निलंबित IPS मुकेश गुप्ता को गलत तरीके से जमीन आवंटन करने वाले आरोपी सब-इंजीनियर को कोर्ट से मिली जमानत

निलंबित IPS मुकेश गुप्ता को गलत तरीके से जमीन आवंटन करने वाले आरोपी सब-इंजीनियर को कोर्ट से मिली जमानत
निलंबित IPS मुकेश गुप्ता को गलत तरीके से जमीन आवंटन करने वाला आरोपी सब-इंजीनियर को कोर्ट से मिली जमानत,निलंबित IPS मुकेश गुप्ता को गलत तरीके से जमीन आवंटन करने वाला आरोपी सब-इंजीनियर को कोर्ट से मिली जमानत,निलंबित IPS मुकेश गुप्ता को गलत तरीके से जमीन आवंटन करने वाला आरोपी सब-इंजीनियर को कोर्ट से मिली जमानत

Dakshi Sahu | Updated: 14 Sep 2019, 04:13:10 PM (IST) Durg, Durg, Chhattisgarh, India

निलंबित आइपीएस मुकेश गुप्ता को गलत तरीके से जमीन आवंटन के मामले में आरोपी नगर निगम दुर्ग के सब इंजीनियर आरके जैन को 40 दिन बाद न्यायालय से जमानत मिल गई।

दुर्ग. निलंबित आइपीएस मुकेश गुप्ता(IPS Mukesh Gupta) को गलत तरीके से जमीन आवंटन (SADA Land scam) के मामले में आरोपी नगर निगम दुर्ग के सब इंजीनियर आरके जैन को 40 दिन बाद न्यायालय से जमानत मिल गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Durg District court) जीके मिश्रा ने 25 हजार के बंध पत्र प्रस्तुत करने पर रिहाई का आदेश जारी किया। यह मामला साडा कार्यकाल का है। तब जैन साडा में संपदा अधिकारी थे। इसके पहले भी जैन ने अपने अधिवक्ता राजकुमार तिवारी के जरिए जमानत के लिए आवेदन पेश किया था। जिसे बाद में वापस ले लिया था। उसके बाद जमानत के लिए दूसरा आवेदन पेश किया गया। जिसमें जैन को दुर्भावनापूर्वक गिरफ्तार करने की बात कहते हुए बताया गया कि मामले के अन्य आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है।

आरोपी को रिहा करने के लिए दिया आदेश
न्यायालय से जमानत आवेदन मंजूर कर आरोपी को रिहा करने का आदेश देने का आग्रह किया गया था। जमानत आवेदन में जैन के स्वास्थ्यगत परेशानियों का भी जिक्र किया गया था कि सब इंजीनियर की रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन हुआ है। साथ ही एक बार और ऑपरेशन होना है। वह अवसाद से ग्रस्त है। उनका 2004 से इलाज चल रहा है। वह न्यूरो और चर्मरोग का भी मरीज है। लंबे समय तक अगर वे जेल में रहेंगे तो मानसिक स्थिति पर बुरा असर होगा।

निलंबित IPS मुकेश गुप्ता को गलत तरीके से जमीन आवंटन करने वाला आरोपी सब-इंजीनियर को कोर्ट से मिली जमानत

जैन पर आरोप
सुपेला पुलिस ने कोर्ट में बताया कि आरोपी आरके जैन साडा कार्यकाल में संपदा अधिकारी थे। फाइल का अवलोकन किया बिना दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर फाइल को सीईओ की ओर अग्रेसित कर दिया। सीईओ ने नोटशीट में साइन कर जमीन को तत्कालीन एसपी मुकेश गुप्ता को आवंटित करने की मंजूरी दे दी।

जमीन आवंटन के इस मामले में दर्ज है अपराध
साडा को सरकार ने 8 जून 1998 को भंग कर दिया और नगर पालिक निगम बनाने की घोषणा कर दी। तब मुकेश गुप्ता दुर्ग के एसपी होने के नाते साडा के पदेन सदस्य थे। सदस्य होने के नाते उन्हें जमीन आवंटन हुई थी। गुप्ता ने तब जमीन की कीतम साडा के खाते में जमा नहीं की थी। बाद में अफसरों ने साडा के नाम से 75536 रुपए का चेक ले लिया और चेक को लेखा परीक्षा विभाग में भेज दिया गया। राशि स्थानंतरित भी नहीं हुई थी कि 11 जून 1998 को अधिकारियों ने मिली भगत कर 6650 रुपए में पट्टा जारी कर दिया।

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