दुष्कर्म का दर्द झेल रही थी युवती, लोगों के तानों से तंग आकर लगा लिया मौत को गले

एक और दुष्कर्म पीडि़त युवती ने घर में फांसी लगाकर आत्म हत्या कर ली।

By: Dakshi Sahu

Published: 13 Mar 2018, 10:39 AM IST

दुर्ग . एक और दुष्कर्म पीडि़त युवती ने घर में फांसी लगाकर आत्म हत्या कर ली। इसके पहले भिलाई में गैंगरेप पीडि़ता ने समाज के ताने और कार्रवाई के नाम पर जलालत झेलते परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। दुष्कर्म पीडि़त युवती के आत्महत्या करने का मामला सोमवार को सुबह करीब १०.३० बजे की है।

शंकर नगर निवासी 28 साल की दुष्कर्म पीडि़ता रानी (परिवर्तित नाम) ने फांसी लगा ली। अपने घर के एक कमरे में रानी अपने दुपट्टे से फांसी का फंदा तैयार कर झुल गई। परिजनों की नजर पडऩे पर उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जहां उसकी मौत हो गई। मामले में मोहन नगर पुलिस मर्ग कायम कर जांच कर रही है।

दुकान जाने तैयार हुई और कर ली खुदकुशी
पुलिस ने जिला अस्पताल से मेमो आने के बाद मामले में मर्ग कायम किया। रानी एक ज्वेलर्स दुकान में काम करती थी। सुबह रोज की तरह वह दुकान जाने तैयार हुई थी। उसी समय उसकी मां नहाने के लिए बाथरूम में चली गई। मां के नहाने के लिए जाने के बाद उसने अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। अपने कमरे में उसने फांसी लगा ली।

घटना का खुलासा उसकी मां के नहा कर लौटने पर हुआ। पहले वह सोच रही थी कि उसकी बेटी काम पर चली गई है, पर उसके कमरे का दरवाजा अंदर से बंद देखकर उसने आवाज दी। आवाज लगाने के बाद भी रानी ने दरवाजा नहीं खोला तब उन्होंने अपने बेटे को बुलाकर दरवाजा खुलवाया। दरवाजा खुला तो अंदर की हालत देखकर दोनों मां-बेटे दंग रहे गए। रानी फंदे पर झूल रही थी। उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

तीन भाई बहनों में छोटी थी रानी
रानी के पिता पेशे से बिजली सुधारक है। रानी तीन भाई-बहनों में वह छोटी थी। बड़ी बहन का विवाह हो चुका है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में पूछताछ बाद में की जाएगी। एएसआई मोहन नगर थाना बेबी नंदा ने बताया कि मृतका ने वर्ष २०१७ में दुष्कर्म का अपराध दर्ज क राया था। आरोपी अभी जेल में है। प्रकरण में चालान प्रस्तुत किया जा चुका है। प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।

दो सिपाहियों और डॉक्टर ने लूटी थी आबरू
सरकारी अस्पताल में भर्ती रहते हुए जिस छात्रा को वहां के डॉक्टर और दो सिपाहियों ने अपनी हवस का शिकार बनाया था वह इंसाफ के लिए लड़ते-लड़ते हार गई। उसने अपने घर में फांसी का फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। वह एक सुसाइड नोट छोड़ गई थी, जिससे कानून व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया था। उसने लिखा था कि मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना। अब न तो मुझे इंसाफ मिलेगा और न ही मैं जिंदगी में अब आगे बढ़ पाऊंगी।
गैंग रेप पीडि़ता कविता (बदला हुआ नाम) का प्रकरण जनवरी 2015 में सामने आया था। प्रकरण सुर्खियों में आने के बाद पुलिस ने अपने सिपाहियों और डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन एक साल बाद भी अदालत में कविता का बयान नहीं हो सका था। लगातार धमकियों और दबाव के बाद भी अपने इंसाफ के लिए वह डटी रही, आखिर में उसकी हिम्मत जवाब दे गई। कविता ने सपना देखा था कि वह आईपीएस अफसर बन गई है। इसका जिक्र उसने २६ फरवरी २०१५ को लिखे नोट में किया था।

कॉलेज की छात्रा कविता सुपेला अस्पताल में इलाज कराने भर्र्ती हुई थी, लेकिन यहां के डॉक्टर और दो सिपाहियों ने उसकी अस्मत लूट ली। घटना जून २०१४ की है। हॉस्पिटल में मां के साथ उपचार के लिए दाखिल होने वाली कविता को नशे का इंजेक्शन देकर तीनों ने गैंग रेप किया। इसके बाद भी उनकी हैवानियत खत्म नहीं हुई तो उसे वीडियो क्लिप के नाम पर ब्लैकमेल करते रहे।

जनवरी २०१५ को एक दिन कॉलेज से लौट रही कविता को रास्ते से ही उठाकर वे ले गए और रात ११ बजे पावर हाउस चौक में लाकर छोड़ा। वह पुलिसवालों को लावारिस हालत में मिली तब मामले का खुलासा हुआ। सुपेला थाना पुलिस ने रेप का मामला दर्ज कर डॉक्टर गौतम पंडित, आरक्षक चन्द्रप्रकाश और सौरभ को जेल भेजा। इस मामले में चालान भी पेश हो चुका है।

गैंगरेप जैसे मामले में पीडि़ता के बयान नहीं हो पाने का खुलासा उसके सुसाइड नोट से हुआ था। अदालत का समंस से भी इसकी तस्दीक हो रहा था। दअरसल शाम करीब 4 बजे जब पुलिसकर्मी बयान के लिए समंस लेकर पहुंचा। घर पर कविता के दस्तखत के लिए जब वह अंदर दाखिल हुआ तो वह फंदे पर झूलती नजर आई। कविता के पिता ने बताया कि वह रात ड्यूटी से लौटकर आराम कर रहे थे। सिपाही के आने पर उसे बुलाया, लेकिन कोई आवाज नहीं आई। इसलिए सिपाही से अंदर जाकर समंस तामील कराने को कहा था।

Dakshi Sahu Desk/Reporting
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