निगम के अधिकारियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर किया 40 लाख का घोटाला, बात खुली तो फाइलें कर दी गायब, दर्ज होगा FIR

नगर निगम में लोकसभा चुनाव और जागरूकता संबंधी फ्लेक्स लगाने की आड़ में लाखों का घोटाले और इसके बाद मामला दबाने फाइलें गायब कर देने का मामला सामने आया है।

By: Dakshi Sahu

Published: 14 Jun 2020, 06:09 PM IST

दुर्ग. नगर निगम में लोकसभा चुनाव और जागरूकता संबंधी फ्लेक्स लगाने की आड़ में लाखों का घोटाले और इसके बाद मामला दबाने फाइलें गायब कर देने का मामला सामने आया है। निगम के जिम्मेदार अफसरों ने ठेकेदारों से मिलीभगत कर फर्जी फ्लेक्स और बोगस बिल के सहारे पहले करीब 40 लाख उड़ा लिए। इसके बाद मामला खुला तो बोगस बिल के साथ कई फाइलें गायब कर दी। मामले की जांच में गड़बड़ी और फाइलें गायब करने की पुष्टि भी हो चुकी है। निगम अब मामले में ठेकेदार के साथ संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर घोटाले और फाइलें गायब करने के मामलों में दो अलग-अलग एफआईआर की तैयारी कर रहा है।

मामला पिछले साल की शुरूआत में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान की है। शासन के निर्देश के मुताबिक चुनाव के दौरान नगर निगम द्वारा मतदान और मतदाता जागरूकता से जुड़े फ्लेक्स लगाए गए थे। चुनाव के बाद पर्यावरण जागरूकता का अभियान चलाया गया। इस दौरान भी जागरूकता से संबंधित फ्लेक्स लगाए गए। इस दौरान निगम के पूर्व सभापति राजकुमार नारायणी ने शिकायत दर्ज कराई थी। जिस पर जांच में लाखों के घोटाले का खुलासा हुआ। जांच में बोगस बिल का भी खुलासा हुआ। इसके लिए निगम प्रशासन ने संबंधित ठेकेदार से डाक्यूमेंट मंगाए थे। इस बीच बोगस बिल से संबंधित फाइल ही गायब कर दी गई।

यह है मामला
नगर निगम द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान के लिए और इसके बाद पर्यावरण संरक्षण को लेकर जाकरूकता संबंधी फ्लेक्स लगाए गए थे। तात्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा गिनती के फ्लेक्स लगाकर कई गुना ज्यादा फ्लेक्स के बिल आहरित कर लिया गया। इतना ही नहीं प्रिंटिंग के लिए बाजार में प्रचलित कास्ट से 4 से 5 गुना ज्यादा राशि बिल बनाकर राशि आहरित कर लिया गया। इस तरह 40 लाख से ज्यादा का चूना निगम को लगाया गया।

10 रुपए की जगह 40 रुपए में प्रिंटिंग
जांच में फ्लेक्स प्रिंटिंग के बिल में भी बड़ी गड़बड़ी पाई गई। जिस समय फ्लैक्स बनाना बताया गया था उस समय बाजार में औसत 10 रुपए प्रति वर्ग फीट की दर पर फ्लैक्स की प्रिंटिंग हो रही थी, लेकिन निगम में जमा कराए गए बिल में 40 रुपए प्रति वर्ग फीट की दर से प्रिंटिंग कराया जाना बताया गया। मामले की आरंभिक जांच में कई गड़बडिय़ां सामने आई थी। जानकारी के मुताबिक जिन प्रिंटर्स के नाम के बिल जमा कराए गए थे, उनके पास फ्लेक्स प्रिंटिंग की मशीन ही नहीं थी। ऐसे में माना यह जा रहा था कि जिम्मेदारों ने फ्लेक्स प्रिंट कराया ही नहीं और प्रिंटिंग का फर्जी बिल लगाकर राशि निकाल लिया।

निगम से मिली जानकारी के मुताबिक मामले में घोटाले के साथ बोगस बिल के लिए अलग से जांच की जा रही थी। इसके लिए अलग फाइलें बनाई गई थी। यह फाइल पवन नामक किसी कर्मचारी के माध्यम से धोखे से मंगाकर गायब कर दिया गया। निगम कमिश्नर के मुताबिक कर्मचारी ने फाइल शिव शर्मा द्वारा मंगाए जाने की जानकारी दी है। इस पर शर्मा को दो दिन की मोहलत देकर फाइल जमा कराने कहा गया था।

राजकुमार नारायणी पार्षद व पूर्व सभापति ननि दुर्ग ने बताया कि सरकारी आदेश की आड़ में करीब 40 लाख का घोटाला किया गया है। मामले में सभी संबंधितों के खिलाफ एफआईआर किया जाना चाहिए। मामला प्रमाणित होने के बाद भी कार्रवाई में जानबूझकर देरी की जा रही है। इंद्रजीत बर्मन कमिश्नर ननि दुर्ग ने बताया कि जांच में गड़बड़ी मिली है। इससे संबंधित दस्तावेज हमारे पास है। इसी मामले में बोगस बिल से संबंधित फाइल भी तैयार की गई थी। उसने दो दिन की मोहलत लेकर अब तक फाइल जमा नहीं कराई है। दोनों मामलों में जल्द अलग-अलग कार्रवाई की जाएगी।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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