दुर्ग. सेन्ट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (एनजीटी) ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए प्रतिमाओं और दूसरे अपशिष्टों के उपयोगी जलस्रोतों में विसर्जन पर रोक लगा रखी है। इसकी जगह अलग से कुंड बनाकर विसर्जन और इसके बाद सफाई का निर्देश है, लेकिन यहां प्रशासन इन निर्देशों का पालन करा पाने में असफल रहा है। पहले गणेश उत्सव और अब दुर्गा की प्रतिमाएं शिवनाथ में खुले में विसर्जित किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि विसर्जन स्थल अप-स्ट्रीम में ऐसे जगह पर है, जहां से दुर्ग-भिलाई के 7 से 8 लाख आबादी को पीने के लिए पानी सप्लाई किया जाता है।


200 प्रतिमाओं का विसर्जन
दुर्ग-भिलाई में करीब 300 प्रतिमाएं स्थापित की गई थी। इनमें से करीब 200 प्रतिमाओं का विसर्जन शिवनाथ में किया गया। एनजीटी ने 6 फीट से अधिक ऊंचाईकी प्रतिमाओं पर रोक लगा रखी है, लेकिन इस बार इनमें से अधिकतर प्रतिमाएं इससे ज्यादा ऊंचाई की रहीं।


यह मजबूरी... धार्मिक भावनाओं के कारण जोर नहीं
सेन्ट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का निर्देशप्रतिमाओं का विसर्जन कुंड अथवा छोटे जलस्रोतों में करने का है। जबकि यहां शिवनाथ में प्रतिमाओं का विसर्जन सालों से हो रहा है।प्रतिमा स्थापित करने वाले छोटे कुंडों में विसर्जन के लिएतैयार नहीं होते वहीं मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़े होने के कारणअफसर भी जोर नहीं दे पाते।


खामियाजा...अब प्रदूषित नदियों की सूची में शिवनाथ
शिवनाथ देश के 109 नदियों के साथ प्रदूषित नदियों की सूची में शामिल है। दो वर्ष पहले केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (एनजीआरबीए) और राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) के माध्यम से सफाई की घोषणा की गई थी। करीब 10 साल पहले शिवनाथ पर शिल्ट की सफाई भी करानी पड़ी थी।

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