मौत से पहले चरखा चलाकर बुन लिया था अपने कफन का कपड़ा, नहीं रहे भूमिदान आंदोलन में विनोबा भावे के साथ चलने वाले पंथराम वर्मा

भूमिदान आंदोलन में विनोबा भावे के साथ चलकर पाटन ब्लॉक के छोटे से गांव मटंग को पहचान दिलाने वाले पंथराम वर्मा का 96 वर्ष की उम्र में 1 दिसम्बर को निधन हो गया। (Durg News)

By: Dakshi Sahu

Published: 03 Dec 2019, 11:58 AM IST

भिलाई/सेलूद. भूमिदान आंदोलन में विनोबा भावे के साथ चलकर पाटन ब्लॉक के छोटे से गांव मटंग को पहचान दिलाने वाले पंथराम वर्मा का 96 वर्ष की उम्र में 1 दिसम्बर को निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार गृह ग्राम मटंग में सोमवार को किया गया। पंथराम का जन्म 1 अक्टूबर 1924 को हुआ था। इनके पिताजी स्व. उदयराम वर्मा कांग्रेस के किसान नेता व 1952 से 1967 तक विधायक रहे। अपनी स्वभाविक मौत से पहले गांधी जी के आदर्शों पर चलने वाले पंथराम ने चरखा चलाकर कफन का कपड़ा पहले ही बुन लिया था। उसी कफन में लिपटकर वे कर्मभूमि से विदा हुए। इनके छोटे भाई स्व. अनन्तराम वर्मा पूर्व विधायक व मंत्री रहे। पंथराम ने मिडिल स्कूल पाटन से सातवीं तक की शिक्षा ली। उनकी रुचि साहित्य ज्यादा रही। उन्होंने रामायण की परीक्षा गोरखपुर, शिशु परीक्षा विनय पत्रिका, अरण्य कांड, सुंदरकांड, दोहावली, मानस रहस्य, सभी परीक्षा उतीर्ण की और स्वतंत्रता संग्राम के समय गांधी वाघमय का मनन चिंतन किया था।

पिता के जेल जाने पर संभाला कमान
कृषि में स्वयं हल चलाने से लेकर बड़े परिवार की जिम्मेदारी बखूबी निभाते रहे। राजनीतिक क्षेत्र में पिता के साथ 1942 में गांव-गांव जुलूस निकालना। भारत छोड़ो के नारे के साथ सक्रिय रहते। पिता के जेल जाने के बाद भी अभियान चलाते रहे। वे संत विनोबा भावे के शिष्य रहे। महात्मा गांधी के निधन के बाद उनके सेवा ग्राम वर्धा आश्रम में सर्वोदय समाज की स्थापना के समय पिता के साथ मौजूद रहे। भूदान आंदोलन 18 अप्रैल 1959 को संत विनोबा भावे की 13 वर्षीय पदयात्रा में प्रथम भूदान प्रारंभ हुआ। देशभर में 45 लाख एकड़ जमीन मिली। अपने क्षेत्र में स्वर्गीय ठाकुर प्यारेलाल की पदयात्रा से 1954 में भूदान प्राप्त हुआ।

1963 में अखिल भारतीय सर्वोदय सम्मेलन रायपुर में हुआ। 1964 में विनोबा की पदयात्रा रायपुर के दुर्ग जिले में चली। उस समय पूरे एक माह तक लगातार जिला संयोजक के नाते उनके साथ रहे। जिले में भी 13000 एकड़ भूमि प्राप्त हुई और वितरण हुआ। मध्यप्रदेश में निर्मला देशपांडेय विनोबा की मानस पुत्री एवं अध्यक्ष अखिल भारतीय हरिजन सेवक संघ नई दिल्ली की अनुशंसा से 1983 से 1990 तक मध्यप्रदेश भूदान बोर्ड के अध्यक्ष रहे। रचनात्मक कार्यों में खादी ग्रामोद्योग, जिसमे सूत कतई, घानी से तेल पेराई, शराब एवं गौ हत्या बंदी का कार्य चलाया था।

दशहरा उत्सव में करते थे अभिनय
वर्मा ग्राम पटेल, जिला बीस सूत्रीय कार्यक्रम समिति, छत्तीसगढ़ तुलसी मानस प्रतिष्ठान से जुड़े रहे। खादी ग्रामोद्योग अम्बिकापुर सरगुजा में सदस्य एवं माता रूखमणी सेवा संस्थान, विनोबा ग्राम डीमरपाल जगदलपुर बस्तर, प्रदेश हरिजन सेवक संघ में सदस्य हैं। उन्होंने कलाकार के रूप में भी सेवाएं दी। ग्राम मटंग में मालगुजारों के दशहरा उत्सव में अभिनय करते थे। वे अपने पिता की लिखी छत्तीसगढ़ी रामायण के आगे संस्करण को खुद ही लिखा, जिसका विमोचन स्व. संत पवन दिवान ने किया था।

अपने कफन का कपड़ा खुद बनाया
चरखा चलाकर कपड़ा बनाना इनका नित्य कर्म रहा। उन्होंने अपने देहावसान के समय के लिए अपने चरखे से ही कफन कपड़ा बनाकर रखा था। उन्हें श्रद्धांजलि देने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल, ओएसडी आशीष वर्मा, शैलेष मिश्रा, पूर्व केन्द्रीय अध्यक्ष सीताराम वर्मा, मन्नूलाल परगनिहा, अंकट मढ़रिया, नीलमणि भारद्वाज, भागवत वर्मा आदि पहुंचे थे।

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