दो साल में बदले चार कमिश्नर, लेकिन 10 कॉलोनाइजर की 30 एकड़ जमीन राजसात करने की कार्रवाई नहीं बढ़ी आगे

दुर्ग नगर निगम में बिना अनुमति कॉलोनी निर्माण के मामले में 10 कॉलोनाइजरों की करीब 30 एकड़ जमीन राजसात किया जाना है। इस बीच 2 साल में 4 कमिश्नर बदल गए हैं, लेकिन किसी ने भी इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया।

By: Dakshi Sahu

Published: 15 Jul 2020, 07:11 PM IST

दुर्ग. नगर निगम में बिना अनुमति कॉलोनी निर्माण के मामले में 10 कॉलोनाइजरों की करीब 30 एकड़ जमीन राजसात किया जाना है। इस बीच 2 साल में 4 कमिश्नर बदल गए हैं, लेकिन किसी ने भी इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। हालात यह है कि पिछले 3 साल से मामले में केवल नोटिस से काम चल रहा है।

निगम प्रशासन द्वारा वर्ष 2017 में अवैध प्लॉटिंग की शिकायतों पर जांच कराई गई थी। इसमें शहर के आउटर्स में बिना अनुमति व टाउन प्लानिंग के एप्रुवल के बिना प्लॉटों की खरीदी बिक्री व कॉलोनी विकसित करने का खुलासा हुआ था। इस पर इन कॉलोनाइजर्स को नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन कॉलोनाइजर्स द्वारा न तो जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और न ही ठोस जवाब दिया गया।

इसलिए किया जाना है अधिग्रहण
जमीन कारोबारियों द्वारा बिना अनुमति प्लाटिंग कर बिजली, पानी, सड़क आदि की व्यवस्था किए बिना आम लोगों को बेच दिया जाता है। यहां नगर निगम को सड़क बनाकर अन्य जरूरी सुविधाएं पहुंचानी पड़ती है। कॉलोनी विकसित होने के बाद सड़क की जमीन पर ठेकेदार दावा करते हैं। इससे निगम को नुकसान उठाना पड़ता है।

अधिग्रहण के लिए यह प्रावधान
बिना अनुमति व ले आउट प्लाटिंग अवैध माना जाता है। भूमि का अधिग्रहण व प्रबंधन अधिनियम की धारा 292 ग व 292 (च) में ऐसे जमीन का अधिग्रहित कर शासकीयकरण का प्रावधान है। इसी के तहत पहले कारोबारियों को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस का जवाब नहीं दिए जाने पर एसडीएम न्यायालय में परिवाद दायर जमीन अधिग्रहित किया जाएगा।

3 साल से चल रहा नोटिस से काम
जानकारी के मुताबिक जमीन अधिग्रहण के मामलों में अधिनियम के तहत कम से कम 3 बार सार्वजनिक नोटिस का प्रावधान है। इसी के तहत अब तक 2 बार सार्वजनिक नोटिस का प्रकाशन कराया जा चुका है, लेकिन इसमें ही निगम प्रशासन ने 3 साल का समय बीता दिया। सूत्रों की माने तो नोटिस की आड़ में मिलीभगत कर मामले को अटकाया जा रहा है।

कमिश्नर बदलते गए
वर्ष 2017 में तात्कालिन निगम कमिश्नर एसके सुंदरानी ने मामले की जांच करवाकर अधिग्रहण की नोटिस जारी किया था, लेकिन कार्रवाई पूरी होने से पहले जून 2018 को उनका तबादला हो गया। इसके बाद लोकेश्वर साहू कमिश्नर बनाए गए, लेकिन उन्होंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। कमिश्नर सुनील अग्रहरि ने दूसरी बार नोटिस जारी किया था। इस बीच उनका भी तबादला हो गया। मौजूदा कमिश्नर इंद्रजीत बर्मन भी इस पर ध्यान नहीं दे रहे।

आपत्ति के बाद डाल दिया ठंडे बस्ते में
निगम सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पूर्व कमिश्नर सुनील अग्रहरि की नोटिस के बाद कुल जमीन के अधिग्रहण के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। इन आपत्तियों की पड़ताल कर कार्रवाई आगे बढ़ाया जाना था, लेकिन अफसरों ने इन आपत्तियों की आड़ में मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अब अफसर प्रकरणों पर अनिभिज्ञता जा रहे हैं।

इन कॉलोनाइजर्स की जमीन अधिग्रहण का है प्रस्ताव
0 गुरुप्रीत लूथरा कर्मचारी नगर - खसरा नंबर 1/300 व 3/474 रकबा 0.151 हेक्टेयर।
0 जर्नादन तिवारी, उमाकान्त तिवारी कातुलबोर्ड - खसरा नंबर 16/12, रकबा 0.559 हेक्टेयर।
0 कृष्णानंद कबरवाल शांतिनगर - खसरा नंबर 16/38 रकबा 0.081 हेक्टेयर।
0 देवकी साहू बोरसी - खसरा नंबर 246/03 व 240, रकबा अस्पष्ट।
0 रणछोर भाई पटेल, नवीन कुमार पटेल स्टेशन चौक - खसरा नंबर 34/7 एवं 35/1 रकबा 0.148 हेक्टेयर।
0 तरुण कुमार गोलछा हास्पीटल वार्ड कोंडागांव - खसरा नंबर 101/3 रकबा अस्पष्ट।
0 सोनसाय मंडले, कृष्णा मंडले बोरसी - खसरा 394/17, 394/4 व 381/16 रकबा 1.275 हेक्टेयर।
0 जानकी बाई कतमल मोहन नगर - खसरा नंबर 1319/3 व 1329/4 रकबा 0.222 हेक्टेयर।
0 मनोहर लाल बजाज लाखे नगर रायपुर - खसरा नंबर 63/8, 65/9, 63/9, 65/10, 63/10, 65/11, 63/15, एवं 65/16 रकबा 0.06 हेक्टेयर।
0 सरला देवी स्वर्णकार - खसरा नंबर 242/2 रकबा 0.170 हेक्टेयर।

मामले की मुझे जानकारी नहीं हैं। अफसर भी फिलहाल इस विषय पर जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। मैं खुद एक दो दिनों में इस मामले की जानकारी लूंगा तब कुछ बता पाउंगा। यदि ऐसा है तो नियमानुसार कार्रवाई को आगे बढ़ाई जाएगी।
धीरज बाकलीवाल
महापौर दुर्ग।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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