scriptMore than 22 percent rain, yet the reservoir is empty | 22 फीसदी से ज्यादा बारिश फिर भी जलाशय प्यासे, 5 साल में दूसरी बार बने ऐसे हालात | Patrika News

22 फीसदी से ज्यादा बारिश फिर भी जलाशय प्यासे, 5 साल में दूसरी बार बने ऐसे हालात

आषाढ़ का महीना बीतने को है और जिले में 22 फीसदी से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इसके बाद भी जिले की प्यास बुझाने वाले जलाशयों में अब भी पानी की धार भी पहुंचना शुरू नहीं हुआ है। इससे पहले वर्ष 2019 में इस तरह के हालात बनें थे। तब जिले में महज 17.46 फीसदी बारिश हुई थी। वहीं पिछले साल इस अवधि में 32.80 फीसदी बारिश हुई थी और जलाशयों में जलभराव शुरू हो गया था।

दुर्ग

Published: July 12, 2022 10:30:26 am

जिले में इस बार मानसून की बारिश की शुरुआत देरी से हुई, लेकिन अब पिछले सप्ताहभर से अच्छी बारिश हो रही है। इससे अब बारिश का आंकड़ा जिले की औसत वर्षा का 23 फीसदी के करीब पहुंच गया है। जिले में पूरे साल में 1123.7 मिमी बारिश होनी चाहिए। इस सीजन में अब तक 257.2 मिमी बारिश हो चुकी है। इस तरह बारिश का आंकड़ा करीब एक चौथाई के करीब है। हालांकि यह सामान्य स्थिति में इस अवधि में होने वाली बारिश से अभी भी 11 फीसदी कम है, लेकिन पिछले सप्ताहभर से धमधा को छोड़कर जिले के अन्य हिस्सों में अच्छी बारिश हो रही है। पिछले 5 साल के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2019 में ही इससे कम बारिश की स्थिति बनी थी लेकिन बाद में हालात सुधर गए थे।
22 फीसदी से ज्यादा बारिश फिर भी जलाशय प्यासे,  5 साल में दूसरी बार बने ऐसे हालात
जिले की प्यास बुझाने वाले जलाशयों में अब भी पानी की धार भी पहुंचना शुरू नहीं हुआ है

खंडवर्षा के कारण नहीं बन रही धार
खंडवर्षा के कारण नदी व नालों में इस बार पानी का ठीक से बहाव नहीं बन पाया है। इस कारण जलाशयों में भी पानी पहुंचने की स्थिति नहीं बन रही है। अधिकारियों की मानें तो जलाशयों के कैचमेंट में इस बार मूसलाधार बारिश अथवा झड़ी की स्थिति ही नहीं बनी है। हालांकि यहां भी पिछले सप्ताहभर में सुधार हुई है।

30 फीसदी जलभराव जरूरी
जिले के खेतों में सिंचाई के लिए पानी देने वाले तांदुला जलाशय में इस समय महज 27 फीसदी पानी है। शासन के नियमानुसार निस्तारी व पेयजल के लिए कम से कम 30 फीसदी पानी बचाकर रखना जरूरी है। इस लिहाज से देखे तो जलाशयों की स्थिति ठीक नहीं है। खरखरा में इससे केवल 2 फीसदी ज्यादा पानी है।

रोपा-बियासी के लिए अच्छी बारिश की दरकार
जिले में 2 हजार 775 हेक्टेयर में रोपाई पद्यति से खेती की तैयारी है। किसानों ने इसके लिए नर्सरी भी लगा रखा है, लेकिन जिनके पास खुद के संसाधन है उनको छोड़कर पानी की कमी के कारण कोई भी किसान रोपाई का काम शुरू नहीं कर पाए हैं। रोपाई के लिए अभी भी अच्छी बारिश की दरकार है। शुरूआती बोनी वाले खेतों में सप्ताहभर बाद बियासी के लिए पानी की जरूरत होगी।

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