कोरोना खौफ, शादी से लौटे रेलवे कर्मी को मकान मलिक नहीं दिया घर में घुसने, रेस्ट रूम मांगा तो रेलवे ने भी झाड़ दिया पल्ला

राजस्थान से लौटे किराएदार को मकान मालिक ने यह कहते हुए कैंपस में कदम रखने नहीं दिया कि 14 दिन तक शहर में अन्य जगह बिताएं। इसके बाद वह उसके लिए घर का दरवाजा खोलेगा। (chhattisgarh coronavirus update)

By: Dakshi Sahu

Published: 14 Jun 2020, 01:37 PM IST

दुर्ग. बाजार और सार्वजनिक जगहों में कोरोना को लेकर जारी एडवाइजरी का नागरिक खुले आम उल्लंघन कर रहे हंै। वहीं कुछ लोग ऐसे है जो कोरोना को लेकर इतने भयभीत है कि बाहर से आने वालों की परछाई देखने मात्र से भय खा रहे हैं। ऐसा ही वाक्या 11 जून को पटरी पार क्षेत्र हरिनगर में सामने आया। तीन माह बाद 18 घंटे का सफर तय कर राजस्थान से लौटे किराएदार को मकान मालिक ने यह कहते हुए कैंपस में कदम रखने नहीं दिया कि 14 दिन तक शहर में अन्य जगह बिताएं। इसके बाद वह उसके लिए घर का दरवाजा खोलेगा। जबकि रेलवे कर्मचारी शहर में पहुंचते ही सबसे पहले जिला अस्पताल पहुंचा और स्वास्थ्य जांच कराने के बाद वह अपने घर गया था।

खास बात यह है कि रेलवे कर्मचारी (Railway worker) केडी जाटव के अनुरोध पर मोहन नगर पुलिस हरि नगर पहुंची और यह समझाने का प्रयास किया कि वह अपने कमरे से तब तक बाहर नहीं आएगा जब तक कोरोना रिपोर्ट आ नहीं आ जाता। इसके बाद भी मकान मालिक ने यह कहते हुए घर के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी उसके यहां भी छोटे-छोटे बच्चे हैं। वह बिलकुल रिस्क नहीं उठा सकता। 14 दिन अन्यंत्र बिताने के बाद किराएदार के लिए घर का दरवाजा खुला है। 6 वर्ष तक परिवार के सदस्य की तरह किराए पर रखने वाले मकान मालिक के इस बरताव से रेलवे कर्मचारी हतप्रभ हुआ। उसे इस बात की चिंता थी कि वह अपनी पत्नी, 13 साल की बेटी और 10 साल के पुत्र को लेकर कहां जाएगा। वह पूरे दिन कड़ी धूप में मोहल्ले में इधर से उधर भटकते रहा।

रेलवे ने भी रेस्ट रूम देने से मना किया
केडी जाटव ने बताया कि वह वाशिंग लाइन में इलेक्ट्रीशियन पद पर कार्यरत है। मार्च में वह साले की शादी में अवकाश लेकर राजस्थान डौटा जिला के ग्राम गाजीपुर गया था। लॉकडाउन होने की वजह से उसे रुकना पड़ा। वह एहतियात बरते हुए कार से दुर्ग पहुंचा। मकान मालिक ने जब दरवाजा नहीं खोला तो वह अपने अधिकारियों से निवेदन किया कि उसे रेस्ट हाऊस का एक कमरा आवंटित किया जाए, लेकिन रेलवे के अधिकारियों ने नाम्र्स नहीं होने का हवाला देते हुए फोन काट दिया।

रेलवे कर्मचारी ए रवि शेखर को देर रात जानकारी मिली कि कि उसका सहकर्मी शहर में भटक रहा है। उसे कोई आश्रय नहीं दे रहा है। इसके बाद उसने मोबाइल से संपर्क किया और दो कमरे के आवास का 1 कमरा अपने साथी के परिवार को रात गुजराने दिया। एम शेखर ने दिन भर से भूखे परिवार को भोजन उपलब्ध कराया। इसके बाद दूसरे दिन उसने हरि नगर में एक एक कमरे किराए पर लिया और उसे वहां शिफ्ट किया। वर्तमान में केडी जाटव परिवार के साथ साथी द्वारा उपलब्ध कराए गए एक कमरे में रह रहा है। मोहल्ले के ही कुछ लोगों ने भटक रहे परिवार के लिए राशन और बिस्तर की व्यवस्था की।

नवदृष्टि संस्था करेगी सम्मानित
रेलवे कर्मचारी के दर दर भटकने की बात सार्वजनिक होते ही समाज सेवी संस्था नवदृष्टी फाउंडेसन के सदस्य केडी जाटव की तलाश में जुट गए। बाद में उनकी मुलाकात एम रवि शेखर से हुई। उन्होंने बताया कि वह अपने सहकर्मी को घर पर आश्रय दिया है। इसके बाद रवि शेखर के इस काम के लिए संस्था के सदस्यों ने सराहना की और उसे सम्मानित करने का निर्णय लिया।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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