IHSDP आवास के आवंटन में एक और गड़बड़ी, किस्तों का नहीं निगम के पास हिसाब, RTI में खुलासा

IHSDP आवास के आवंटन में एक और गड़बड़ी, किस्तों का नहीं निगम के पास हिसाब, RTI में खुलासा

Naresh Verma | Publish: Jul, 14 2018 12:53:13 AM (IST) Durg, Chhattisgarh, India

खास बात यह है कि इन आवासों का आवंटन जनवरी 2010 से जनवरी 2016 के बीच कई चरणों में किया गया है।

दुर्ग. उरला के आइएचएसडीपी आवासों के आवंटन में एक और गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। कॉलोनी में 1638 आवास बनाकर लोगों को आवंटित किया गया है। इसके लिए आवंटियों के प्रीमियम के साथ हर माह किस्त भी वसूली जा रही है, लेकिन निगम के पास प्रीमियम की पहली किस्त के अलावा कोई भी हिसाब नहीं है।

खास बात यह है कि इन आवासों का आवंटन जनवरी 2010 से जनवरी 2016 के बीच कई चरणों में किया गया है। झोपड़ी मुक्त शहर की परिकल्पना को साकार करने के मकसद से नगर निगम द्वारा निचली बस्तियों से बेदखल और आवासहीन परिवारों के लिए उरला में आइएचएसडीपी योजना के तहत ये आवास बनाए गए हैं।

वर्ष 2007-08 में 16 करोड़ की लागत से यह कॉलोनी बनाया गया था। कॉलोनी में 18 मकानों वाले 91 ब्लॉक बनाए गए हैं। इनमें कुल 16 38 आवास हैं। निगम प्रशासन द्वारा इन आवासों को कई चरणों में आवेदन के आधार पर हितग्राहियों को आवंटित किया गया है।

8 साल बाद भी प्रीमियम का पहला किस्त

2 लाख कीमत के इन मकानों को गरीबों को केवल 38 हजार में उपलब्ध कराना था। इसके लिए 2 से 5 हजार रुपए प्रीमियम तय किया गया था। प्रीमियम के बाद शेष राशि 8 00 रुपए प्रति माह के हिसाब से हितग्राहियों द्वारा जमा कराया जाना था, लेकिन निगम के पास फिलहाल केवल 128 0 हितग्राहियों के पहले किस्त का हिसाब है।

अब भी हो रही हितग्राहियों से हर माह वसूली

निगम के सूत्रों की माने तो हितग्राहियों से बकायदा अब भी हर माह 800 रुपए की वसूली की जा रही है, लेकिन इसका कोई भी हिसाब नगर निगम के पास नहीं है। जानकारी के अनुसार कई हितग्राहियों की राशि प्रीमियम से ज्यादा हो चुका है, इसके बाद भी वसूली जारी है।

सूचना का अधिकार में सामने आया सच

आवासों के प्रीमियम की राशि का हिसाब नहीं होने का खुलासा सूचना का अधिकार में हुआ है। आरटीआई एक्टिविस्ट ज्वाला अग्रवाल ने इसकी जानकारी मांगी थी। इस पर जो जानकारी उपलब्ध कराई गई है, उसके मुताबिक निगम के पास आवासों का डिमांड रजिस्टर (लेन-देन का हिसाब) ही नहीं है। केवल 1280 हितग्राहियों का आवंटन के समय जमा कराए गए प्रीमियम की पहली किस्त की जानकारी है।

केवल दो का ही पूरा हिसाब

सूचना का अधिकार के तहत दिए गए दस्तावेज के मुताबिक वर्ष 2010 से 2014 के बीच 406 , नवंबर 2014 से जनवरी 2015 तक 374 और नवंबर 2015 से जनवरी 2016 के बीच 500 आवास का आवंटन किया गया। इनमें से केवल दो हितग्राही सुलोचना निर्मलकर और कौशिक चौहान के ही प्रीमियम की पूरी राशि 38 हजार 6 37 का हिसाब निगम के पास है।

वसूली की कार्रवाई की जाएगी

इस संबंध में निगम के राजस्व अधिकारी आरएस आजमानी का कहना है कि आइएचएसडीपी आवासों में प्रीमियम का हिसाब नहीं है अभी ऐसा कहना ठीक नहीं है। डिमांड इंचार्ज सतीश मिश्रा और मंदाकिनी को 3 से 4 बार नोटिस जारी किया गया है, लेकिन उनके द्वारा डिमांड रजिस्टर जमा नहीं कराया गया है।

इसलिए निगम के पास फिलहाल हिसाब नहीं हैं। दोनों को नोटिस जारी कर डिमांड रजिस्टर जमा कराने कहा गया है। जल्द रजिस्टर जमा नहीं कराया गया तो दोनों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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