद्र ले जाकर बेंच देते हैं। ऐसे में अब अधिकतर किसानों के पास धान सहेजकर रखने की व्यवस्था नहीं रह गई है। वहीं इस बार धान की कटाई खरीदी से पहले हो रही है। ऐसे में धान की मिंजाई के बाद सहेजकर रखने में काफी परेशानी हो रही है।

सरकारी खरीदी में 28 दिन समय
दूसरी ओर सरकारी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में अभी भी २८ दिन शेष है। इस बीच नवंबर का पहला सप्ताह तीज-त्योहारों में निकल जाएगा। इसके बाद किसान सीधे खेतों का रूख करेंगे और धान की कटाई में तेजी आएगी। पहले पारम्परिक पध््यति से कटाई मिंजाई में समय लगता था, लेकिन अब उपकरणों के बहुतायत उपयोग से इस महीने के अंत यानि खरीदी शुरू होने से पहले कटाई-मिंजाई का काम पूरा हो जाने की संभावना है।

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