scriptfarmers will suffer 51 crore loss due to delay in paddy procurement | CG Agriculture - समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में देरी से किसानों को 51 करोड़ रुपए का नुकसान | Patrika News

CG Agriculture - समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में देरी से किसानों को 51 करोड़ रुपए का नुकसान

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में देरी से जिले के किसानों को 51 करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ सकता है। दरअसल 25 से 30 फीसदी धान की कटाई व मिंजाई हो चुकी है। वहीं खरीदी शुरू होने में अभी भी 12 दिन का समय है। इस बीच किसानों को धान खलिहानों में रखना पड़ेगा। इससे कम से कम 4 से 5 फीसदी सूखत की संभावना है। इसके साथ ही रखरखाव में अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।

दुर्ग

Updated: November 18, 2021 10:27:52 pm

दुर्ग. समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी एक दिसंबर से शुरू होगी। इसमें अभी 12 दिन का समय शेष है। इधऱ अनुकूल स्थिति के कारण इस बार धान की कटाई पहले ही शुरू हो गई है। इस बीच खलिहानों में धान सहेजकर रखना बड़ी चुनौती होगी। पखवाड़ेभर खुले आसमान के नीचे खलिहानों में धूप में भंडारित रहने के कारण धान में सूखत के कारण 4 से 5 फीसदी वजन कम होगा। वहीं खलिहानों में संग्रहण, मजदूरी, रखरखाव व सुरक्षा सहित अन्य जरूरतों में भी किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।
CG Agriculture - समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में देरी से किसानों को होगा 51 करोड़ नुकसान
धान खरीदी में देरी से किसानों को 51 करोड़ नुकसान होगा

नमी घटने से कम होगा वजन
समर्थन मूल्य पर खरीदी में 18 फीसदी नमीयुक्त धान स्वीकार किया जाता है। इतनी नमी सामान्य स्थिति में धान की कटाई व मिंजाई के वक्त होता है। जानकारों की मानें तो 15 से 20 दिन धूप में खुले आसमान के नीचे रखने पर धान में नमी केवल 10 से 12 फीसदी रह जाएगी। इस तरह 4 से 6 फीसदी वजन का नुकसान होगा।

41.22 लाख क्विंटल खरीदी
जिले में इस बार 98 हजार 349 किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है। इन किसानों का पंजीकृत रकबा 1 लाख 11 हजार 265.94 हेक्टेयर यानि 2 लाख 74 हजार 826.87 एकड़ है। इस बार भी प्रति एकड़ 15 क्विंटल धान की खरीदी की जाएगी। इस तरह 41 लाख 22 हजार क्विंटल से अधिक धान खरीदी का अनुमान है।

41 करोड़ से ज्यादा का सूखत
औसत 4 फीसदी सूखत मानें तो इस बीच 1लाख 64 हजार 896 क्विंटल धान का वजन कम हो जाएगा। धान खरीदी के लिए प्रोत्साहन राशि के मिलाकर 2500 रुपए प्रति क्विंटल का दर तय है। इस हिसाब से गणना करें तो इसकी कीमत 41 करोड़ 22 लाख रुपए होगी। यह नुकसान केवल सूखत से होगी।

रखरखाव में जाएंगे 10 करोड़
धान बेचने से पहले किसानों को धान खलिहानों में सहेजकर रखना होगा। इसमें सूखत के साथ लेबर, सुरक्षित रखने, चूहे व दीमक के कारण क्षति जैसे कारणों के कारण भी नुकसान उठाना पड़ेगा। खलिहानों अथवा घरों में धान के रखरखाव में किसानों को करीब 10 करोड़ रुपए अतिरिक्त व्यय करना पड़ेगा।

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