पत्रिका खबर का असर : स्वास्थ्य विभाग का नोटिस मिलते ही संविदा डॉक्टर ने सौंप दिया इस्तीफा

पत्रिका खबर का असर : स्वास्थ्य विभाग का नोटिस मिलते ही संविदा डॉक्टर ने सौंप दिया इस्तीफा

Naresh Verma | Publish: Apr, 17 2019 05:40:14 PM (IST) Durg, Durg, Chhattisgarh, India

छह माह में केवल एक मरीज देखने के बाद 6 माह का वेतन लेने वाले संविदा डॉक्टर सुबोध किरोलकर को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस जारी किया है। नोटिस मिलते ही डॉ. किरोलकर ने इस्तीफा भी दे दिया है।

दुर्ग. छह माह में केवल एक मरीज देखने के बाद 6 माह का वेतन लेने वाले संविदा डॉक्टर सुबोध किरोलकर को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस जारी किया है। नोटिस मिलते ही डॉ. किरोलकर ने इस्तीफा भी दे दिया है। हालाकि सीएमएचओ ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा। क्षय रोग निदान के तहत उन्हें चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज में सेवाएं देने के लिए नियुक्त किया गया था।

नोटिस का जवाब देने सात दिन का समय
मूल पदस्थापना की जगह अपने प्राइवेट अस्पताल में प्रेक्टिस करने वाले डॉ. किरोलकर को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर ने नोटिस जारी किया है। सीएचएमओ ने नोटिस में सेवाकाल के दौरान मरीजों का फॉलोअप करने की जानकारी के साथ ही जांच के लिए भेजे गए मरीज और ओपीडी में उपस्थित रहने की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। नोटिस का जवाब प्रस्तुत करने सात दिन का समय दिया गया है। उल्लेखनीय है कि सीएचएमओ ने सेक्टर-9 अस्पताल में पदस्थ डॉ. विनायक मेश्राम को भी उपलब्धी बताने नोटिस जारी किया है। दोनों ही डॉक्टर को टीबी कार्यक्रम के तहत 58 हजार प्रतिमाह के हिसाब से संविदा नियुक्ति की गई थी।

एक माह का वेतन लौटाने के लिए तैयार
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डॉ. सुबोध इस्तीफा के साथ एक माह का वेतन जमा करना चाहते थे। उनका तर्क था कि वे सेवा मुक्त होने पूर्व सूचना नहीं दिए है। इसलिए संविदा सेवा शर्तों के तहत वे एक माह का वेतन जमा करना चाहते हैं, लेकिन सीएमएचओ ने जांच के बाद ही इस्तीफा पर चर्चा करने की बात कही है।

इसलिए प्राइवेट अस्पतालों में संविदा डॉक्टर
टीबी क सवेंदनशील कहा जाता है। यह बीमारी संक्रामक है। हवा के माध्यम से टीबी के वायरस स्वस्थ्य मरीज के शरीर में प्रवेश कर जाता है। इस बीमारी का उपचार नि:शुल्क है। इलाज कारगर भी है। सरकार की योजना है कि किसी भी प्राइवेट अस्पताल तक पहुंचे टीबी मरीजों को क्षय नियंत्रण कार्यक्रम से जोड़ा जाए और उन्हे नि:शुल्क उपचार दिया जाए। इसी योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग ने इस कार्यक्रम से सभी बड़ी अस्पताल को जोड़ा है। सीएम मेडिकल कॉलेज और सेक्टर-9 अस्पताल के ओपीड़ी में मरीजों को चिन्हित कर नि:शुल्क दवा देने के लिए संविदा डॉक्टरों को नियुक्त किया है।

दोनों चिकित्सक कर रहे थे ड्यूटी में लापरवाही
संविदा सेवा शर्तो में स्पष्ट उल्लेख है कि नियुक्त के बाद ओपीडी समय में डॉक्टर किसी अन्य प्राइवेट अस्पताल या फिर स्वयं के अस्पताल में सेवाएं नहीं दे सकते। इसके बाद भी डॉ. किरोलकर ओपीडी के समय अपने क्लीनिक में मरीजों को देखते हैं। इसी तरह डॉ. विनायक मेश्राम सेक्टर-9 स्थिति ओपीडी में कभी पहुंचते ही कभी नहीं। दोनों ही मामले सार्वजनिक होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी पाया है।

नोटिस के जवाब के बाद आगे की कार्रवाई
इस संबंध में सीएचएमओ डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर का कहना है कि डॉ. किरोलक ने इस्तीफा दिया है, जिसे अभी स्वीकार नहीं किया गया है। डॉ. किरोलकर और डॉ.विनायक मेश्राम दोनों को ही नोटिस जारी किया गया है। दोनों ही डॉक्टर से पूरे सेवाकाल की उपलब्धि का ब्योरा मांगा गया है। जबाव के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

 

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