यहां घरों में नल खोलते ही निकलने लगते हैं कीड़े, ऐसा है स्वच्छ पेयजल का दावा

यहां के एलआईजी-एमआईजी के 6000 घरों में सप्लाई होने वाले पानी में कभी कीड़े तो कभी कृमि निकल रहे हैं।

दुर्ग . पद्मनाभपुर के 15000 लोगों के स्वास्थ्य से निगम कर रहा खिलवाड़। यहां के एलआईजी-एमआईजी के 6000 घरों में सप्लाई होने वाले पानी में कभी कीड़े तो कभी कृमि निकल रहे हैं। लगातार यहां से मिल रही शिकायत पर पत्रिका की टीम पद्मनाभपुर पहुंची, तो ये देखकर हम भी हैरान रह गए कि जैसा बोला जा रहा था, वैसा ही हुआ।

एमआईजी ११३ दीपक श्रीवास्तव के घर में तीन बड़े-बड़े कृमि जैसे जीव नल में पानी के साथ निकले। इसी तरह की अन्य शिकायतें रहवासियों ने बताई है। इसके बाद जब हम उस जगह पर पहुंच जहां से इन दोनों वार्डों में पानी की सफाई होती है। यहां गंदगी का आलम था, जिसकी वजह से लोगों के घरों में नल से आने वाले पानी मे कृमि जैसे
जीव के आने की वजह स्पष्ट हो रही थी।

गंदगी से अटे वॉल्व चैंबर
सम्पवेल और पानी टंकियों की सालों से नहीं हुई सफाई, गंदगी से अटे वॉल्व चैंबर इस बात का सबूत हैं। 40 साल पुरानी सीमेंट की पाइप लाइन से यहां 6000 घरों में पानी की सप्लाई की जा रही है। हालात यह थे कि पानी हाथ में लेने लायक भी नहीं था। पार्षद राजेश शर्मा के मुताबिक वार्डों में आए दिन गंदे पानी की शिकायत रहती है। इसकी जानकारी निगम के अधिकारियों के साथ कलक्टर तक कर चुके हैं। हर शिकायत के बाद निगम के कर्मचारी केवल पानी का सैंपल लेकर खानापूर्ति कर लेते हैं।

2015 में हुई थी सफाई
इस टंकी से पद्मनाभपुर पूर्व और पश्चिम वार्ड के करीब 15000 लोगों को पानी सप्लाई होती है। टंकी पर सफाई की तारीख आज भी वर्ष 2015 लिखी हुई है। जबकि हर 6 माह में सफाई होनी चाहिए। पहले फिल्टर प्लांट से पानी टंकियों के नीचे बने सम्पवेल में जमा किया जाता है। इन 4 सम्पवेलों के अलावा 10 चैंबर से पानी अलग-अलग दिशाओं में सप्लाई होता है।

यह पानी 40 साल पुरानी सीमेंट की पाइप लाइन से घरों में पहुंचता है। स्थानीय लोगों की मानें तो सम्पवेल की सफाई सालों से नहीं की गई है, जबकि टंकियों में वर्ष 2015 की तारीख लिखा है। करीब 40 साल पहले कॉलोनी के निर्माण के दौरान सीमेंट की पाइप लाइन बिछाई गई है। यह पाइप लाइन बेहद जर्जर हो चुकी है। हर दूसरे से तीसरे दिन पाइप लाइन फूट जाती है।

पिछले साल फैला था पीलिया
गंदे पानी की सप्लाई के कारण पिछले साल पद्मनाभपुर इलाके में पीलिया भी फैला था। यहां की एक महिला डॉक्टर भी पीलिया की चपेट में आ गई थीं। इसके बाद तात्कालिन कलक्टर आर. शंगीता भी स्थिति के निरीक्षण के लिए पहुंची थीं। कलक्टर ने जर्जर पाइप लाइन पर अफसरों को फटकार भी लगाई थी। इसके बाद प्रभावित घर के आसपास पाइप लाइन भी बदला गया, लेकिन शेष हिस्से को छोड़ दिया गया।

ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को दिया गया काम
इलाके में गंदे पानी की सप्लाई की मुख्य वजह पुरानी सीमेंट पाइप लाइन है। जर्जर होने के कारण पाइप अक्सर फूट जाती है। इसे बदलकर एक करोड़ की लागत से डीआई पाइप लाइन लगाया जाना है। इसके लिए 2015 से काम चल रहा है। एक साल का काम अब भी पूरा नहीं हुआ। खास बात यह है कि जिस ठेकेदार के पास काम है, उसे निगम ने ब्लेक लिस्टेड भी कर दिया है।

सीधी बात, राजेश पांडेय, प्रभारी अधिकारी
Q पद्मनाभपुर के घरों में पानी के साथ कृमि निकल रहे हैं, इससे लोगों के स्वास्थ्य को खतरा है?
A एमआईजी इलाके में इसकी शिकायत आई है। इसके बाद गड़बड़ी का पता लगाकर सुधार कार्य भी किया है।

Q यहां यह समस्या हमेशा रहने की जानकारी मिली है?
A शिकायत के बाद पानी का सैंपल भी लिया गया था। इसकी जांच भी कराई गई है। इसमें सब कुछ ठीक मिला है।
Q गड़बड़ी की वजह वर्षों पुरानी पाइप लाइन बताई जा रही है, इसमें सुधार में विलंब किया जा रहा है?
A पाइप लाइन चेंज की जाना है। ठेकेदार ने काम भी शुरू कर दिया है। जल्द काम पूरा कराने की कोशिश की जा रही है।

Show More
Dakshi Sahu Desk/Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned