80 के दशक में शुरू हुए इस विशेष थाने में दर्ज सभी केस जांच में निकले झूठे

जातिगत प्रकरणों के निराकरण के लिए अलग से विशेष थाना बनाया गया है। जहां शिकायत पत्र की जांच के बाद कार्रवाई की जाती है। 

दुर्ग.जातिगत प्रकरणों के निराकरण के लिए अलग से विशेष थाना बनाया गया है। जहां शिकायत पत्र की जांच के बाद कार्रवाई की जाती है। दुर्ग जिले के विशेष थाना में वर्ष 2016 में अब तक एफआईआर का खाता ही नहीं खुला। ऐसा नहीं कि यहां शिकायत ही नही आई। खास बात यह है कि जांच में आए 28 आवेदन झूठा पाया गया। जातिगत गाली गलौज, जमीन विवाद, छेडख़ानी और दुष्कर्म जैसे गंभीर प्रकरणों के लिए जिला मुख्यालयों में विशेष थाना की स्थापना की गई है।

28 शिकायतें दर्ज हुई 
यह थाना 80 के दशक से शुरु है। खास बात यह है कि विशेष थाना में जाति विशेष लोगों ही शिकायत करते हैं। चालू वर्ष में इस थाना में  28 शिकायते आई। जब जांच हुई तो खुलासा हुआ कि सभी शिकायतें आपसी द्वेष के कारण की गई है। विवाद होने पर जाति विशेष का फायदा लेने वे शिकायत किए थे। शिकायत जांच में झूठा होने पर विशेष थाना के विवेचना अधिकारियों ने आवेदक और अनावेदक का बयान दर्ज करने के बाद शिकायत का खात्मा कर दिया।

पिछले वर्ष दो एफआईआर
अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष भी लगभग इतनी ही शिकायते आई थी। जांच में दो शिकायत सही पाई गई। दोनों शिकायत पर अपराध दर्ज कर प्रकरण का चालान संबंधित न्यायालय में प्रस्तुत किया था। खास बात यह है कि विशेष प्रकरणों की सुनवाई के लिए जिला न्यायालय में पृथक से विशेष न्यायालय की स्थापना की गई है। जिले के एकमात्र विशेष थाना में इस साल अब तक एक भी प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है।

विशेष धारा के तहत जिले में 14 प्रकरण
अन्य  9 थाना में विशेष एक्ट के तहत 14 प्रकरण दर्ज किया गया है। इसमें सुपेला थाना में हेल्थ प्रोडक्ट का कारोबार करने वाली युवती से गैंग रेंप का मामला भी शामिल है। डीएसपी विशेष थाना रविन्द्र उपध्याय ने बताया कि हमारे यहा जितने भी सीसी(शिकायत पत्र) आती है उसकी जांच सक्षम अधिकारी से कराया जाता है। गवाहों और आवेदक, अनावेदक का बयान दर्ज किया जाता है। आम तौर पर इस साल की अब तक की  शिकायते फर्जी निकली। आवेदन को नस्ती किया जा चुका है।

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Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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