scriptHerbal Gulal of the durg will spread color in Kashi, UP | इस होली यूपी के काशी से इंडोनेशिया के बाली तक बिखेरेगा प्रेम और भाईचारे का रंग दुर्ग का हर्बल गुलाल | Patrika News

इस होली यूपी के काशी से इंडोनेशिया के बाली तक बिखेरेगा प्रेम और भाईचारे का रंग दुर्ग का हर्बल गुलाल

इस होली सांकरा की स्व-सहायता समूह की महिलाओं का निर्मित गुलाल यूपी के काशी से इंडोनेशिया के बाली तक रंग बिखेरेगा। यहां कुमकुम स्व-सहायता समूह की 60 दीदियां गुलाल तैयार करने में लगी हैं। सांकरा की महिलाओं को एक ग्लोबल फर्म से जोड़ा गया है। कंपनी ही गुलाल के साथ अष्टगंध के लिए सामग्री प्रदान देती है और मार्केटिंग व डिस्ट्रीब्यूशन का कार्य कंपनी करती है। महिलाओं को हर दिन 200 रुपए मानदेय के अलावा प्राफिट शेयरिंग मिलता है।

दुर्ग

Published: March 14, 2022 10:44:18 pm

कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने बताया कि सांकरा स्व-सहायता समूह में ऐसी गतिविधियों को जगह दी जा रही है, जहां बड़े पैमाने पर स्थायी रोजगार की संभावना बने। जिस फर्म को यहां काम सौंपा गया है वह ग्लोबल फर्म है और दुनिया भर के देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करती है। मशीन भी कंपनी ने लगाई है। उन्होंने बताया कि इधर के वर्षों में हर्बल गुलाल की माँग भी तेजी से बढ़ी है। यह खुशी की बात है कि हमारे समूह की महिलाएं इस दिशा में बढ़ी हैं और तेजी से काम कर रही हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला पंचायत सीईओ अश्विनी देवांगन ने बताया कि अष्टगंध का उपयोग दक्षिण भारत, ओडिशा और काशी में काफी होता है। इसके अलावा धार्मिक स्थलों में काफी मात्रा में इसका उपयोग होता है।
इस होली यूपी के काशी से इंडोनेशिया के बाली तक बिखेरेगा प्रेम और भाईचारे का रंग दुर्ग का हर्बल गुलाल
सांकरा में स्व-सहायता समूह की 60 महिलाएं कर रही गुलाल के साथ अष्टगंध निर्माण

मंदिरों के फूलों से गुलाल निर्माण
पाटन जनपद सीईओ मनीष साहू ने बताया कि गुलाल के प्रोडक्शन के लिए मंदिरों से फूलों को चुना गया है। चार जगहों में यह कार्य हो रहा है। मोहलई, कोनारी, सेलूद और नंदौरी में इसके लिए फूलों को सूखाया जा रहा है। सांकरा में इसकी प्रोसेसिंग होगी। उल्लेखनीय है कि कौही, ठकुराइनटोला जैसे मंदिरों में बड़े पैमाने पर फूल चढ़ाये जाते हैं। इन सभी का अच्छा उपयोग हर्बल गुलाल के लिए हो रहा है।

अष्टगंध की डिमांड दुनियाभर में
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि अष्टगंध की लोकप्रियता दुनिया भर में है। दक्षिण में लोग त्रिपुंड लगाते हैं। दक्षिण पूर्वी एशिया में बाली जैसे द्वीपों तक हमारा प्रोडक्ट बिकता है क्योंकि यहां के मूल निवासी भी हिंदू धर्मावलंबी हैं और बड़े पैमाने पर भारतीय समुदाय के लोग इन देशों में बसे हैं। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि अष्टगंध का उपयोग विदेशों के मंदिरों में भी होता है।

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