scriptFarmers not ready for another crop instead of paddy | Durg News - सरकारी प्रोत्साहन नहीं आ रहा रास, धान की जगह दूसरी फसल के लिए तैयार नहीं किसान, बढ़ गए बेचने वाले | Patrika News

Durg News - सरकारी प्रोत्साहन नहीं आ रहा रास, धान की जगह दूसरी फसल के लिए तैयार नहीं किसान, बढ़ गए बेचने वाले

सरकार धान की जगह दीगर लाभकारी फसलों की खेती पर जोर दे रही है। इसके लिए 10 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन का भी ऐलान किया गया है। इसके बाद भी जिले के किसान दीगर फसलों पर रूचि नहीं ले रहे हैं। इस बार पिछले साल की तुलना में 3151 ज्यादा किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है। वहीं पिछली बार की तुलना में इस बार पंजीकृत रकबा भी 6265 हेक्टेयर बढ़ गया है।

दुर्ग

Updated: November 15, 2021 11:04:54 am

दुर्ग. खरीफ सीजन के धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए किसानों की पंजीयन समाप्त हो गया है। खाद्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले के 1 लाख 25 हजार किसान परिवारों में से 98 हजार 349 ने इस बार धान बिक्री के लिए पंजीयन कराया है। जबकि रकबा 1 लाख 5 हजार से बढ़कर 1 लाख 11 हजार 265.94 हेक्टेयर हो गया है। माना जा रहा है कि कोरोना के कारण रोजी-मजदूरी छीन जाने और समर्थन मूल्य पर एकमुश्त बढ़ोतरी से प्रोत्साहित किसानों ने अब छोटे रकबे के भी खेती शुरू कर दी है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की शुरूआत एक दिसंबर से होगी।
Durg News - सरकारी प्रोत्साहन नहीं आ रहा रास, धान की जगह दूसरी फसल के लिए तैयार नहीं किसान, बढ़ गए बेचने वाले
धान की जगह दूसरी फसल के लिए तैयार नहीं किसान

इसलिए बढ़ा किसानों का पंजीयन
0 2500 रुपए सरकारी समर्थन मूल्य - सरकार ने समर्थन मूल्य में एकमुश्त बढ़ोतरी करते हुए 2500 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है। खुले बाजार में यह कीमत मिलना संभव नहीं है। अन्य प्रदेशों में भी कीमत 1500 से 1700 के बीच है। लिहाजा पंजीयन के साथ धान का रकबा भी बढ़ रहा है। इसके अलावा पंजीयन कराने वाले शत-प्रतिशत किसान धान की बिक्री कर रहे हैं।
0 छोटे रकबों में भी धान की खेती - इससे पहले समर्थन मूल्य कम होने से किसानों को लागत मूल्य निकाल पाना मुश्किल होता था। अब खेती से किसानों को लाभ की स्थिति बन रही है, लिहाजा किसानों का रूझान भी खेती की ओर बढ़ रहा है और पूर्व तक पंजीयन नहीं कराने वाले छोटे रकबे के किसान भी धान की पैदावार लेकर बिक्री कर रहे हैं।
0 प्रवासी भी लौट रहे खेती की ओर - कोरोना संकट के बाद रोजी-मजदूरी के लिए दीगर प्रदेशों में जाने वाले प्रवासी भी बड़ी संख्या में लौटे हैं। ये अब खेती से जुड़ गए हैं। खेती में पर्याप्त समर्थन मूल्य मिलने से अब ऐसे श्रमिक खेती सीजन में लौट आते हैं और खेती के बाद मजदूरी के लिए दूसरे प्रदेश चले जाते हैं। ऐसे लोगों के कारण भी खेती करने वालों की संख्या बढ़ी है।

इसलिए प्रोत्साहन की योजना
समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के बाद धान की खेती की ओर तेजी से रूझान बढ़ा है। अधिकतर किसान ज्यादा लाभ के फेर में अधिक पैदावार वाले धान ले रहे हैं। दूसरी ओर पैदावार के अनुरूप प्रदेश में चावल खपत नहीं हो रहा। ऐसे में सरकार अन्य प्रदेशों व विदेशों में डिमांड व ज्यादा कीमत वाले सुगंधित धान अथवा लाभकारी फसलों की ओर किसानों को डायवर्ट करना चाह रही है।

प्रोत्साहन पर इसलिए नहीं रूचि
सरकार का मानना है कि दीगर फसलों की ओर किसानों के डायवर्ट होने से सरकार पर खरीदी का बोझ कम होगा वहीं बाजार से सीधे किसानों को अच्छी कीमत मिल सकेगी। दूसरी ओर किसानों का मानना है कि दीगर फसलों के लिए पर्याप्त बाजार नहीं है। वहीं पौधरोपण की स्थिति में कटाई और बिक्री को लेकर अनुमति का सख्त प्रावधान भी किसानों की अरूचि का कारण बन रहा है।

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